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यूरिया न आई तो कैसे होगी बुवाई

Fri, 04 Sep 2020 12:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2020 12:15 AM IST
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आलू बीज की छंटाई करते मजदूर। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। पिछले करीब एक वर्ष से आलू महंगा होने से इस बार जिले में अगैती आलू का रकबा बढ़ने की संभावना है। किसानों ने अगैती आलू बुवाई की तैयारी भी शुरू कर दी है लेकिन जरूरत के हिसाब से यूरिया की कमी है। अगैती आलू बुवाई के लिए करीब छह हजार एमटी यूरिया चाहिए लेकिन इस समय केवल दो हजार एमटी उपलब्ध है, अगर समय पर खेप न आई तो बुवाई प्रभावित हो सकती है। इसको लेकर किसान परेशान हैं।
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जिले में पिछले करीब 1.20 लाख किसानों ने पिछले वर्ष 48 हजार 500 हेक्टेयर में आलू की बुवाई की थी। करीब 12 लाख मीट्रिक टन आलू की उपज हुई थी। इस समय 1400 से 1500 रुपये तक 50 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है। आलू महंगा होने से बड़ी संख्या में किसान अगैती फसल की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। खेत तैयार किए जा रहे हैं। किसानों ने शीतगृहों से आलू बीज निकालकर छंटाई करवा रहे हैं।
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जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि जिले में 15 सितंबर से अगैती आलू बुवाई शुरू हो जाएगी। इसके लिए करीब छह हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत पड़ेगी लेकिन अभी 40 समितियों में 2000 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है और उठान लगातार जारी है। किसानों मानना है कि अगर यूरिया नहीं मिली तो फसल की बुआई प्रभावित होगी।
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जिला कृषि अधिकारी राममिलन परिहार ने बताया कि आलू के लिए शासन से चार हजार मीट्रिक टन यूरिया मांगी गई है। जल्द ही खेप आने की संभावना है।
पिछले साल आलू
48500 हेक्टेयर में बुवाई हुई थी
12 लाख मीट्रिक टन उपज
937437 एमटी शीतगृह में भंडारित
276544 एमटी अभी तक निकासी
660893 एमटी अभी शीतगृह में रखी
प्रति 50 किलोग्राम आलू बीज के दाम
ख्याति 1500 रुपये
लालगुलाल 1600 रुपये
पुखराज 1500 रुपये
चिपसोना 1300 रुपये
सिंदूरी 1550 रुपये
खादी की कालाबाजारी करने वालों होगी कार्रवाई
जिला कृषि अधिकारी राम मिलन परिहार ने बताया कि यूरिया का 266 रुपये 50 पैसे प्रति 45 किलो का दाम निर्धारित है। डीएपी 50 किलो बोरी का दाम 1200 रुपये है। ओवर रेटिंग और कालाबाजारी करने वाले लोगों के खिलाफ अभियान चल रहा है। अगर किसी दुकानदार ने अधिक दाम में खाद बेची या कालाबाजारी की तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
इनसेट...
फोटो 01-किसान राजू अहमदपुर रौनी
प्रति बीघा 10 हजार आती लागत
अहमदपुर रौनी के किसान राजू ने बताया कि करीब एक बीघा आलू की फसल करने में 10 हजार की लागत आती है। कोल्डस्टोर से आलू बीज निकाल कर बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है। खाद के लिए समितियों के चक्कर काट रहे हैं।
इनसेट...
फोटो 02-सुधीर चौकी मुस्ताफाबाद
फसल चक्र बिगड़ने पर बढ़ेगी परेशानी
किसान सुधीर कुमार ने बताया है कि साल में होने वाली सभी फसलें आलू की फसल पर निर्भर करती है। आलू की फसल में देरी होने पर फसल चक्र प्रभावित होता है। जिससे बड़ा नुकसान होता है।
इनसेट...
फोटो 03-मोहम्मद फरीद निवासी शरीफापुर
खाद के लिए किसान परेशान
आलू किसान मोहम्मद फरीद ने बताया कि यूरिया और डीएपी के बगैर आलू की पैदावार असंभव है। इससे आलू बुवाई के लिए वह खाद के लिए परेशान है। समितियों पर खाद नहीं मिल रही है।

इनसेट...
फोटो 04-राधेश्याम खुसटिया
निजी दुकानदारों से लेनी पड़ रही यूरिया
खाद की किल्लत बनी हुई है। कई किसानों ने खाद पहले से खरीदकर डंप कर ली है। इससे अब छोटे और मछोले किसानों को महंगे दामों में निजी दुकानदारों से खाद खरीदकर बुवाई करने पड़ेगी।
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