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Kannauj News: कासिमपुर व बक्शीपुर्वा में घुसा बाढ़ का पानी
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मानीमऊ/कन्नौज। गंगा खतरे के निशान के पास बुधवार को पहुंच गई हैं। साथ ही काली नदी भी उफान पर हैं, इससे कटरी के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। उधर, कासिमपुर गांव का मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है। बक्शीपुर्वा गांव में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। चौरा चांदपुर गांव की सड़क पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हो गया है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। महादेवी घाट पर आज गंगा का जलस्तर 125.760 मीटर दर्ज किया गया। नदी खतरे के निशान से महज 0.40 मीटर नीचे बह रही है। चौधरी चरण सिंह बैराज से सुबह छोड़े गए 1,11,969 क्यूसेक पानी को देखते हुए आने वाले एक दो दिन में जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने की संभावना है। जलस्तर बढ़ने से गंगा और काली नदी का बहाव एक हो गया है। इसका असर आसपास के तटीय गांवों में दिखाई देने लगा है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए चौराचांदपुर की गोशाला को गांव से बाहर बंदगी पीर दरगाह के पास एक खेत में स्थानांतरित कर दिया गया है। वहीं चौराचांदपुर और गुमटिया गांव के बीच मार्ग पर बनी पुलिया भी पूरी तरह डूब गई है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है और नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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डूबे मार्गों पर सुरक्षा जरूरी, अंत्येष्टि स्थल में भरा पानी
डूबी पुलिया के पास कुछ बच्चे पानी में नहाते हुए भी नजर आए। मौके पर किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए सहायता कर्मियों की मौजूदगी नहीं होने से हादसे का खतरा बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन को संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग, पुलिस एवं आपदा राहत टीम की तैनाती और नियमित निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है लेकिन गुमटिया गांव के अंत्येष्टि स्थल के अंदर तक पानी पहुंच चुका है।
जनहानि रोकने के लिए ग्रामीणों से अपील
बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील है कि वे जलमग्न मार्गों, पुलियों और नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। विशेष रूप से बच्चों को पानी में न जाने दें और डूबे हुए रास्तों को पार करने का जोखिम न उठाएं। ग्रामीणों ने संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बचाव दल, नाव, राहत सामग्री और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखने की मांग की है।
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वर्जन
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। तटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों से महादेवी घाट पर बने आश्रय स्थल में जाने के लिए कहा गया है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
-वैभव गुप्ता, उपजिलाधिकारी
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गंगा के बढ़ते जलस्तर ने तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। महादेवी घाट पर आज गंगा का जलस्तर 125.760 मीटर दर्ज किया गया। नदी खतरे के निशान से महज 0.40 मीटर नीचे बह रही है। चौधरी चरण सिंह बैराज से सुबह छोड़े गए 1,11,969 क्यूसेक पानी को देखते हुए आने वाले एक दो दिन में जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने की संभावना है। जलस्तर बढ़ने से गंगा और काली नदी का बहाव एक हो गया है। इसका असर आसपास के तटीय गांवों में दिखाई देने लगा है।
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बाढ़ की स्थिति को देखते हुए चौराचांदपुर की गोशाला को गांव से बाहर बंदगी पीर दरगाह के पास एक खेत में स्थानांतरित कर दिया गया है। वहीं चौराचांदपुर और गुमटिया गांव के बीच मार्ग पर बनी पुलिया भी पूरी तरह डूब गई है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है और नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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डूबे मार्गों पर सुरक्षा जरूरी, अंत्येष्टि स्थल में भरा पानी
डूबी पुलिया के पास कुछ बच्चे पानी में नहाते हुए भी नजर आए। मौके पर किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए सहायता कर्मियों की मौजूदगी नहीं होने से हादसे का खतरा बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन को संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग, पुलिस एवं आपदा राहत टीम की तैनाती और नियमित निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है लेकिन गुमटिया गांव के अंत्येष्टि स्थल के अंदर तक पानी पहुंच चुका है।
जनहानि रोकने के लिए ग्रामीणों से अपील
बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील है कि वे जलमग्न मार्गों, पुलियों और नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। विशेष रूप से बच्चों को पानी में न जाने दें और डूबे हुए रास्तों को पार करने का जोखिम न उठाएं। ग्रामीणों ने संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बचाव दल, नाव, राहत सामग्री और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखने की मांग की है।
वर्जन
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। तटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों से महादेवी घाट पर बने आश्रय स्थल में जाने के लिए कहा गया है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
-वैभव गुप्ता, उपजिलाधिकारी