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Kannauj News: फूल कारोबारी ने सुसाइड नोट लिखकर गंगा में लगाई छलांग
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छिबरामऊ। फूल कारोबारी ने बुधवार रात सुसाइड नोट लिखकर मेंहदीघाट पुल से गंगा में छलांग लगा दी। परिजनों को पुल पर फूल कारोबारी के कपड़े व सुसाइड नोट रखा मिला। गोताखोर तलाश में जुटे हैं।
छिबरामऊ के मोहल्ला सराफान निवासी प्रभाकर पांडेय (56) बुधवार को कन्नौज में बुआ की बेटी रोजी को देखने गए थे। रोजी का कुछ दिन पहले एक्सीडेंट हुआ था। बुआ के घर कुछ देर रुकने के बाद वहां से निकल गए। जब रोजी ने फोन किया तो प्रभाकर ने कुछ देर में आने की बात कही लेकिन काफी देर तक नहीं आए। शाम को रोजी ने जब फिर फोन किया तो उन्होंने बहुत दूर जाने की बात कही और बताया कि उनके कपड़े मेहंदीघाट के पुल पर रखे हैं। इसके बाद उनका पता नहीं लगा। रात में जब परिजन मेहंदीघाट पुल पर पहुंचे तो प्रभाकर के कपड़े व सुसाइड नोट रखा मिला। परिजनों ने गोताखोरों की मदद से गंगा में प्रभाकर की तलाश शुरू कराई। परिजनों ने बताया कि प्रभाकर फूल का कारोबार करते हैं। वह अविवाहित हैं और अपने चार भाइयों व तीन बहनों में सबसे बड़े हैं।
पांच दिन पहले जहरखुरानी का हुए थे शिकार
प्रभाकर पांडेय 14 अक्तूबर को कन्नौज में अपने वकील से मिलने गए थे। लौटते समय रोडवेज बस में वह जहरखुरानी का शिकार हो गए। बस के परिचालक ने बेवर में उनको देखा। इसके बाद परिजन प्रभाकर को सौ शैया अस्पताल ले आए। बाद में 15 अक्तूबर को कानपुर के निजी अस्पताल ले गए। अगले दिन होश में आने के बाद घर ले आए थे। 16 अक्तूबर को घर आने के बाद से वह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं थे।
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स्वेच्छा से गंगा मां को समर्पित कर रहा हूं जिंदगी
बुधवार की देर रात जब फूल कारोबारी प्रभाकर पांडेय के परिजन मेहंदीघाट के पुल पर पहुंचे तो उनको कपड़ों के साथ सुसाइड नोट रखा मिला। इसमें लिखा था कि मैं स्वेच्छा से गंगा मां को अपनी जिंदगी समर्पित कर रहा हूं। मेरी मौत का कोई दोषी नहीं है। सभी को मेरी तरफ से राम-राम।
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छिबरामऊ के मोहल्ला सराफान निवासी प्रभाकर पांडेय (56) बुधवार को कन्नौज में बुआ की बेटी रोजी को देखने गए थे। रोजी का कुछ दिन पहले एक्सीडेंट हुआ था। बुआ के घर कुछ देर रुकने के बाद वहां से निकल गए। जब रोजी ने फोन किया तो प्रभाकर ने कुछ देर में आने की बात कही लेकिन काफी देर तक नहीं आए। शाम को रोजी ने जब फिर फोन किया तो उन्होंने बहुत दूर जाने की बात कही और बताया कि उनके कपड़े मेहंदीघाट के पुल पर रखे हैं। इसके बाद उनका पता नहीं लगा। रात में जब परिजन मेहंदीघाट पुल पर पहुंचे तो प्रभाकर के कपड़े व सुसाइड नोट रखा मिला। परिजनों ने गोताखोरों की मदद से गंगा में प्रभाकर की तलाश शुरू कराई। परिजनों ने बताया कि प्रभाकर फूल का कारोबार करते हैं। वह अविवाहित हैं और अपने चार भाइयों व तीन बहनों में सबसे बड़े हैं।
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पांच दिन पहले जहरखुरानी का हुए थे शिकार
प्रभाकर पांडेय 14 अक्तूबर को कन्नौज में अपने वकील से मिलने गए थे। लौटते समय रोडवेज बस में वह जहरखुरानी का शिकार हो गए। बस के परिचालक ने बेवर में उनको देखा। इसके बाद परिजन प्रभाकर को सौ शैया अस्पताल ले आए। बाद में 15 अक्तूबर को कानपुर के निजी अस्पताल ले गए। अगले दिन होश में आने के बाद घर ले आए थे। 16 अक्तूबर को घर आने के बाद से वह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं थे।
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स्वेच्छा से गंगा मां को समर्पित कर रहा हूं जिंदगी
बुधवार की देर रात जब फूल कारोबारी प्रभाकर पांडेय के परिजन मेहंदीघाट के पुल पर पहुंचे तो उनको कपड़ों के साथ सुसाइड नोट रखा मिला। इसमें लिखा था कि मैं स्वेच्छा से गंगा मां को अपनी जिंदगी समर्पित कर रहा हूं। मेरी मौत का कोई दोषी नहीं है। सभी को मेरी तरफ से राम-राम।