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पुरानी रंजिश में हुई थी अशर्फीलाल की हत्या
Updated Wed, 12 Dec 2018 11:41 PM IST
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कन्नौज। ठठिया थाना क्षेत्र के गांव गंगापुरवा निवासी 70 वर्षीय अशर्फीलाल की हत्या पुरानी रंजिश में की गई थी। पुलिस का दावा है कि बाबा और चाचा की हत्या का बदला लेने के लिए गोविंद पुत्र बलराम ने वृद्ध को गोली मारी थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से तमंचा और दो कारतूस बरामद किए हैं।
एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि अशर्फीलाल की 26 नवंबर की रात बरामदे में सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के बेटे ने गांव के दुर्वेश, सुनील और पप्पू के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के दौरान तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिला लेकिन उनके परिवार के ही गोविंद ने वारदात को अंजाम दिया।
एसपी ने बताया कि गोविंद और अशर्फीलाल के परिवार में कई दशक से वर्चस्व को लेकर रंजिश चल रही है। वर्ष 1964 में गोविंद के बाबा सोनेलाल की हत्या कर दी गई थी। वर्ष 1999 में पुलिस मुठभेड़ में उसके चाचा दरोगा की मौत हो गई थी। बाबा की हत्या और चाचा की मौत के पीछे गोविंद अशर्फीलाल का हाथ होने की आशंका करता था। इसी रंजिश में उसने अशर्फीलाल की हत्या कर दी। थाना प्रभारी अमर पाल सिंह ने बताया कि मंगलवार रात ग्रामीणों की मदद से गोविंद को दबोच लिया गया। एसपी ने ठठिया थाना प्रभारी और उनकी टीम को 15 हजार रुपये पुरस्कार दिया है। पुलिस का दावा है कि गोविंद ने हत्या करना कबूल किया है।
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करीब 60 साल पूर्व अशर्फीलाल और सोनेलाल की रंजिश चर्चित थी। दबंगई के बल पर दोनों की इलाके में तूती बोलती थी। गिरोह बनाकर चोरी, लूट, डकैती करने के आरोप में पुलिस ने अशर्फीलाल की हिस्ट्रीशीट भी खोली थी। सोनेलाल पर आपराधिक वारदातों में शामिल होने के आरोप लगे थे। सोनेलाल की हत्या के बाद उसका बेटा दरोगा गिरोह का सरगना बन गया था। वर्षों पुरानी रंजिश को दोनों परिवार भुला चुके थे। अशर्फीलाल की हत्या से रंजिश फिर गहरा गई है। इसी आशंका में पुलिस ने दोनों परिवार के लोगों को झगड़ा न करने की सख्त हिदायत दी है।
पुरानी रंजिश में हुई थी अशर्फीलाल की हत्या
आरोपी गोविंद गिरफ्तार, तमंचा और कारतूस बरामद
क्रासर
बाबा की हत्या,चाचा की मौत का बदला लेने को दिया वारदात को अंजाम
60 साल पहले हुई थी बाबा की हत्या, पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे चाचा
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो 07- खुलासा करते एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह।
एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि अशर्फीलाल की 26 नवंबर की रात बरामदे में सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के बेटे ने गांव के दुर्वेश, सुनील और पप्पू के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के दौरान तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिला लेकिन उनके परिवार के ही गोविंद ने वारदात को अंजाम दिया।
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एसपी ने बताया कि गोविंद और अशर्फीलाल के परिवार में कई दशक से वर्चस्व को लेकर रंजिश चल रही है। वर्ष 1964 में गोविंद के बाबा सोनेलाल की हत्या कर दी गई थी। वर्ष 1999 में पुलिस मुठभेड़ में उसके चाचा दरोगा की मौत हो गई थी। बाबा की हत्या और चाचा की मौत के पीछे गोविंद अशर्फीलाल का हाथ होने की आशंका करता था। इसी रंजिश में उसने अशर्फीलाल की हत्या कर दी। थाना प्रभारी अमर पाल सिंह ने बताया कि मंगलवार रात ग्रामीणों की मदद से गोविंद को दबोच लिया गया। एसपी ने ठठिया थाना प्रभारी और उनकी टीम को 15 हजार रुपये पुरस्कार दिया है। पुलिस का दावा है कि गोविंद ने हत्या करना कबूल किया है।
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करीब 60 साल पूर्व अशर्फीलाल और सोनेलाल की रंजिश चर्चित थी। दबंगई के बल पर दोनों की इलाके में तूती बोलती थी। गिरोह बनाकर चोरी, लूट, डकैती करने के आरोप में पुलिस ने अशर्फीलाल की हिस्ट्रीशीट भी खोली थी। सोनेलाल पर आपराधिक वारदातों में शामिल होने के आरोप लगे थे। सोनेलाल की हत्या के बाद उसका बेटा दरोगा गिरोह का सरगना बन गया था। वर्षों पुरानी रंजिश को दोनों परिवार भुला चुके थे। अशर्फीलाल की हत्या से रंजिश फिर गहरा गई है। इसी आशंका में पुलिस ने दोनों परिवार के लोगों को झगड़ा न करने की सख्त हिदायत दी है।
पुरानी रंजिश में हुई थी अशर्फीलाल की हत्या
आरोपी गोविंद गिरफ्तार, तमंचा और कारतूस बरामद
क्रासर
बाबा की हत्या,चाचा की मौत का बदला लेने को दिया वारदात को अंजाम
60 साल पहले हुई थी बाबा की हत्या, पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे चाचा
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो 07- खुलासा करते एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह।