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Kannauj News: संभार के सींग टूटे मिलने से उठ रहे कई सवाल
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तालग्राम (कन्नौज)। दफनाए गए वन्य जीव शव को खोदकर निकालने के बाद उसके सांभर होने की पुष्टि होने और सींग टूटे होने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। संभार के सींग लाखों रुपये में बिकते हैं, इस वजह से आशंका जताई जा रही है कि शव को दफनाने से पहले उसके सींग को तोड़ लिया गया था। मामले में तस्करी की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, कंपनी के अधिकारी शव को दफनाते समय जेसीबी से टूटने की बात कह रहे हैं। वन विभाग मामले की जांच कर रहा है।
बता दें कि एक शिकायत के बाद शुक्रवार को वन विभाग के डिप्टी रेंजर धीरेंद्र सिंह यादव व पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेहर सिंह टीम के साथ सौरिख स्थित आरजीबीईएल के यार्ड में पहुंचे। खोदाई करवाकर दफनाए गए जानवर के शव को बाहर निकलवाया। एक्सप्रेसवे पर हादसे के बाद जिस हिमांशु नाम के युवक ने तस्वीर यूपीडा के अधिकारियों को भेजी थी, उसमें करीब डेढ़ फीट के सींग थे। खोदाई के बाद शव बाहर निकला तो सींग टूटे मिले हैं। इससे कई सवाल उठने लगे हैं।
यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी मनोहर सिंह ने हिरण बताकर दफनाने की बात कही थी। आरजीबीईएल के मैनेजर राजेंद्र सिंह ने बताया कि कर्मचारियों को कानून की जानकारी नहीं थी, इस वजह से सांभर को यार्ड में दफना दिया गया था। डिप्टी वन रेंजर ने रिपोर्ट तैयार कर प्रभागीय वनाधिकारी को भेजी है। बता दें कि वन्य जीव के हादसे में मरने या घायल होने पर उसकी जानकारी वन विभाग को अनिवार्य रूप से देनी होती है।
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लाखों रुपये में बिकते हैं सांभर के सींग
सांभर के सींगों से कला क्राफ्ट के अलावा दवाइयां आदि बनाई जाती हैं। सौंदर्य प्रसाधन सामग्री में भी प्रयोग किया जाता है। इस वजह से सींग की कीमत लाखों रुपये में होती है। एक किग्रा सींग 10 से 12 लाख रुपये में बिकता है।
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बता दें कि एक शिकायत के बाद शुक्रवार को वन विभाग के डिप्टी रेंजर धीरेंद्र सिंह यादव व पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेहर सिंह टीम के साथ सौरिख स्थित आरजीबीईएल के यार्ड में पहुंचे। खोदाई करवाकर दफनाए गए जानवर के शव को बाहर निकलवाया। एक्सप्रेसवे पर हादसे के बाद जिस हिमांशु नाम के युवक ने तस्वीर यूपीडा के अधिकारियों को भेजी थी, उसमें करीब डेढ़ फीट के सींग थे। खोदाई के बाद शव बाहर निकला तो सींग टूटे मिले हैं। इससे कई सवाल उठने लगे हैं।
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यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी मनोहर सिंह ने हिरण बताकर दफनाने की बात कही थी। आरजीबीईएल के मैनेजर राजेंद्र सिंह ने बताया कि कर्मचारियों को कानून की जानकारी नहीं थी, इस वजह से सांभर को यार्ड में दफना दिया गया था। डिप्टी वन रेंजर ने रिपोर्ट तैयार कर प्रभागीय वनाधिकारी को भेजी है। बता दें कि वन्य जीव के हादसे में मरने या घायल होने पर उसकी जानकारी वन विभाग को अनिवार्य रूप से देनी होती है।
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लाखों रुपये में बिकते हैं सांभर के सींग
सांभर के सींगों से कला क्राफ्ट के अलावा दवाइयां आदि बनाई जाती हैं। सौंदर्य प्रसाधन सामग्री में भी प्रयोग किया जाता है। इस वजह से सींग की कीमत लाखों रुपये में होती है। एक किग्रा सींग 10 से 12 लाख रुपये में बिकता है।