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बिना बजट कैसे चालू हो छात्रावास
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Wed, 02 Mar 2016 12:13 AM IST
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एक ओर जहां जिले में नित नए विकास कार्य कराने के लिए
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धन की वर्षा की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बजट के अभाव में हरिजन
छात्रावास करीब एक साल से सफेद हाथी बना खड़ा है। नए शैक्षिक सत्र में भी
यहां छात्रों के गुलजार होने के आसार ठंडे पड़ गए हैं, क्योंकि अभी तक
मरम्मत कार्य के लिए धनराशि का आवंटन ही नहीं हो सका है।
आजकल करते-करते करीब एक साल बीत गए हैं, लेकिन दलित छात्रावास को चालू कराने संबंधी दावे हवा हवाई ही साबित हुए हैं। ज्ञात हो कि समाज कल्याण विभाग की ओर से शहर के मोहल्ला मकरंदनगर में विनोद दीक्षित चिकित्सालय के सामने करीब 11 साल पहले अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों के लिए आवासीय भवन का निर्माण कराया गया था।
इस दो मंजिला इमारत में कुल 17 कमरे हैं। इस छात्रावास में एक साथ 48 छात्र रहकर पढ़ाई कर सकते हैं, पर शासन-प्रशासन की लापरवाही से यह दलित छात्रावास छात्रों के लिए बेमतलब साबित हो रहा है। लाखों रुपये की लागत इस बिल्डिंग को बनाने पर खर्च हुई थी, लेकिन विद्यार्थियों को धेला भर भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू होना है, लेकिन छात्रावास में टूटी पड़ीं खिड़कियां, जर्जर दरवाजे, ध्वस्त पानी की टंकी और बिजली लाइन की फिटिंग एवं मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है। छात्रावास परिसर का मुख्य गेट तक का अतापता नहीं है। इससे आवारा जानवर यहां विचरण करते और गोबर आदि की गंदगी फैलाते रहते हैं।
वहीं शाम होते ही खाली पड़े परिसर में जुआरियों का जमघट भी लगता है। इस बाबत पीएसएम कालेज के छात्रसंघ महामंत्री सोमू सैनी का कहना है कि जिलाधिकारी को इस मामले में दखल देना चाहिए, ताकि छात्रावास चालू हो और दूरदराज के गांवों में रहने वाले छात्र यहां के कमरों में रहकर पढ़ाई कर सकें। बताया कि मौजूदा समय में या तो वे गांव से साइकिल से आते-जाते हैं या फिर किराए पर कमरा लेकर रहने को मजबूर हैं।
आजकल करते-करते करीब एक साल बीत गए हैं, लेकिन दलित छात्रावास को चालू कराने संबंधी दावे हवा हवाई ही साबित हुए हैं। ज्ञात हो कि समाज कल्याण विभाग की ओर से शहर के मोहल्ला मकरंदनगर में विनोद दीक्षित चिकित्सालय के सामने करीब 11 साल पहले अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों के लिए आवासीय भवन का निर्माण कराया गया था।
इस दो मंजिला इमारत में कुल 17 कमरे हैं। इस छात्रावास में एक साथ 48 छात्र रहकर पढ़ाई कर सकते हैं, पर शासन-प्रशासन की लापरवाही से यह दलित छात्रावास छात्रों के लिए बेमतलब साबित हो रहा है। लाखों रुपये की लागत इस बिल्डिंग को बनाने पर खर्च हुई थी, लेकिन विद्यार्थियों को धेला भर भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू होना है, लेकिन छात्रावास में टूटी पड़ीं खिड़कियां, जर्जर दरवाजे, ध्वस्त पानी की टंकी और बिजली लाइन की फिटिंग एवं मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है। छात्रावास परिसर का मुख्य गेट तक का अतापता नहीं है। इससे आवारा जानवर यहां विचरण करते और गोबर आदि की गंदगी फैलाते रहते हैं।
वहीं शाम होते ही खाली पड़े परिसर में जुआरियों का जमघट भी लगता है। इस बाबत पीएसएम कालेज के छात्रसंघ महामंत्री सोमू सैनी का कहना है कि जिलाधिकारी को इस मामले में दखल देना चाहिए, ताकि छात्रावास चालू हो और दूरदराज के गांवों में रहने वाले छात्र यहां के कमरों में रहकर पढ़ाई कर सकें। बताया कि मौजूदा समय में या तो वे गांव से साइकिल से आते-जाते हैं या फिर किराए पर कमरा लेकर रहने को मजबूर हैं।