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भारी तादाद में निकले अवैध मतपत्र
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Mon, 02 Nov 2015 12:19 AM IST
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पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान भारी तादात में अवैध
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मतपत्र भी निकले हैं। कुछ मतपत्रों पर मुहर नहीं लगी थी तो कई पर अंगूठे
का निशान लगा था। जानकारी का अभाव और अशिक्षा की वजह से काफी मत गिनती के
दौरान अस्वीकृत किए गए हैं।
रविवार को सुबह जीटी रोड स्थित नवीन मंडी समिति परिसर में जिला पंचायत सदस्य पद के छह वार्ड और गुगरापुर एवं सदर कन्नौज ब्लॉक क्षेत्र के क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों पर मतगणना शुरू हुई। न्याय पंचायतवार लगी मतगणना की टेबलों पर जो मतपत्र गिने जा रहे थे, उनमें निशान की बजाय सील मतपत्रों के पीछे भी लगी मिली।
ऐसे मतपत्रों की संख्या काफी निकली। इनको निरस्त कर दिया गया। निर्वाचन आयोग ने आठ बिंदुओं पर मतपत्र निरस्त करने को कहा था। वह आठ बिंदुओं की रबर स्टांप भी बनी थी, जो निरस्त होने वाले मतपत्रों पर लगाई गई। उधर, सैकड़ों की तादात में वोटरों ने मतपत्रों पर अपने अंगूठे का निशान भी लगाया।
जानकारों का कहना है कि यह हाल ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी की वजह से है। उनको वोट डालने की जानकारी नहीं है। ज्ञात हो कि विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र के चुनाव में ईवीएम से वोट पड़ते हैं, जबकि पंचायत और निकाय चुनाव में मतपत्रों से वोट डाले जाते हैं।
कई लोग मुहर लगाने की वजह से अंगूठा तो कुछ लोग नाम लिखकर वोट देने की बात समझ लेते हैं, पर ऐसे वोट वास्तव में निरस्त कर दिए जाते हैं। यह भी ज्ञात हो कि मतदान निरस्त होने वाले कारणों को लेकर जिला प्रशासन की तरफ से कोई प्रचार प्रसार नहीं कराया गया था।
वहीं प्रत्याशियों ने वोट तो मांगे लेकर वोटरों को जागरूक करने की जरूरत नहीं समझी। कोई सामाजिक संगठन या समाजसेवी भी इस मुद्दे पर आगे नहीं आया, जिस कारण वोटरों को यही नहीं पता चल सका कि किन-किन कारणों से उनका वोट बेकार भी हो सकता है।
उधर, पंचायत चुनाव राजनीति के कई मठाधीशों की जनता में पकड़ का अहसास भी करा रहे हैं। एक ओर जहां चुनाव के नतीजे किसी के सपनों को उड़ान देने को पंख देंगे तो दूसरी तरफ कई लोगों के पर कतरने की रूपरेखा भी तैयार हो जाएगी। ज्ञात हो कि कई राजनैतिक दलों के संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी चुनाव मैदान में उतरे हैं।
कोई बीडीसी तो कोई जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ा है। हर किसी ने अपनी जीत सुनिश्चित करते हुए दावे किए हैं। बीते माह जब पार्टी के नेताओं ने संगठन के स्तर से चर्चा की थी, तो सभी ने खुद को लोकप्रिय करार दिया था। मतपेटी से निकलने वाले चुनाव परिणाम राजनीति के बदलते मिजाज को भी उजागर करने लगे हैं।
अब कौन कितने पानी में है यह वोटों की गिनती तय कर रही है। विशेषज्ञों की मानें तो कई विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोटरों पर मजबूत पकड़ रखने का दावा करने वाले मठाधीशों की वास्तविक स्थिति भी खुलकर सामने आने लगी है। जीत का दंभ भरने वाले कई नेता तो पहले राउंड में ही टाप थ्री से गायब हो गए।
रविवार को सुबह जीटी रोड स्थित नवीन मंडी समिति परिसर में जिला पंचायत सदस्य पद के छह वार्ड और गुगरापुर एवं सदर कन्नौज ब्लॉक क्षेत्र के क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों पर मतगणना शुरू हुई। न्याय पंचायतवार लगी मतगणना की टेबलों पर जो मतपत्र गिने जा रहे थे, उनमें निशान की बजाय सील मतपत्रों के पीछे भी लगी मिली।
ऐसे मतपत्रों की संख्या काफी निकली। इनको निरस्त कर दिया गया। निर्वाचन आयोग ने आठ बिंदुओं पर मतपत्र निरस्त करने को कहा था। वह आठ बिंदुओं की रबर स्टांप भी बनी थी, जो निरस्त होने वाले मतपत्रों पर लगाई गई। उधर, सैकड़ों की तादात में वोटरों ने मतपत्रों पर अपने अंगूठे का निशान भी लगाया।
जानकारों का कहना है कि यह हाल ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी की वजह से है। उनको वोट डालने की जानकारी नहीं है। ज्ञात हो कि विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र के चुनाव में ईवीएम से वोट पड़ते हैं, जबकि पंचायत और निकाय चुनाव में मतपत्रों से वोट डाले जाते हैं।
कई लोग मुहर लगाने की वजह से अंगूठा तो कुछ लोग नाम लिखकर वोट देने की बात समझ लेते हैं, पर ऐसे वोट वास्तव में निरस्त कर दिए जाते हैं। यह भी ज्ञात हो कि मतदान निरस्त होने वाले कारणों को लेकर जिला प्रशासन की तरफ से कोई प्रचार प्रसार नहीं कराया गया था।
वहीं प्रत्याशियों ने वोट तो मांगे लेकर वोटरों को जागरूक करने की जरूरत नहीं समझी। कोई सामाजिक संगठन या समाजसेवी भी इस मुद्दे पर आगे नहीं आया, जिस कारण वोटरों को यही नहीं पता चल सका कि किन-किन कारणों से उनका वोट बेकार भी हो सकता है।
उधर, पंचायत चुनाव राजनीति के कई मठाधीशों की जनता में पकड़ का अहसास भी करा रहे हैं। एक ओर जहां चुनाव के नतीजे किसी के सपनों को उड़ान देने को पंख देंगे तो दूसरी तरफ कई लोगों के पर कतरने की रूपरेखा भी तैयार हो जाएगी। ज्ञात हो कि कई राजनैतिक दलों के संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी चुनाव मैदान में उतरे हैं।
कोई बीडीसी तो कोई जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ा है। हर किसी ने अपनी जीत सुनिश्चित करते हुए दावे किए हैं। बीते माह जब पार्टी के नेताओं ने संगठन के स्तर से चर्चा की थी, तो सभी ने खुद को लोकप्रिय करार दिया था। मतपेटी से निकलने वाले चुनाव परिणाम राजनीति के बदलते मिजाज को भी उजागर करने लगे हैं।
अब कौन कितने पानी में है यह वोटों की गिनती तय कर रही है। विशेषज्ञों की मानें तो कई विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोटरों पर मजबूत पकड़ रखने का दावा करने वाले मठाधीशों की वास्तविक स्थिति भी खुलकर सामने आने लगी है। जीत का दंभ भरने वाले कई नेता तो पहले राउंड में ही टाप थ्री से गायब हो गए।