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नोटिस के बाद बढ़ी रार, गुटों में बंटे सभासद
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कन्नौज। ईओ को हटाने के मामले में नगर पालिका अध्यक्ष को शासन से नोटिस मिलने के बार रार और बढ़ गई है। सभासद दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट अध्यक्ष और एक ईओ के साथ खड़ा हो गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि पालिकाध्यक्ष को ईओ को हटाने का अधिकार ही नहीं है।
तीन मई को हुई बोर्ड बैठक में पालिकाध्यक्ष कन्नौज शैलेंद्र अग्निहोत्री ने 21 सभासदों की सहमति पर अधिशासी अधिकारी संजय कुमार गौतम को कार्यमुक्त का प्रस्ताव पास कराया था। इसके बाद मिनट बुक में ईओ को कार्यमुक्त करने का विवरण भी दर्ज करा दिया था। बैठक में तीन सभासदों ने कार्रवाई का विरोध किया था। इसके बाद ईओ ने शासन में उन्हें अवैध ढंग से कार्यमुक्त करने की शिकायत की थी। वह लगातार काम भी कर रहे थे। ईओ की शिकायत के आधार पर विशेष सचिव संजय कुमार सिंह यादव ने पालिकाध्यक्ष को नोटिस भेजा है। उधर नोटिस मिलने के बाद सभासद दो गुटों में बंट गए हैं। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पर सहमति देने वाले कुछ सभासद भी ईओ के पाले मेें चले गए हैं। इससे बोर्ड में भी अध्यक्ष का पक्ष कमजोर होता दिख रहा है।
अध्यक्ष का कहना है कि ईओ को कार्यमुक्त करने का फैसला पालिका बोर्ड ने लिया था। उन्हें प्रमुख सचिव के नोटिस की जानकारी नहीं है। इस संबंध में डीएम राकेश कुमार मिश्रा का कहना है कि 27 मई को मामला सामने आया था। ईओ को काम करने के लिए कहने के साथ शिकायत शासन को भेज दी थी। शासन से यह निर्देश आए हैं कि पालिकाध्यक्ष, ईओ को कार्यमुक्त नहीं कर सकते हैं। शासन स्तर से इसकी जांच भी चल रही है।
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तीन मई को हुई बोर्ड बैठक में पालिकाध्यक्ष कन्नौज शैलेंद्र अग्निहोत्री ने 21 सभासदों की सहमति पर अधिशासी अधिकारी संजय कुमार गौतम को कार्यमुक्त का प्रस्ताव पास कराया था। इसके बाद मिनट बुक में ईओ को कार्यमुक्त करने का विवरण भी दर्ज करा दिया था। बैठक में तीन सभासदों ने कार्रवाई का विरोध किया था। इसके बाद ईओ ने शासन में उन्हें अवैध ढंग से कार्यमुक्त करने की शिकायत की थी। वह लगातार काम भी कर रहे थे। ईओ की शिकायत के आधार पर विशेष सचिव संजय कुमार सिंह यादव ने पालिकाध्यक्ष को नोटिस भेजा है। उधर नोटिस मिलने के बाद सभासद दो गुटों में बंट गए हैं। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पर सहमति देने वाले कुछ सभासद भी ईओ के पाले मेें चले गए हैं। इससे बोर्ड में भी अध्यक्ष का पक्ष कमजोर होता दिख रहा है।
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अध्यक्ष का कहना है कि ईओ को कार्यमुक्त करने का फैसला पालिका बोर्ड ने लिया था। उन्हें प्रमुख सचिव के नोटिस की जानकारी नहीं है। इस संबंध में डीएम राकेश कुमार मिश्रा का कहना है कि 27 मई को मामला सामने आया था। ईओ को काम करने के लिए कहने के साथ शिकायत शासन को भेज दी थी। शासन से यह निर्देश आए हैं कि पालिकाध्यक्ष, ईओ को कार्यमुक्त नहीं कर सकते हैं। शासन स्तर से इसकी जांच भी चल रही है।
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