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सड़कों पर उतरा प्रशासन, 1092 अन्ना मवेशी पकड़े
Thu, 10 Jan 2019 11:42 PM IST
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kannauj
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Published by: gaurav gaurav
Updated Thu, 10 Jan 2019 11:42 PM IST
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एसडीएम नगर पंचायत कर्मियों को देते दिशा निर्देश
- फोटो : amarujala
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कन्नौज। जिला प्रशासन ने गुरुवार को अभियान चलाकर 1092 अन्ना मवेशियों को पकड़ा। अभी तक 1160 मवेशियों को पकड़कर गोशाला पहुंचाया गया। जिलाधिकारी रवींद्र कुमार की सख्ती के बाद जिले के आठ निकायों में कुल नौ मवेशी ही पकड़े जा सके। ऐसे मेंकुछ अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई भी हो सकती है।
प्रशासन की गणना के मुताबिक जिले में 3475 अन्ना मवेशी हैं। जिन्हें कन्नौज ब्लाक ब्लाक में दो, जलालाबाद ब्लाक में पांच, गुगरापुर ब्लाक में पांच, तालग्राम ब्लाक में दो, छिबरामऊ ब्लाक में तीन, सौरिख ब्लाक में तीन, हसेरन ब्लाक में तीन और उमर्दा ब्लाक में तीन जगह रखने की व्यवस्था की गई। सभी आठों ब्लाकों में 26 और आठ निकाय क्षेत्रों में आठ स्थानों पर गोशाला का निर्माण कर कुल 34 स्थान मवेेशियों को रखने के लिए चिन्ह्ति किए गए थे।
दो जनवरी से इन मवेशियों को गोशाला में पहुंचाने के लिए अभियान की शुरुआत की। 10 जनवरी अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। इन सभी स्थानों पर 400 मवेशियों को गोशाला तक पहुंचाया गया था। डीएम रवींद्र कुमार के निर्देशन में गुरुवार को 692 अन्ना मवेशी पकड़े गए।
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कन्नौज ब्लाक में गुरुवार को 31, गुगरापुर और जलालाबाद में 120, तालग्राम में 65, छिबरामऊ में 32, सौरिख में 324, हसेरन में 20, उमर्दा में 60 अन्ना मवेशियों को पकड़ा गया। नगर निकाय में दो दिनों में 68 अन्ना मवेशी पकड़े जा सके। मुख्य विकास अधिकारी एसके सिंह ने का कहना है कि बीडीओ के निर्देशन में अन्ना मवेशियों को पकड़ने के लिए लगातार टीमें काम कर रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही सभी अन्ना मवेशियों को पकड़ लिया जाएगा। पशु पालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने मवेशियों को बांधकर रखें। पालतू मवेशी घूमता मिला पशु पालक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
गोशाला में जबरन मवेशी छोड़ने पर विरोध
तालग्राम। नगर पंचायत तालग्राम में बने बाड़े में क्षमता से ज्यादा मवेशी होने पर कर्मचारी उन्हें ग्राम पंचायत पनगवां के जयरामपुर बनी गोशाला में छोड़ने गए। जहां ग्रामीणों ने गोशाला में व्यवस्थाएं न होने का हवाला देकर रोक दिया। कर्मचारियों ने समझाने का प्रयास किया तो ग्रामीण विरोध पर उतर आए। इसके बाद कर्मचारी मवेशी लेकर लौट आए। तालग्राम बाड़े में 10 से 15 मवेशियों को रखने की व्यवस्था है। जबकि यहां 29 अन्ना अधिक आ गए। इन मवेशियों को नगर पंचायत का चालक पप्पू डीसीएम से लिपिक दीपक सविता और सफाई कर्मचारियों के साथ ग्राम पंचायत पनगवां के जयरामपुर में बनी गोशाला में छोड़ने गया था। तभी गांव के लोगों ने गोशाला में व्यवस्था न होने का हवाला देकर विरोध किया और हाथापाई पर उतारू हो गए। विरोध होते देख कर्मचारी डीसीएम से मवेशी लेकर भाग आए और ईओ व एसडीएम को समस्या से अवगत कराया। नगर पंचायत लिपिक ने मारपीट से इंकार किया।
मवेशियों के लिए चारा नहीं, एसडीएम नाराज
तालग्राम। एसडीएम छिबरामऊ गौरव शुक्ला ने गुरुवार को सुबह जयरामपुर में बनी गोशाला का निरीक्षण किया। व्यवस्था न मिलने पर बीडीओ बीपी कुशवाहा से नाराजगी जताई। जल्द व्यवस्था नहीं हुई तो कार्रवाई को रिपोर्ट भेज देने की चेतावनी दी। बाउंड्रीवाल व चारा पानी की व्यवस्था दुरुस्त करा दें। वहीं कुशलपुर्वा के समीप गौशाला के लिए भूमि का भौगोलिक निरीक्षण भी किया।
अभी और बनेंगी गोशाला
गुगरापुर। ब्लाक के खंड विकास अधिकारी जेएन राव के नेतृत्व में ग्रामीणों के साथ निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया। ग्रामीणों की मदद से पकड़े गए गोवंशों को गोशालाओं में रखा गया। जहां पशुओं के लिए चारा, बांधने के लिए रस्सी, जंजीर, त्रिपाल आदि मुहैया कराया गया है। पशुओं के चारे-पानी व देखरेख के कर्मचारी तैनात किए गए हैं। वहीं, विकास खंड के आधा दर्जन से अधिक गंगा व काली नदी के बीच बसे गांवों के आसपास कहीं भी गोशाला नहीं बनाई गई है। बीडीओ जेएन राव ने बताया कि अभी और गोशालाओं के लिए जगह की तलाश जारी है। प्रयास है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर अस्थायी गोशाला स्थापित की जा सके।
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प्रशासन की गणना के मुताबिक जिले में 3475 अन्ना मवेशी हैं। जिन्हें कन्नौज ब्लाक ब्लाक में दो, जलालाबाद ब्लाक में पांच, गुगरापुर ब्लाक में पांच, तालग्राम ब्लाक में दो, छिबरामऊ ब्लाक में तीन, सौरिख ब्लाक में तीन, हसेरन ब्लाक में तीन और उमर्दा ब्लाक में तीन जगह रखने की व्यवस्था की गई। सभी आठों ब्लाकों में 26 और आठ निकाय क्षेत्रों में आठ स्थानों पर गोशाला का निर्माण कर कुल 34 स्थान मवेेशियों को रखने के लिए चिन्ह्ति किए गए थे।
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दो जनवरी से इन मवेशियों को गोशाला में पहुंचाने के लिए अभियान की शुरुआत की। 10 जनवरी अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। इन सभी स्थानों पर 400 मवेशियों को गोशाला तक पहुंचाया गया था। डीएम रवींद्र कुमार के निर्देशन में गुरुवार को 692 अन्ना मवेशी पकड़े गए।
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कन्नौज ब्लाक में गुरुवार को 31, गुगरापुर और जलालाबाद में 120, तालग्राम में 65, छिबरामऊ में 32, सौरिख में 324, हसेरन में 20, उमर्दा में 60 अन्ना मवेशियों को पकड़ा गया। नगर निकाय में दो दिनों में 68 अन्ना मवेशी पकड़े जा सके। मुख्य विकास अधिकारी एसके सिंह ने का कहना है कि बीडीओ के निर्देशन में अन्ना मवेशियों को पकड़ने के लिए लगातार टीमें काम कर रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही सभी अन्ना मवेशियों को पकड़ लिया जाएगा। पशु पालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने मवेशियों को बांधकर रखें। पालतू मवेशी घूमता मिला पशु पालक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
गोशाला में जबरन मवेशी छोड़ने पर विरोध
तालग्राम। नगर पंचायत तालग्राम में बने बाड़े में क्षमता से ज्यादा मवेशी होने पर कर्मचारी उन्हें ग्राम पंचायत पनगवां के जयरामपुर बनी गोशाला में छोड़ने गए। जहां ग्रामीणों ने गोशाला में व्यवस्थाएं न होने का हवाला देकर रोक दिया। कर्मचारियों ने समझाने का प्रयास किया तो ग्रामीण विरोध पर उतर आए। इसके बाद कर्मचारी मवेशी लेकर लौट आए। तालग्राम बाड़े में 10 से 15 मवेशियों को रखने की व्यवस्था है। जबकि यहां 29 अन्ना अधिक आ गए। इन मवेशियों को नगर पंचायत का चालक पप्पू डीसीएम से लिपिक दीपक सविता और सफाई कर्मचारियों के साथ ग्राम पंचायत पनगवां के जयरामपुर में बनी गोशाला में छोड़ने गया था। तभी गांव के लोगों ने गोशाला में व्यवस्था न होने का हवाला देकर विरोध किया और हाथापाई पर उतारू हो गए। विरोध होते देख कर्मचारी डीसीएम से मवेशी लेकर भाग आए और ईओ व एसडीएम को समस्या से अवगत कराया। नगर पंचायत लिपिक ने मारपीट से इंकार किया।
मवेशियों के लिए चारा नहीं, एसडीएम नाराज
तालग्राम। एसडीएम छिबरामऊ गौरव शुक्ला ने गुरुवार को सुबह जयरामपुर में बनी गोशाला का निरीक्षण किया। व्यवस्था न मिलने पर बीडीओ बीपी कुशवाहा से नाराजगी जताई। जल्द व्यवस्था नहीं हुई तो कार्रवाई को रिपोर्ट भेज देने की चेतावनी दी। बाउंड्रीवाल व चारा पानी की व्यवस्था दुरुस्त करा दें। वहीं कुशलपुर्वा के समीप गौशाला के लिए भूमि का भौगोलिक निरीक्षण भी किया।
अभी और बनेंगी गोशाला
गुगरापुर। ब्लाक के खंड विकास अधिकारी जेएन राव के नेतृत्व में ग्रामीणों के साथ निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया। ग्रामीणों की मदद से पकड़े गए गोवंशों को गोशालाओं में रखा गया। जहां पशुओं के लिए चारा, बांधने के लिए रस्सी, जंजीर, त्रिपाल आदि मुहैया कराया गया है। पशुओं के चारे-पानी व देखरेख के कर्मचारी तैनात किए गए हैं। वहीं, विकास खंड के आधा दर्जन से अधिक गंगा व काली नदी के बीच बसे गांवों के आसपास कहीं भी गोशाला नहीं बनाई गई है। बीडीओ जेएन राव ने बताया कि अभी और गोशालाओं के लिए जगह की तलाश जारी है। प्रयास है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर अस्थायी गोशाला स्थापित की जा सके।