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महंगा आलू बेचने का सपना कहीं न पड़ जाए भारी
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Do not let the dream of selling expensive potatoes be heavy
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। पिछली बार की तरह आलू महंगा होने का लालच कहीं किसानों को भारी न पड़ जाए। आलू का दाम चढ़ने की राह देख रहे किसान कोल्ड स्टोरेज में रखा आलू निकालने अभी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जिले के 142 कोल्ड स्टोरेज में करीब 12 लाख मीट्रिक टन आलू रखा है। जुलाई तक करीब 40 फीसदी आलू की निकासी हो जारी चाहिए थी, लेकिन अभी तक महज 15 फीसदी ही आलू की निकासी हुई है। यदि समय से आलू की निकासी नहीं हुई तो आलू फेंकने की नौबत आ जाएगी। मुनाफा तो दूर किसानों को लागत भी निकालनी मुश्किल हो जाएगी।
जिले में इस बार आलू की अच्छी पैदावार होने के कारण 142 कोल्ड स्टोरेज पूरी तरह भरे हुए हैं। 12 लाख मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है। किसान आलू निकालने के लिए अच्छे भाव का इंतजार कर रहा है। फरवरी में आलू जमा किया गया था। अब जुलाई आ गई। होली से सहालग तक का मौका निकल गया लेकिन आलू के भाव में खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई। किसान भाव अधिक होने की उम्मीद में कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडारण रोके हैं।
जहां अब तक 40 फीसदी निकासी हो जानी चाहिए थी, वहीं महज 15 फीसदी ही आलू की निकासी हुई है। यदि इसी किसानों ने समय से आलू नहीं बेचा तो हालत और खराब हो जाएंगे। बताया जाता है बाढ़ का कहर होने से बिहार, महाराष्ट्र समेत अन्य प्रांतों में आलू नहीं पहुंच रहा है।
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जो आलू बाहर जाता था, वह भी नहीं जा रहा है। इसके चलते आलू का भाव खास नहीं बढ़ा है। शुरुआती सीजन में आलू का भाव पांच सौ रुपये पैकेट (50-60 किलो) पहुंच गया था। किसानों ने यह सोच कर आलू नहीं बेचा कि आने वाले समय में भाव और अधिक होंगे, लेकिन महंगा होने के बजाय दाम गिर गए। इससे किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। बताते हैं कि आलू की जो निकासी हो रही है, वह व्यापारी खुद के रखे आलू की कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि भाव और नीचे आए तो ज्यादा नुकसान होगा।
कोल्ड स्टोरेज में आलू के भाव
आलू की किस्म भाव प्रति पैकेट
चिप्सोना 300 से 310 रुपये
हॉलैंड 400 से 425 रुपये
लाल गुलाल 300 से 310 रुपये
सिंदूरी 300 से 350 रुपये
एस-1 200 से 210 रुपये
आलू पर ही निर्भर हैं किसान
जिले के किसानों की मुख्य फसल आलू है। यदि आलू महंगा बिका तो किसान खुश, यदि भाव गिरे तो किसान कर्जदार हो जाते हैं। इसकी मुख्य वजह जिले के अधिकतर किसान अपने खेत में आलू बोते हैं। महंगा होने पर किसानों को पूरे वर्ष किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है।
एक एकड़ में यह आती लागत
डीएपी 6000 रुपये
यूरिया 3100 रुपये
जुताई 7500 रुपये
आलू बुवाई 1000 रुपये
सिंचाई 9000 रुपये
दवा 3000 रुपये
खोदाई 7000 रुपये
खाली पैके ट 5000 रुपये
योग 41600 रुपये
आलू पैदा 200 पैकेट
जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि किसान अभी नहीं चेते तो उनको बाद में दिक्कत हो सकती है। भाव भले गिरे हैं पर अभी बेचने में उनकी लागत निकल आएगी। इसी तरह कोल्ड स्टोरेज में आलू भरा रहा तो फेंकने की नौबत आ सकती है। जिले के सभी कोल्ड स्टोरेज पूरे भरे हैं। निकासी की गति बहुत धीमी है। चालीस फीसदी अब तक निकासी हो जानी चाहिए थी, लेकिन केवल 15 फीसदी हुई है।
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जिले में इस बार आलू की अच्छी पैदावार होने के कारण 142 कोल्ड स्टोरेज पूरी तरह भरे हुए हैं। 12 लाख मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है। किसान आलू निकालने के लिए अच्छे भाव का इंतजार कर रहा है। फरवरी में आलू जमा किया गया था। अब जुलाई आ गई। होली से सहालग तक का मौका निकल गया लेकिन आलू के भाव में खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई। किसान भाव अधिक होने की उम्मीद में कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडारण रोके हैं।
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जहां अब तक 40 फीसदी निकासी हो जानी चाहिए थी, वहीं महज 15 फीसदी ही आलू की निकासी हुई है। यदि इसी किसानों ने समय से आलू नहीं बेचा तो हालत और खराब हो जाएंगे। बताया जाता है बाढ़ का कहर होने से बिहार, महाराष्ट्र समेत अन्य प्रांतों में आलू नहीं पहुंच रहा है।
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जो आलू बाहर जाता था, वह भी नहीं जा रहा है। इसके चलते आलू का भाव खास नहीं बढ़ा है। शुरुआती सीजन में आलू का भाव पांच सौ रुपये पैकेट (50-60 किलो) पहुंच गया था। किसानों ने यह सोच कर आलू नहीं बेचा कि आने वाले समय में भाव और अधिक होंगे, लेकिन महंगा होने के बजाय दाम गिर गए। इससे किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। बताते हैं कि आलू की जो निकासी हो रही है, वह व्यापारी खुद के रखे आलू की कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि भाव और नीचे आए तो ज्यादा नुकसान होगा।
कोल्ड स्टोरेज में आलू के भाव
आलू की किस्म भाव प्रति पैकेट
चिप्सोना 300 से 310 रुपये
हॉलैंड 400 से 425 रुपये
लाल गुलाल 300 से 310 रुपये
सिंदूरी 300 से 350 रुपये
एस-1 200 से 210 रुपये
आलू पर ही निर्भर हैं किसान
जिले के किसानों की मुख्य फसल आलू है। यदि आलू महंगा बिका तो किसान खुश, यदि भाव गिरे तो किसान कर्जदार हो जाते हैं। इसकी मुख्य वजह जिले के अधिकतर किसान अपने खेत में आलू बोते हैं। महंगा होने पर किसानों को पूरे वर्ष किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है।
एक एकड़ में यह आती लागत
डीएपी 6000 रुपये
यूरिया 3100 रुपये
जुताई 7500 रुपये
आलू बुवाई 1000 रुपये
सिंचाई 9000 रुपये
दवा 3000 रुपये
खोदाई 7000 रुपये
खाली पैके ट 5000 रुपये
योग 41600 रुपये
आलू पैदा 200 पैकेट
जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि किसान अभी नहीं चेते तो उनको बाद में दिक्कत हो सकती है। भाव भले गिरे हैं पर अभी बेचने में उनकी लागत निकल आएगी। इसी तरह कोल्ड स्टोरेज में आलू भरा रहा तो फेंकने की नौबत आ सकती है। जिले के सभी कोल्ड स्टोरेज पूरे भरे हैं। निकासी की गति बहुत धीमी है। चालीस फीसदी अब तक निकासी हो जानी चाहिए थी, लेकिन केवल 15 फीसदी हुई है।