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Kannauj News: कस्बे में ऑटो के प्रवेश पर रोक से भड़के चालक
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गुरसहायगंज। कस्बे में ऑटो के प्रवेश पर लगाई गई रोक से चालक बुधवार को भड़क गए और नारेबाजी करने लगे। आक्रोशित चालकों ने एक भी ऑटो को सवारियां लेकर कस्बे में नहीं जाने दिया। इस कारण आवागमन प्रभावित रहा और यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। चालकों का कहना है कि जब पालिका पार्किंग शुल्क ले रही है, तो वाहन खड़ा करने के लिए उचित स्थान भी उपलब्ध कराए।
प्रदर्शन कर रहे ऑटो चालकों ने बताया कि गुरसहायगंज से कन्नौज रोड पर 200 ऑटो नियमित रूप से चलते हैं। शाहिद इदरीसी, आमिर खान, आजम खान, मोहित यादव, जितेंद्र, गोपाल सिंह चौहान, वसारत खान आदि चालकों ने बताया कि कई दिनों से ट्रैफिक उपनिरीक्षक अरशद अली ने शहर के भीतर जाम की समस्या को देखते हुए ऑटो के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इससे चालकों को पूर्वी रेलवे फाटक से वापस लौटना पड़ रहा है।
चालकों का आरोप है कि इस निर्णय से उनकी आय में समस्या हो रही है। वहीं ई-रिक्शा को शहर के अंदर आने-जाने की खुली छूट दी गई है। ई-रिक्शा से जाम की समस्या भी है। कस्बे में कहीं भी निर्धारित पार्किंग स्थल नहीं है। सड़क पर वाहन खड़ा करने पर चालान कर दिया जाता है जबकि सड़क के नीचे या दुकान के सामने खड़ा करने पर दुकानदारों की नाराजगी और गालीगलौज का सामना करना पड़ता है। सवारियां बैठाकर लाने के बाद अंदर न ले जाने पर किराया नहीं मिलता। इससे विवाद की स्थिति होती है। चालकों का कहना था कि उन्हें शहर में प्रवेश की अनुमति दी जाए या फिर वैकल्पिक पार्किंग और स्पष्ट नियम बनाए जाएं, ताकि उनकी रोजी-रोटी प्रभावित न हो।
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प्रदर्शन कर रहे ऑटो चालकों ने बताया कि गुरसहायगंज से कन्नौज रोड पर 200 ऑटो नियमित रूप से चलते हैं। शाहिद इदरीसी, आमिर खान, आजम खान, मोहित यादव, जितेंद्र, गोपाल सिंह चौहान, वसारत खान आदि चालकों ने बताया कि कई दिनों से ट्रैफिक उपनिरीक्षक अरशद अली ने शहर के भीतर जाम की समस्या को देखते हुए ऑटो के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इससे चालकों को पूर्वी रेलवे फाटक से वापस लौटना पड़ रहा है।
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चालकों का आरोप है कि इस निर्णय से उनकी आय में समस्या हो रही है। वहीं ई-रिक्शा को शहर के अंदर आने-जाने की खुली छूट दी गई है। ई-रिक्शा से जाम की समस्या भी है। कस्बे में कहीं भी निर्धारित पार्किंग स्थल नहीं है। सड़क पर वाहन खड़ा करने पर चालान कर दिया जाता है जबकि सड़क के नीचे या दुकान के सामने खड़ा करने पर दुकानदारों की नाराजगी और गालीगलौज का सामना करना पड़ता है। सवारियां बैठाकर लाने के बाद अंदर न ले जाने पर किराया नहीं मिलता। इससे विवाद की स्थिति होती है। चालकों का कहना था कि उन्हें शहर में प्रवेश की अनुमति दी जाए या फिर वैकल्पिक पार्किंग और स्पष्ट नियम बनाए जाएं, ताकि उनकी रोजी-रोटी प्रभावित न हो।
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