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राजनीतिक हस्तक्षेप से अवैध कब्जेदारों को मिला बढ़ावा

Wed, 22 Jan 2020 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 11:54 PM IST
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raajaneetik hastakshep se avaidh kabjedaaron ko mila badhaava
जयचंद के किले को समतल कर बनाए गए मकान। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उप मंडल कार्यालय और जिला प्रशासन 2011 से राजा जयचंद के किले से कब्जे हटाने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक दखल से सफलता नहीं मिली। कब्जेदारों को हटाने के लिए नोटिस भी जारी किए गए। छापामार कार्रवाई हुई। कब्जे नहीं हट सके।
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शहर के उत्तरी छोर पर राजा जयचंद का विशाल किला अब टीले की शक्ल में है। इस पर करीब 25 साल से लोग कब्जा कर रहे हैं। मौजूदा समय में करीब साढ़े छह सौ परिवारों का आशियाना है। 2010 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण महकमे ने उप मंडल कार्यालय की स्थापना की। किले को पुरातन संपदा का दर्जा देकर संरक्षित करने की पहल की गई।
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2011 से करीब छह बार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण महकमे और जिला प्रशासन ने कब्जेदारों को नोटिस जारी कर कब्जा हटाने के आदेश दिए। संरक्षित हिस्से की पैमाइश कर जिला प्रशासन ने पेंट से निशान लगाने के साथ हद तय की थी। बाउंड्री कराकर कब्जेदारों को खदेड़ने का प्रयास भी किया जा चुका है। राजनीतिक दखल के चलते हर बार प्रशासन को उल्टे पांव लौटना पड़ता है।
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14 एकड़ रकबे में चार एकड़ पर कब्जा
एक अगस्त 2017 को तत्कालीन एसडीएम अरुण कुमार ने किले की भूमि की पैमाइश कराई थी।14 एकड़ के दायरे में किले की भूमि चिह्नित की गई। चार एकड़ पर अवैध कब्जा मिला था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के उप मंडल कार्यालय ने निशान लगाने के बाद बाउंड्री कराई थी। इसे कब्जेदारों ने तोड़ दिया है।

गंदगी और जानवरों के अवशेषों से खिन्न होता है मन
किले के आसपास कालोनी की तरह लोगों ने मकान बना लिए हैं। यह लोग मुख्य रूप से पशु पालन और कपड़े धुलाई का काम करते हैं। मवेशियों के मरने पर किले के ऊपर फेंक देते हैं। किले पर मवेशियों के अवशेष और गंदगी से भ्रमण करने वाले लोगों का मन खराब हो जाता है।
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