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स्मारक, सड़क और न बना गेट
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Mon, 25 Jan 2016 11:39 PM IST
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तीन वर्ष पूर्व ग्राम कायमपुर के सीआरपीएफ जवान दिलीप
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कुमार ने देश की रक्षा करते हुए नक्सली हमले में प्राण गंवा दिए थे। उसकी
शहादत के बाद शासन-प्रशासन ने तमाम आश्वासन दिए, पर तीन वर्ष बीतने के बाद
भी न तो अभी तक शहीद स्मारक बना और न ही स्मृति द्वार व सड़क पक्की हो सकी
है।
ग्राम कायमपुर निवासी सतीशचंद्र वर्मा का बेटा दिलीप कुमार वर्ष 07 में लखनऊ से सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। केरल में ट्रेनिंग के बाद तीन वर्ष पूर्व 13 फरवरी 13 को वह झारखंड में नक्सली हमले में प्राण गंवा दिए थे। 16 फरवरी को उनका शव गांव पहुंचा था।
दिलीप के पिता सतीशचंद्र ने बताया कि उस समय अधिकारियों और नेताओं ने आश्वासन दिया था कि गांव के बाहर सैनिक के नाम पर स्मृति द्वार और स्मारक बनाया जाएगा। इसके अलावा घर तक पक्की सड़क कराई जाएगी, पर तीन साल समय बीतने के बाद भी अभी तक एक भी आश्वासन पूरे नहीं हो सके हैं।
उनकी पत्नी संगीता अपने पुत्र के साथ छिबरामऊ में आवास विकास में किराए के मकान में रह रही है। संगीता ने बताया कि उसे पति की मौत के बाद नौकरी का आश्वासन दिया गया था। वह तीन साल से लखनऊ के चक्कर काट रही है, पर अभी तक उसे नौकरी नहीं मिली है।
ग्राम कायमपुर निवासी सतीशचंद्र वर्मा का बेटा दिलीप कुमार वर्ष 07 में लखनऊ से सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। केरल में ट्रेनिंग के बाद तीन वर्ष पूर्व 13 फरवरी 13 को वह झारखंड में नक्सली हमले में प्राण गंवा दिए थे। 16 फरवरी को उनका शव गांव पहुंचा था।
दिलीप के पिता सतीशचंद्र ने बताया कि उस समय अधिकारियों और नेताओं ने आश्वासन दिया था कि गांव के बाहर सैनिक के नाम पर स्मृति द्वार और स्मारक बनाया जाएगा। इसके अलावा घर तक पक्की सड़क कराई जाएगी, पर तीन साल समय बीतने के बाद भी अभी तक एक भी आश्वासन पूरे नहीं हो सके हैं।
उनकी पत्नी संगीता अपने पुत्र के साथ छिबरामऊ में आवास विकास में किराए के मकान में रह रही है। संगीता ने बताया कि उसे पति की मौत के बाद नौकरी का आश्वासन दिया गया था। वह तीन साल से लखनऊ के चक्कर काट रही है, पर अभी तक उसे नौकरी नहीं मिली है।