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Kannauj News: दो बेटों की मौत से गम में डूबा परिवार

Wed, 13 Sep 2023 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज Updated Wed, 13 Sep 2023 12:23 AM IST
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Family immersed in grief due to death of two sons
तिर्वा। दो दिन पहले घर गिरने से उसके मलबे में दबकर हुई दो सगे भाइयों की मौत से परिवार सदमे में है। परिवार से मिलकर सांत्वना देने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को सपा का प्रतिनिधि मंडल गांव पहुंचा। इसमें औरैया के बिधूना से विधायक रेखा वर्मा और पूर्व ब्लॉक प्रमुख मौजूद रहे। विधायक ने 21 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग करते हुए आवास की सुविधा न मिलने पर प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।
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तिर्वा कोतवाली क्षेत्र के ललकियापुर गांव निवासी रामसनही राजपूत का रविवार को घर गिर गया था। हादसे में उसके दो बेटे अविनाश व आलोक की मौत हो गई थी। इससे रामसनेही और उसका परिवार गम में डूबा है। मंगलवार को सपा विधायक ने आवास न मिलने पर लापरवाही को लेकर ग्रामसचिव व प्रधान के खिलाफ शासन से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंनेबताया कि सरकार की योजनाएं केवल कागजों पर चल रही हैं। धरातल पर पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ न दे पाने पर सरकार नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार का पैतृक घर न होने के बाद भी आवास नहीं मिला तो आखिरकार दोषी कौन है। कहा कि मामले की जांच की जाए और दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। इस मौके पर अनिल पाल, हसीब हसन, ग़ुलामुद्दीन, शरद यादव आदि मौजूद रहे।
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घटना के बाद भी नहीं हटा मलबा
पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष नवाब सिंह ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी। कहा कि शासन ने पीड़ित परिजनों को दैवीय आपदा के तहत आठ लाख रुपये तो दे दिए पर जिनकी मौत हो गई है, घर का चिराग बुझ गया क्या उनको वापस किया जा सकता है। अगर समय से आवास मिल जाता तो आज घर के चिराग जिंदा होते। बताया कि ऐसे बहुत से गरीब हैं जो आज भी पन्नी व कच्चे आशियाने में जीवन गुजार रहे हैं। उन्होंने शासन से आवास प्रक्रिया को सरल बनाते हुए पात्र लोगों को आवास दिलाने की मांग की है। इस मौके पर शनि यादव, गोल्डी यादव, राकेश, समेत अन्य लोग मौजूद रहे। प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि घटना के तीन दिन बाद भी मलबा नहीं हट पाया है। मलबे में दो से तीन बकरियां दबे होने की आंशका है। कहा कि पहले आवास देने में नाकाम रहे प्रशासन ने बाद में दैवीय आपदा के तहत मदद की औपचारिकता कर पल्ला झाड़ लिया है। अब कोई भी मदद के लिए नहीं पहुंच रहा है। यह सरकार और प्रशासन की संवेदनहीनता की नजीर है।
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