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Kannauj News: गाय के गोबर से दंतमंजन और फेसपैक बनाएगी बीहड़ की गोशाला
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औरैया। दूध और घी के लिए ही गोपालन करने वालों के लिए यह जरूरी खबर है। गाय के गोबर और मूत्र को भी आमदनी का जरिया बनाने के लिए कई जरूरी उत्पाद बनाए जाएंगे। इसमें पूजन सामग्री और फसल को कीटनाशक से बचाने के लिए उत्पाद तो बनेंगे ही अब गोबर से दंतमंजन और फेसपैक भी बनाए जाएंगे। इसके लिए पहल हो चुकी है।
शहर के करीब खानपुर गांव की गोशाला को एक संस्था के हवाले कर दिया गया है। ग्राम प्रधान शफीक खान ने बताया कि अब तक गोशाला का संचालन वही कर रहे थे। अब संस्था ने पहली दिसंबर से वहां की जिम्मेदारी संभाल ली है। सबसे पहले वहां साफ-सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। गोबर इकट्ठा करने का काम शुरू हो गया है। जल्द ही वहां गोबर और गोमूत्र से जुड़ी सामग्री बनाने का काम शुरू किया जाएगा। संवाद
इनसेट-- --
रोजाना एक टन गोबर और 100 लीटर गोमूत्र से बनेंगे उत्पाद
पीपीपी मॉडल के तहत गोशाला के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे संतोष गुप्ता के मुताबिक इन समय गोशाला में 96 गोवंश हैं। औसतन एक दिन में एक टन गोबर और 100 लीटर गोमूत्र इकट्ठा होगा। इन्हें बिना किसी रसायन के ही मशीन की मदद से अलग-अलग उत्पाद बनाए जाएंगे।
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इनसेट-- --
सौंदर्य उत्पाद, कीटनाशक के साथ मूर्तियां भी बनेंगीं
मशीन की मदद से गाय के गोबर का पाउडर बनाया जाएगा। उसे मुल्तानी मिट्टी, अमृत धारा, फूल का अर्क, संतरे के छिलके का पाउडर का लेप बनाकर फेस पैक बनाकर बाजार में उतारा जाएगा। इसी तरह गाय के गोबर का पाउडर बनाकर उसमें लौंग का तेल, अजवाइन, पिपरमिंट, कपूर, नमक, लटजीरा को मिलाकर दंतमंजन और टूथपेस्ट बनाया जाएगा। साथ ही गोबर से वर्मी कंपोस्ट और नाडेप कंपोस्ट तैयार किया जाएगा। गोमूत्र से पौधों के लिए कीटनाशक और फिनायल के साथ ही गोमूत्र अर्क तैयार किया जाएगा, जो लीवर, किडनी जैसी बीमारी के इलाज में काम आएगा। गोबर को सुखाकर उसके पाउडर से पूजन सामग्री के लिए दीपक, मूर्तियां और धूप बत्ती बनेगी। स्वयं समूह की 90 महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई है।
वर्जन-- -
सदर ब्लॉक की खानपुर गोशाला के संचालन के लिए उसे निजी संस्था के हवाले किया गया है। सरकार की ओर से हर गोवंश के लिए रोजाना 50 रुपये का भत्ता मिलता रहेगाा। संस्था वहां दूध, गोबर और गोमूत्र के उत्पाद से गोशाला की आमदनी बढ़ाएगी। प्रयोग सफल रहा तो दूसरी गोशाला में भी ऐसी ही व्यवस्था की जाएगी।
- डॉ. भानू प्रताप सिंह, सीवीओ, औरैया
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शहर के करीब खानपुर गांव की गोशाला को एक संस्था के हवाले कर दिया गया है। ग्राम प्रधान शफीक खान ने बताया कि अब तक गोशाला का संचालन वही कर रहे थे। अब संस्था ने पहली दिसंबर से वहां की जिम्मेदारी संभाल ली है। सबसे पहले वहां साफ-सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। गोबर इकट्ठा करने का काम शुरू हो गया है। जल्द ही वहां गोबर और गोमूत्र से जुड़ी सामग्री बनाने का काम शुरू किया जाएगा। संवाद
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रोजाना एक टन गोबर और 100 लीटर गोमूत्र से बनेंगे उत्पाद
पीपीपी मॉडल के तहत गोशाला के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे संतोष गुप्ता के मुताबिक इन समय गोशाला में 96 गोवंश हैं। औसतन एक दिन में एक टन गोबर और 100 लीटर गोमूत्र इकट्ठा होगा। इन्हें बिना किसी रसायन के ही मशीन की मदद से अलग-अलग उत्पाद बनाए जाएंगे।
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सौंदर्य उत्पाद, कीटनाशक के साथ मूर्तियां भी बनेंगीं
मशीन की मदद से गाय के गोबर का पाउडर बनाया जाएगा। उसे मुल्तानी मिट्टी, अमृत धारा, फूल का अर्क, संतरे के छिलके का पाउडर का लेप बनाकर फेस पैक बनाकर बाजार में उतारा जाएगा। इसी तरह गाय के गोबर का पाउडर बनाकर उसमें लौंग का तेल, अजवाइन, पिपरमिंट, कपूर, नमक, लटजीरा को मिलाकर दंतमंजन और टूथपेस्ट बनाया जाएगा। साथ ही गोबर से वर्मी कंपोस्ट और नाडेप कंपोस्ट तैयार किया जाएगा। गोमूत्र से पौधों के लिए कीटनाशक और फिनायल के साथ ही गोमूत्र अर्क तैयार किया जाएगा, जो लीवर, किडनी जैसी बीमारी के इलाज में काम आएगा। गोबर को सुखाकर उसके पाउडर से पूजन सामग्री के लिए दीपक, मूर्तियां और धूप बत्ती बनेगी। स्वयं समूह की 90 महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई है।
वर्जन
सदर ब्लॉक की खानपुर गोशाला के संचालन के लिए उसे निजी संस्था के हवाले किया गया है। सरकार की ओर से हर गोवंश के लिए रोजाना 50 रुपये का भत्ता मिलता रहेगाा। संस्था वहां दूध, गोबर और गोमूत्र के उत्पाद से गोशाला की आमदनी बढ़ाएगी। प्रयोग सफल रहा तो दूसरी गोशाला में भी ऐसी ही व्यवस्था की जाएगी।
- डॉ. भानू प्रताप सिंह, सीवीओ, औरैया