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केंद्र सरकार से अनुमति न मिलने से लटका शतरंज सेमिनार

Sat, 22 Feb 2020 11:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Feb 2020 11:51 PM IST
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kendr sarakaar se anumati na milane se lataka shataranj seminaar
कन्नौज स्थित पुरातत्व संग्रहालय। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। जर्मनी की संस्था चैरिटी ट्रस्ट चेस हिस्ट्रोरिकल रिसर्च की ओर से 27 और 28 फरवरी को शतरंज सेमिनार का आयोजन होना है। इसमें 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक निदेशालय की ओर से केंद्र सरकार से सेमिनार की अनुमति मांगी गई है। अभी तक अनुमति न मिलने से सेमिनार के आयोजन की स्थिति साफ नहीं हो पा रही है।
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शतरंज को लेकर चैरिटी ट्रस्ट चेस हिस्ट्रोरिकल रिसर्च संस्था जर्मनी के संस्थापक करीब 20 साल से 50 देशों में प्रतिनिधियों की मदद से शोध कर रहे थे। 2019 में कन्नौज के राजा हर्षवर्धन के इस खेल की शुरुआत करने के साक्ष्य सामने आए थे। इससे उन्होंने कन्नौज में पुरातत्व विभाग की मदद से दो दिवसीय 27 और 28 फरवरी को शतरंज सेमिनार का आयोजन रखा है। इसमें अमेरिका, कनाडा, स्वीडन, ब्राजील, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जकार्ता, रूस, मलेशिया, सिंगापुर और जापान से प्रतिनिधि भाग लेंगे। शतरंज सेमिनार का मुख्य उद्देश्य कन्नौज की धरती से यहां शतरंज के ईजाद होने का संदेश देना है। सेमिनार को लेकर चैरिटी ट्रस्ट चेस हिस्ट्रोरिकल रिसर्च संस्था जर्मनी के संस्थापक से बातचीत के बाद पुरातत्व संग्रहालय अध्यक्ष अनुमति लेने के लिए अब दिल्ली रवाना हुए हैं। उन्होंने बताया कि अनुमति मिलते ही शहर के आशा होटल में शतरंज सेमिनार की तैयार शुरू कर दी जाएगी।
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जर्मनी की संस्था चैरिटी ट्रस्ट चेस हिस्ट्रोरिकल रिसर्च के संस्थापक एजे इडर करीब 50 देशों के प्रतिनिधियों को संस्था में शामिल कर शतरंज खेल के ईजाद को लेकर शोध कर रहे हैं। संस्था के सदस्य डेनमार्क निवासी डॉ. जैकब 2018 में कन्नौज आए थे। वह पुरातत्व संग्रहालय गए थे। तब उन्हें जानकारी हुई कि सातवीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन ने चतुरंगा खेल की शुरुआत की थी। संग्रहालय में पक्की मिट्टी के गजारोही, अश्वरोही, पैदल योद्धा देखकर शतरंज के प्यादे होने के साक्ष्य मिले। इतिहासकारों का मानना है कि हर्षवर्धन युद्ध के दौरान 24 भागों में सेना को बांटकर युद्ध लड़ते थे। सेना के भागों के जमीन में चित्र बनाकर प्यादों को रखकर चतुरंगा खेलते थे। मौजूदा समय में इसी खेल को शतरंज (चेस) नाम से जाना जाता है।
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-दीपक कुमार, अध्यक्ष, पुरातत्व संग्रहालय
कोरोना वायरस अलर्ट के चलते दिल्ली नहीं पहुंचे इवेंट मैनेजर
कोरोना वायरस के चलते सेमिनार के इवेंट मैनेजर दिल्ली नहीं पहुंच सके हैं। सोमवार तक वह दिल्ली पहुंच कर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से बातचीत करेंगे। पुरातत्व संग्रहालय के अध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि डॉ. जैकब (डेनमार्क )को सेमिनार का इवेंट मैनेजर बनाया गया है। डेनमार्क में कोरोना वायरस को लेकर कुछ दिनों से उड़ान निरस्त चल रही हैं। संभावना है कि सोमवार को डॉ. जैकब दिल्ली पहुंचेंगे।
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