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Kannauj News: धर्मांतरण के खेल में विदेशी फंडिंग को भी तलाश रही पुलिस

Thu, 28 Aug 2025 12:07 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 Aug 2025 12:07 AM IST
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Police also looking for foreign funding in conversion game
कन्नौज। गुरसहायगंज में धर्म परिवर्तन का मामला अब सामने आया है तो पुलिस विदेशी फंडिंग होने का भी अनुमान लगा रही है। पुलिस की जांच इस ओर मुड़ गई है कि आखिर आरोपी इतना धन कहां से लाते हैं, जिन्हें गरीबों में बांटकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था।
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पुलिस उन ईसाई मिशनरियों की भी तलाश कर रही है, जो धर्म परिवर्तन को लेकर पहले भी पुलिस के शिकंजे में आ चुकी हैं। इससे जुड़े होने के सबूत भी खंगाल रही है। बुधवार को धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद अब पुलिस इस मामले की तह तक जाने में जुट गई है।
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मुख्य आरोपी गौवडा प्रसाद आंध्र प्रदेश का रहने वाला है, जो दिल्ली की एक चर्च से भी जुड़ा है। इसका मुख्य काम धर्म का प्रचार प्रसार करना है, जो उत्तर भारत के कई जिलों में जाकर लोगों को प्रार्थना सभा और अंधविश्वास के सहारे ईसाई धर्म अपनाने के लिए विवश करता है। इसके बाद वह लालच भी देता है, जिसमें गरीबों की गरीबी दूर करने तथा कुंवारों की शादी करने का भी आश्वासन दिया जाता है।
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बताया गया कि ऐसा करके वह कई लोगों का धर्म परिवर्तन कर चुका है। सौरिख थाना क्षेत्र के मिसरपुर गांव का रहने वाला धर्मेंद्र जब उसके संपर्क में आया तो उसने जिले के कई लोगों से गौवडा प्रसाद का संपर्क कराया और यहां भी धर्मांतरण का खेल शुरू हो गया। सीओ सिटी अभिषेक प्रताप अजेय ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ और उनके मोबाइल से मिली सामग्री के आधार पर यह पता चला है कि अभी तक इन्होंने लाखों रुपए खातों में ट्रांसफर किए हैं। इन खाताधारकों का पता लगाया जा रहा है।
आरोपियों के पास धन कहां से आता है, इसके पीछे विदेशी फंडिंग भी हो सकता है। इसकी भी जांच की जा रही है। यदि ऐसा पाया गया तो यह एक बड़ा गिरोह है, जो कन्नौज ही नहीं, कई जिलों में सक्रिय है। पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया की धर्मांतरण का यह मामला तब सामने आया जब एक महिला ने शिकायत की। पुलिस इस गिरोह से जुड़े सभी सदस्यों को पकड़ने की कोशिश कर रही है। पुलिस इसकी तह तक जाएगी कि आखिरकार जिले में धर्मांतरण का काम कब शुरू हुआ था।

अनूठे प्रयोग दिखाकर किया जाता ब्रेनवॉश
ग्रामीणों ने बताया की धर्मांतरण करने वाले लोग चोरी छिपे आते थे और लोगों को बुलाकर प्रवचन सुनाते थे, जिसमें बताया जाता था कि दूसरे धर्म के देवी देवता फर्जी होते हैं। इसके लिए प्रयोग भी करते थे, जिसमें ईसा मसीह की लकड़ी की मूर्ति को पानी में डुबोया जाता था तो वह तैरती रहती थी जबकि किसी भगवान की मिट्टी की मूर्ति को पानी में डुबाते थे तो वह गल जाती थी। इस तरह वह लोगों को बताते थे कि भगवान की मूर्ति पानी में डूब गई जबकि ईसा मसीह की प्रतिमा तैरती रही, इसलिए यही सच्चे भगवान हैं। हालांकि पुलिस इस तथ्य की पुष्टि नहीं कर रही है। उसका कहना है कि जांच के बाद ही सारी चीज सामने आएगी।
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