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फोटो 16- सौरभ की फाइल फोटो।
Updated Thu, 23 Aug 2018 11:05 PM IST
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तिर्वा कोतवाली क्षेत्र के गांव बिसंधुआ में बस्ता न मिलने से छठवीं कक्षा के छात्र सौरभ (13) की खुदकुशी के पीछे परिवार की आर्थिक दशा ठीक न होने की ही बात सामने आ रही है। मृतक के बड़े भाई ने बताया कि कई दिनों से उसका भाई स्कूली बस्ता लाने की जिद कर रहा था। पैसा न होने के कारण वह मांग पूरी नहीं कर पा रहा था। इसी वजह से वह नाराज था।
सौैरभ के पिता नेत्रपाल की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। इसके बाद मां सोमवती पर नौ बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी आ गई। इनके पास दो बीघा खेत है, जिससे गुजर बसर मुश्किल से हो पा रहा था। ऐेसे में बड़ा बेटा अंकित पाल मेहनत मजदूरी कर छोटे भाई बहनों को पढ़ाता और घर खर्च में मां का हाथ बंटाता है।
बताते हैं कि किसी तरह भाई-बहनों के लिए अंकित ने जुलाई में फीस और किताबों की व्यवस्था की थी, लेकिन सौरभ को स्कूली बस्ता नहीं दिला सका था। इतनी सी बात पर सौरभ ने जान दे दी।
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चाचा सनोज पाल की सूचना पर पहुंचे तिर्वा कोतवाल आमोद कुमार और फारेसिंक टीम ने जांच की। तिर्वा कोतवाल आमोद कुमार ने बताया कि परिवार की माली हालत बेहद कमजोर है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। मामले की जांच की जा रही है।
। परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण सौरभ ने गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच तक की पढ़ाई पूरी की थी। परिजनों के पास पैसा न होने के कारण दो साल से उसने स्कूल जाना बंद कर दिया था, लेकिन इस बार जुलाई में उसने बड़े भाई अंकित से आगे की पढ़ाई करने की जिद की थी।
इससे अंकित ने निजी विद्यालय में कक्षा छह में दाखिला कराकर उसकी पढ़ाई शुरू कराई थी, लेकिन स्कूल बैग न मिलने के कारण उसने आत्महत्या कर ली। अंकित ने बताया कि घर में सबसे बड़ी उसकी 18 वर्षीय अनुराधा देवी, अंकित, अवनीश, विपिन, रीचा देवी, राज किशोर, राजकुमार, शिवम है। चौथे नंबर के भाई सौरभ की मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
कई रोज से बड़े भाई से कर रहा था बस्ता दिलाने की जिद्द
बस्ता न मिलने से छठवीं कक्षा के छात्र के नीम के पेड़ से फांसी लगाकर जान देने का मामला
तिर्वा कोतवाली के बिसंधुआ गांव में हुई घटना
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सौैरभ के पिता नेत्रपाल की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। इसके बाद मां सोमवती पर नौ बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी आ गई। इनके पास दो बीघा खेत है, जिससे गुजर बसर मुश्किल से हो पा रहा था। ऐेसे में बड़ा बेटा अंकित पाल मेहनत मजदूरी कर छोटे भाई बहनों को पढ़ाता और घर खर्च में मां का हाथ बंटाता है।
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बताते हैं कि किसी तरह भाई-बहनों के लिए अंकित ने जुलाई में फीस और किताबों की व्यवस्था की थी, लेकिन सौरभ को स्कूली बस्ता नहीं दिला सका था। इतनी सी बात पर सौरभ ने जान दे दी।
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चाचा सनोज पाल की सूचना पर पहुंचे तिर्वा कोतवाल आमोद कुमार और फारेसिंक टीम ने जांच की। तिर्वा कोतवाल आमोद कुमार ने बताया कि परिवार की माली हालत बेहद कमजोर है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। मामले की जांच की जा रही है।
। परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण सौरभ ने गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच तक की पढ़ाई पूरी की थी। परिजनों के पास पैसा न होने के कारण दो साल से उसने स्कूल जाना बंद कर दिया था, लेकिन इस बार जुलाई में उसने बड़े भाई अंकित से आगे की पढ़ाई करने की जिद की थी।
इससे अंकित ने निजी विद्यालय में कक्षा छह में दाखिला कराकर उसकी पढ़ाई शुरू कराई थी, लेकिन स्कूल बैग न मिलने के कारण उसने आत्महत्या कर ली। अंकित ने बताया कि घर में सबसे बड़ी उसकी 18 वर्षीय अनुराधा देवी, अंकित, अवनीश, विपिन, रीचा देवी, राज किशोर, राजकुमार, शिवम है। चौथे नंबर के भाई सौरभ की मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
कई रोज से बड़े भाई से कर रहा था बस्ता दिलाने की जिद्द
बस्ता न मिलने से छठवीं कक्षा के छात्र के नीम के पेड़ से फांसी लगाकर जान देने का मामला
तिर्वा कोतवाली के बिसंधुआ गांव में हुई घटना