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अब बॉयोगैस से बनेगा गुलाबजल

Sun, 20 Sep 2015 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज Updated Sun, 20 Sep 2015 11:28 PM IST
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rosewater will made from Biogas
जिले में अब जल्द ही बॉयोगैस से गुलाब जल तैयार किया जाने लगेगा। जी हां, इसका तरीका सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) ने ईजाद कर लिया है। इस तरीके से बनने वाले गुलाबजल की लागत में 30 फीसदी तक बचत हो सकेगी। साथ ही वातावरण भी शुद्ध रहेगा। क्योंकि पेड़ों की कटान रुकेगी। एफएफडीसी ने 14 लाख रुपये की लागत से प्लांट लगाकर शोध को सफल किया है।
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एफएफडीसी में बॉयोगैस प्लांट लगाने की स्वीकृति प्रमुख सचिव रहे डॉ. हरिहर दास ने दी थी। राज्य सरकार की काउंसिल ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी से यह प्रोजेक्ट वर्ष 2014 में मिला था। शहर किनारे जीटी रोड के निकट स्थित एफएफडीसी में 14 लाख रुपये की लागत से बॉयोगैस प्लांट लगाया जा चुका है।
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प्लांट से पहला प्रयोग गुलाबजल बनाकर किया गया। उद्यमियों को भी इसके फायदे बताए गए। आगे भी प्रयोग हो रहे हैं ताकि लकड़ी पर निर्भरता खत्म की जा सके। एफएफडीसी के प्रधान निदेशक डॉ. शक्ति विनय शुक्ल ने बताया कि वर्ष 2011 में बॉयो एनर्जी मिशन सेल के रीजनल को-आर्डिनेटर पीएस ओझा ने प्लांट लगाने पर चर्चा की थी।
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वह यहां के उद्यमियों को इस बारे में जानकारी देने आए थे। इसके फायदे भी बताए थे। उसके बाद प्रधान निदेशक ने सहायक निदेशक कृषि प्रसार डॉ. आरके श्रीवास्तव, सहायक कमलेश कुमार आदि के साथ इसको सफल किया।


गौरतलब है कि कन्नौज में गुलाबजल बनाने की करीब 350 यूनिटें हैं। गुलाबजल बनाने से लेकर बिक्री करने में करीब 8-10 हजार लोग जुड़े हैं। बायोगैस प्लांट के लगने से लागत में कमी आएगी है तो वस्तु का उपयोग भी बढ़ता है। इससे गुलाब जल बनाने व बेंचने वालों की आमदनी भी बढ़ेगी।


क्या हैं इसके फायदे
- पेड़ों से निकलने वाला कचरा बॉयोगैस में प्रयोग होगा
- गोबर और पेड़ों के सूखे पत्ते भी प्रयोग होंगे
- बॉयोगैस से बिजली व भोजन भी बनाया जाता है
- कचरा का प्रयोग होने से गंदगी दूर होती है
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अन्य पर भी होगा फोकस
गुलाबजल के अलावा बॉयोगैस से दूसरे फूलों का प्रयोग, अतर बनाने में प्रयोग किया जाएगा। सुगंधित तेल निकालने में  भी सहयोग लिया जाएगा। बॉयोगैस से बचे हुए पदार्थ आर्गेनिक खाद का खेतों में भी डाली जाती है। मेंथा, लेमनग्रास, तुलसी, बेला से तेल निकालने वाली यूनिट भी लगा दी गई है। अन्य शोध भी चल रहे हैं।


सरकार व एफएफडीसी ने मिलकर बॉयोगैस प्लांट के लिए बजट दिया है। करीब पांच लाख रुपये फूल, प्लांट चलाने व वैज्ञानिक खर्च हुआ है। जो गुलाबजल के उद्यमी यह प्लांट लगाने के इच्छुक हैं, उनको अनुदान भी मिलेगा। अगर गेल से गैस मिलती है तब भी प्लांट लगाने से उद्यमियों को फायदा होगा।
शक्ति विनय शुक्ल, प्रधान निदेशक, एफएफडीसी
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