फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kannauj News ›   crime

साइबर क्रिमिनलों तक नहीं पहुंच पा रही पुलिस

Sun, 19 Jul 2020 12:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2020 12:09 AM IST
विज्ञापन
crime
कन्नौज। जिले में साइबर क्राइम के मामले बढ़ रहे हैं। दो सालों में जिले में 40 से अधिक साइबर क्राइम के मामले दर्ज हुए हैं। इन मामलों में बहुत जी-हुज्जत के बाद मुकदमा दर्ज किया जाता है, उसके बाद फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। साइबर क्राइम के एक भी मामले का पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है। पुलिस फोन कर जालसाजी करने वाले लोगों के नाम-पते विदेश और दूसरे राज्यों के बताकर केस बंद कर देती है। इससे जालसाजों के हौसले बुलंद हैं, वह फोन पर गुमराह कर लोगों के खातों से नगदी उड़ा ले रहे हैं।
विज्ञापन

केस 01-
चौदह जुलाई को विष्णुपुरम कालोनी न्यू कचहरी रोड निवासी श्यामजी श्रीवास्तव को फोन कर पेटीएम अपडेट करने का झांसा देकर खाते में कुछ रुपये डलवाए गए। इसके कुछ देर बाद ही उनके खाते से 52 हजार रुपये निकाल ले गए। पुलिस मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दे रही है।
विज्ञापन

केस नंबर 2-
शहर के तिर्वा क्रासिंग निवासी रितु चौधरी पत्नी शेर सिंह को जालसाज ने जून 2019 में फोन किया। उसने ब्रिटेन से एक कीमती पार्सल भेजने का हवाला देकर 10 लाख खाते में डलवा लिए। इतनी बड़ी धनराशि की ठगी का मामला भी पुलिस आजतक नहीं खोल पाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस नंबर 03-
शहर के मुबारकपुर टीला निवासी बाबू राम को 30 अगस्त 2018 में फोन आया। फोन करने वाले ने टॉवर लगवाने का झांसा दिया। कहा, प्रतिमाह 25 हजार रुपये किराया और परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी मिलेगी। फोन करने वाले ने लालच देकर 75 हजार खाते में डलवा लिए। बाबूराम को न टॉवर मिला और न ही रुपये। उन्होंने मुकदमा दर्ज करा दिया था।
केस नंबर 04-
गुरसहायगंज निवासी दिलीप सिंह अप्रैल 2018 में फोन कर रेलवे में नौकरी लगवाने का झांसा दिया गया। फोन करने वाले ने 2.50 लाख खाते में डलवा लिए। उसके बाद लापता हो गया। ये मुकदमा भी साइबर सेल में दबा पड़ा है।

सीओ सदर श्रीकांत प्रजापति
साइबर क्राइम की घटनाओं में लोगों को खुद भी जागरूक रहने की जरूरत है। बैंक हमेशा बताते हैं कि अनजान फोन पर अपने सीक्रेट न बताएं। सीक्रेट बताने की आवश्यकता महसूस हो तो अपने बैंकर्स से बात जरूर करें। इसके अलावा पुलिस अपने स्तर से सर्विलांस आदि की मदद लेकर छानबीन में लगी है। पता चलते ही अपराधियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed