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महजब से परे रिश्तों को संवारती रेशम की डोर

Sun, 22 Aug 2021 11:14 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 22 Aug 2021 11:14 PM IST
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अरगुमान को राखी बांधती इदरीसी। संवाद - फोटो : KANNAUJ
तालग्राम। रिश्ते किसी महजब के मोहताज नहीं होते हैं। तालग्राम की माटी ने भाई बहन के प्यार भरे त्योहार रक्षाबंधन पर गंगा जमुनी संस्कृति का एक उदाहरण प्रस्तुत किया। यहां एक मुस्लिम बहन अपने हिंदू भाई को राखी बांध रही है तो वहीं एक अन्य मुस्लिम परिवार भी इस हिंदू पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाता आ रहा है।
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भाई बहन के प्रेम और अटूट विश्वास के पर्व रक्षाबंधन पर ताहपुर के किसान शमील खां की बेटी आसमीन मंसूरी गांव के मुंह बोले भाई महेंद्र सिंह पटेल को राखी बांधती है। बताते हैं इन दोनों परिवारों में कई पीढ़ियों से दोस्ती है। परिवार के बीरेंद्र बताते है कभी भी महजब हम लोगों के बीच नहीं आया। आसमीन छोटे से ही हमेशा राखी बांधती आ रही है।
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कस्बा तालग्राम में मदरसा शिक्षक आफताब इदरीसी ने परिवार में सबको मजहब का भेदभाव न कर सौहार्द्र और भाईचारे से रहने की सीख दी है। रक्षाबंधन पर्व पर उनकी पुत्री मदीहा इदरीसी अपने भाई अरमुगान इदरीसी को रोली का टीका लगा मिठाई खिला कर प्रत्येक साल राखी बांधती है। शिक्षक बताते है कि भाई के लिए रक्षाबंधन से एक दिन पहले बेटी राखियां और मिठाई खरीद कर रखती है। पिछले वर्ष उसने हाथ से रखी तैयार कर बांधी थी।

कन्नौज। महेंद्र को राखी बांधती आसमीन। संवाद

कन्नौज। महेंद्र को राखी बांधती आसमीन। संवाद - फोटो : KANNAUJ

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