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सपा-भाजपा छोडने वाले चचेरे भाई हार गए चुनाव
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कन्नौज। इत्रनगरी में भी दलबदलुओं की दाल नहीं गली। मतदाताओं ने उनको पूरी तरह से नकार दिया। सपा और भाजपा छोड़कर बसपा से अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने वाले तिर्वा और भोजपुर के बसपा प्रत्याशी भी चुनाव हार गए। इतना ही नहीं रिश्ते में चचेरे भाई जमानत तक नहीं बचा सके।
दरअसल, तहसील तिर्वा क्षेत्र के गांव महादेवपुर्वा निवासी अजय वर्मा और आलोक वर्मा चचेरे भाई हैं। अजय वर्मा ब्लॉक उमर्दा के प्रमुख हैं। उन्होंने तिर्वा सीट से भाजपा से टिकट भी मांगा था, लेकिन कैलाश राजपूत का नाम फाइनल होने की वजह से नाराज हो गए और आरोप लगाकर भाजपा छोड़ दी। इसके बाद बसपा से अजय वर्मा ने चुनाव लड़ा और हार गए। दूसरी ओर चचेरे भाई आलोक वर्मा जो पूर्व सांसद प्रो. रामबख्श वर्मा के बेटे हैं, सपा में थे। उन्होंने भी तिर्वा विधानसभा क्षेत्र से तैयारी कर टिकट मांगा था, लेकिन यहां पूर्व माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल के बेटे अनिल पाल को सपा ने चुनाव लड़ाया। सपा से टिकट न मिलने पर आलोक वर्मा ने भी बसपा ज्वाइन कर फर्रुखाबाद जिले की भोजपुर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन वे भी हार गए। इसको लेकर चर्चाओं का दौर चल रहा है।
आलोक वर्मा को नहीं मिले आठ फीसदी भी वोट
भोजपुर विधानसभा सीट से बसपा के बैनर तले चुनाव लड़ने वाले आलोक वर्मा को 15714 वोट ही मिले। इसमें 76 वोट बैलेट पेपर के शामिल हैं। कुल 7.97 फीसदी ही वोट मिले। इस सीट पर नागेंद्र सिंह राठौर भाजपा से चुनाव जीते, उनको 99979 मत मिले। यहां सपा से अरशद जमाल सिद्दीकी दूसरे नंबर पर रहे। उनको 72521 मत मिले। सपा को कुल 36.76 फीसदी वोट मिला।
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अजय वर्मा को कुल 9.69 फीसदी वोट मिले
तिर्वा विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी अजय वर्मा को कुल 23092 वोट मिले। इसमें 69 पोस्टल बैलेट और 23023 ईवीएम के मत हैं। कुल मिले वोट का प्रतिशत 9.69 रहा। यहां पर भाजपा प्रत्याशी कैलाश राजपूत दूसरी बार लगातार चुनाव जीते। उनको 106089 वोट यानी 44.51 फीसदी मत मिले। दूसरे नंबर पर सपा के अनिल पाल रहे, जिन्हे 101481 मत मिले। वोट प्रतिशत 42.57 रहा।
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दरअसल, तहसील तिर्वा क्षेत्र के गांव महादेवपुर्वा निवासी अजय वर्मा और आलोक वर्मा चचेरे भाई हैं। अजय वर्मा ब्लॉक उमर्दा के प्रमुख हैं। उन्होंने तिर्वा सीट से भाजपा से टिकट भी मांगा था, लेकिन कैलाश राजपूत का नाम फाइनल होने की वजह से नाराज हो गए और आरोप लगाकर भाजपा छोड़ दी। इसके बाद बसपा से अजय वर्मा ने चुनाव लड़ा और हार गए। दूसरी ओर चचेरे भाई आलोक वर्मा जो पूर्व सांसद प्रो. रामबख्श वर्मा के बेटे हैं, सपा में थे। उन्होंने भी तिर्वा विधानसभा क्षेत्र से तैयारी कर टिकट मांगा था, लेकिन यहां पूर्व माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल के बेटे अनिल पाल को सपा ने चुनाव लड़ाया। सपा से टिकट न मिलने पर आलोक वर्मा ने भी बसपा ज्वाइन कर फर्रुखाबाद जिले की भोजपुर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन वे भी हार गए। इसको लेकर चर्चाओं का दौर चल रहा है।
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आलोक वर्मा को नहीं मिले आठ फीसदी भी वोट
भोजपुर विधानसभा सीट से बसपा के बैनर तले चुनाव लड़ने वाले आलोक वर्मा को 15714 वोट ही मिले। इसमें 76 वोट बैलेट पेपर के शामिल हैं। कुल 7.97 फीसदी ही वोट मिले। इस सीट पर नागेंद्र सिंह राठौर भाजपा से चुनाव जीते, उनको 99979 मत मिले। यहां सपा से अरशद जमाल सिद्दीकी दूसरे नंबर पर रहे। उनको 72521 मत मिले। सपा को कुल 36.76 फीसदी वोट मिला।
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अजय वर्मा को कुल 9.69 फीसदी वोट मिले
तिर्वा विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी अजय वर्मा को कुल 23092 वोट मिले। इसमें 69 पोस्टल बैलेट और 23023 ईवीएम के मत हैं। कुल मिले वोट का प्रतिशत 9.69 रहा। यहां पर भाजपा प्रत्याशी कैलाश राजपूत दूसरी बार लगातार चुनाव जीते। उनको 106089 वोट यानी 44.51 फीसदी मत मिले। दूसरे नंबर पर सपा के अनिल पाल रहे, जिन्हे 101481 मत मिले। वोट प्रतिशत 42.57 रहा।