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तैयारियां पूरी, नवरात्र शुरू

Fri, 20 Mar 2015 11:56 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
अमर उजाला कन्नाैैज Updated Fri, 20 Mar 2015 11:56 PM IST
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Preparations complete, starting Navratri
चैत्र नवरात्र शनिवार से शुरू हो रहे हैं। इस बार तीजा तिथि की हानि होने से नवरात्र आठ दिन के होंगे। 28 मार्च को रामनवमी के साथ नवरात्र का समापन हो जाएगा।
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चैत्र नवरात्र 21 मार्च से लेकर 28 मार्च तक चलेंगे। इसकी तैयारियों को लेकर भक्तगण करीब एक सप्ताह से जुटे हैं। बाजारों में भी पूजन सामग्री से लेकर मां की लाल चुनरी व नारियल से दुकानें सज गई हैं। मंदिरों के आसपास साफ-सफाई ठीक कराने में शुक्रवार को भी भक्तगण जुटे रहे। मानीमऊ निवासी पं. हरिशरण त्रिपाठी ने बताया कि हिंदू नव संवत्सर का शुभारम्भ भी इसी दिन से हो रहा है। इसे वास्तविक नवरात्र से भी जाना जाता है।
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मोहल्ला चौहट्टा निवासी आचार्य कात्यायनी मिश्रा की मानें तो धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की कामना के लिए साधकों द्वारा नवरात्र के प्रारम्भ से लेकर रामनवमी तक निरंतर पूजा-अर्चना की जाती है। कलश स्थापना के साथ शुरू पूजा-अर्चना दिन व रात अनवरत चलती है। कुछ विशेष बातों का ध्यान रखें तो साधक मनवांछित लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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मां के पूजन-विधान
मां के स्थापना स्थल को साफ-सफाई के साथ ही उत्तरी-पूर्वी में रखें। अखंड ज्योति में दो लौंग डालनी चाहिए। इसके साथ ही कलश पर कलावा बांधें। भीगे कपड़ों में मां की आराधना नहीं करनी चाहिए। बालों को खुला नहीं रखना चाहिए। आसन पर बैठकर ही पूजन करें। घी का दीपक जलाकर माचिस की तीली सामने न रखें। गुड़हल के पुष्प के साथ लाल रंग की चुनरी अर्पित करें। देवी स्थापना पर शहनाई और बांसुरी नहीं बजाना चाहिए। घंटी का उपयोग करें।

नया साल साबित होगा कल्याणकारी
शहर के मोहल्ला दीदारगंज निवासी ज्योतिषाचार्य पं. रामप्रताप मिश्रा ने बतोया कि इस बार नवसंवत्सर में शुक्र अधिपति रहेगा। इसका जीवधारियों पर बेहतर प्रभाव पड़ेगा। कई कल्याणकारी कार्य बनेंगे। साथ ही उप अधिपति शनि के वक्री होने से राजनीतिज्ञ, सामाजिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। मंगल इस वर्ष का मंत्री है। साथ ही कर्क लग्न का प्रारम्भ भी शुभ माना गया है।


कलश स्थापना के मुहूर्त
* सुबह 6:35 से 7:45 बजे तक (ब्रह्मा मुहूर्त)
* सुबह 11:50 से दोपहर 12:49 बजे तक (अभिजीत मुहूर्त)

अखंड ज्योति से पूर्ण होते कार्य
भारतीय परंपरा में कोई भी पूजन अग्नि को साक्षी मानकर किया जाता है। मान्यता है कि नवरात्र में अखंड ज्योति से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ज्योति की ज्वाला जितनी तेज होगी पूजन उतना ही फलदायी माना जाता है। लेकिन अधिक तेज जलाने से कार्बन भी ज्यादा निकलने का अंदेशा रहता है। इसलिए मध्यम ज्वाला जलाने पर फोकस करना चाहिए।
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