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एक्सप्रेसवे: 11 महीने में हुए 241 हादसे, 85 की गई जान
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। सूबे की राजधानी लखनऊ को आगरा से जोड़ने वाला एक्सप्रेसवे हादसों का रास्ता बन गया है। जनवरी से अब तक 11 महीनों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इस दौरान अकेले कन्नौज जिले में एक्सप्रेसवे के 64 किमी हिस्से में 241 हादसे हुए। इनमें 85 की जान चली गई। कई मौत के मुंह तक पहुंच गए। यूपीडा की जांच के मुताबिक 52 फीसदी हादसे तेज रफ्तार और 14 फीसदी नशेबाजी के कारण हुए। एक्सप्रेसवे के घुमाव पर तेज गति से वाहन को घुमाने और टायरों में हवा का दबाव कम होना भी हादसों का कारण बना है।
302 किलोमीटर लंबा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जिले में 64 किलोमीटर के दायरे से निकला है। एक्सप्रेसवे पर पड़ने वाले जिलों में सबसे ज्यादा लंबाई कन्नौज में ही है। इससे हादसे भी सबसे ज्यादा जिले में होते हैं। यूपी एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के आंकड़ों के अनुसार एक्सप्रेसवे पर हर दिन चार से छह हादसे हो रहे हैं। हर तीन दिन में एक से तीन लोगों की मौत हो रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार बेपरवाह हैं। जिले में ट्रैफिक पुलिस के आंकड़े भी झकझोर देने वाले हैं। जनवरी 2019 से अब तक करीब 241 हादसों में 85 लोगों की मौत हो चुकी है। चार सौ से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।
यातायात निरीक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि 52 फीसदी हादसे तेज रफ्तार से हुए हैं। 14 फीसदी नशेबाजी और मोबाइल पर बात करने के दौरान हुए। आठ फीसदी हादसे अन्ना जानवरों के टकराने से हुए हैं। सब इंस्पेक्टर मोटर ट्रांसपोर्ट सत्य नारायण ने बताया कि हादसे के बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहनों का तकनीकी मुआयना किया गया। अधिकांश हादसे तेज रफ्तार में टायर फटने से हुए हैं।
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100 से अधिक गति में वाहन मोड़ने पर होते हैं हादसे
यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी मनोहर सिंह ने बताया कि हादसों का बड़ा कारण वाहनों की तेज रफ्तार है। हल्के वाहनों के लिए गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किमी प्रति घंटा तय है। अक्सर तेज गति में चालक घुमावदार स्थान पर वाहनों को मोड़ने के साथ ओवरटेक करते हैं। इससे टायरों का वजन एक तरफ हो जाता है। टायर फटने से वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाता। तेज रफ्तार, वाहनों के सामने पशुओं के आने, टायर पंचर होने, नींद आने से हादसे हो रहे हैं। वहीं सहायक मैनेजर टोला प्लाजा अमित सिंह चंदेल ने बताया कि हादसों की रोकथाम के लिए सभी टोल प्लाजा पर चालकों को जागरूक करने के साथ ही रफ्तार की निगरानी की जा रही है।
दिसंबर से फरवरी तक बढ़ जाता आंकड़ा
एक्सप्रेसवे पर कोहरे में चलना खतरे से खाली नहीं होता। कोहरे की धुंध में एक साथ कई वाहन आपस में भिड़ जाते हैं। पिछले साल उन्नाव और ठठिया में भीषण हादसा हुआ था। इससे इस साल भी कोहरे में हादसों की आशंका बढ़ गई है। एएसपी विनोद कुमार ने बताया कि कोहरे में प्रत्येक दस किलोमीटर पर पुलिस टीम को तैनात किया जाएगा। अधिक कोहरा पड़ने पर वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रोकने की भी तैयारी की जाएगी।
हादसे रोकने के लिए किए गए इंतजाम
-यूपीडा ने 10 गश्ती वाहन, छह एंबुलेंस, तीन क्रेन की व्यवस्था की है।
-यूपी डायल 112 की पांच पीआरवी एक्सप्रेसवे पर रहती हैं।
-10 स्पीड डिटेक्शन कैमरे लगाकर वाहनों की रफ्तार की निगरानी शुरू की गई है।
-एक्सप्रेसवे पर तीन स्थलों पर पुलिस चौकी का निर्माण हो रहा है।
-10 बेड के ट्रॉमा सेंटर के निर्माण का प्रयास चल रहा है।
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302 किलोमीटर लंबा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जिले में 64 किलोमीटर के दायरे से निकला है। एक्सप्रेसवे पर पड़ने वाले जिलों में सबसे ज्यादा लंबाई कन्नौज में ही है। इससे हादसे भी सबसे ज्यादा जिले में होते हैं। यूपी एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के आंकड़ों के अनुसार एक्सप्रेसवे पर हर दिन चार से छह हादसे हो रहे हैं। हर तीन दिन में एक से तीन लोगों की मौत हो रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार बेपरवाह हैं। जिले में ट्रैफिक पुलिस के आंकड़े भी झकझोर देने वाले हैं। जनवरी 2019 से अब तक करीब 241 हादसों में 85 लोगों की मौत हो चुकी है। चार सौ से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।
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यातायात निरीक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि 52 फीसदी हादसे तेज रफ्तार से हुए हैं। 14 फीसदी नशेबाजी और मोबाइल पर बात करने के दौरान हुए। आठ फीसदी हादसे अन्ना जानवरों के टकराने से हुए हैं। सब इंस्पेक्टर मोटर ट्रांसपोर्ट सत्य नारायण ने बताया कि हादसे के बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहनों का तकनीकी मुआयना किया गया। अधिकांश हादसे तेज रफ्तार में टायर फटने से हुए हैं।
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100 से अधिक गति में वाहन मोड़ने पर होते हैं हादसे
यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी मनोहर सिंह ने बताया कि हादसों का बड़ा कारण वाहनों की तेज रफ्तार है। हल्के वाहनों के लिए गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किमी प्रति घंटा तय है। अक्सर तेज गति में चालक घुमावदार स्थान पर वाहनों को मोड़ने के साथ ओवरटेक करते हैं। इससे टायरों का वजन एक तरफ हो जाता है। टायर फटने से वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाता। तेज रफ्तार, वाहनों के सामने पशुओं के आने, टायर पंचर होने, नींद आने से हादसे हो रहे हैं। वहीं सहायक मैनेजर टोला प्लाजा अमित सिंह चंदेल ने बताया कि हादसों की रोकथाम के लिए सभी टोल प्लाजा पर चालकों को जागरूक करने के साथ ही रफ्तार की निगरानी की जा रही है।
दिसंबर से फरवरी तक बढ़ जाता आंकड़ा
एक्सप्रेसवे पर कोहरे में चलना खतरे से खाली नहीं होता। कोहरे की धुंध में एक साथ कई वाहन आपस में भिड़ जाते हैं। पिछले साल उन्नाव और ठठिया में भीषण हादसा हुआ था। इससे इस साल भी कोहरे में हादसों की आशंका बढ़ गई है। एएसपी विनोद कुमार ने बताया कि कोहरे में प्रत्येक दस किलोमीटर पर पुलिस टीम को तैनात किया जाएगा। अधिक कोहरा पड़ने पर वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रोकने की भी तैयारी की जाएगी।
हादसे रोकने के लिए किए गए इंतजाम
-यूपीडा ने 10 गश्ती वाहन, छह एंबुलेंस, तीन क्रेन की व्यवस्था की है।
-यूपी डायल 112 की पांच पीआरवी एक्सप्रेसवे पर रहती हैं।
-10 स्पीड डिटेक्शन कैमरे लगाकर वाहनों की रफ्तार की निगरानी शुरू की गई है।
-एक्सप्रेसवे पर तीन स्थलों पर पुलिस चौकी का निर्माण हो रहा है।
-10 बेड के ट्रॉमा सेंटर के निर्माण का प्रयास चल रहा है।