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आवारा हवा को झोंका हूं, आ निकला हूं...

Tue, 05 May 2015 12:09 AM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
अमर उजाला कन्नाैैज Updated Tue, 05 May 2015 12:09 AM IST
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हजरत ख्वाजा हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स में रविवार देरशाम महफिले समां का आयोजन हुआ। जबाबी कव्वाली का कार्यक्रम पूरी रात चला। इसका लुत्फ उठाने सैकड़ों की भीड़ उमड़ी।
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हजरत उस्मान हारूनी के पीर व हजरत ख्वाजा मोइनुददीन चिश्ती अजमेर शरीफ के दादापीर हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह अलैह की दरगाह शहर में स्थित है। शुक्रवार से शुरू हुआ 822वां सालाना उर्स का सोमवार सुबह समापन हो गया। रविवार देरशाम शुरू हुए कव्वाली कार्यक्रम में मुंबई के कव्वाल अल्ताफ राजा ने ‘आवारा हवा का झोंका हूं, आ निकला हूं पल दो पल के लिए’ गजल सुनाकर समां बांध दिया। इसके बाद ‘जा बेवफा जा तुझे प्यार नहीं करना, तन्हा ही जी लेंगे जब है तन्हा मरना’ गजल पर महफिल झूम उठी।
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गया बिहार से आई कव्वाला जेबां नाज ने मन्कबत ‘उम्मीद नहीं थी बचने की ख्वाजा ने करम फरमाया, बच्चा जो गिरा रावा में उसे बचाया, हर दौर में मेरे ख्वाजा ने लाज रखी’ को काफी वाहवाही मिली। इसके बाद ‘नींद आंखों की गई याद जो आई तेरी, हम को सोने नहीं देती है जुदाई तेरी’ और ‘हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह, बस एक बार मुलाकात का मौका दे दे’ गजलों को भी पसंद किया गया।
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कव्वाल अल्ताफ राजा ने ‘आईना भी खुश होकर आज मुस्कुराया है, उसने अपने चेहरे से जब नकाब हटाया है’ सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद ‘तुम तो ठहरे परदेशी साथ क्या निभाओगे, सुबह पहली गाड़ी से घर को लौट जाओगे’ सुनकर लोगों ने इनाम के तौर पर नोटों की बारिश सी कर दी। सुबह 4 बजे कुल शरीफ का आयोजन हुआ।

हजारों की तादात में अकीदतमंद दरगाह पहुंचे और फातिहा के बाद देश में अमन-चैन की दुआ मांगी। इस मौके पर उर्स कमेटी के सदर हाजी शमसुल खान, मेला प्रभारी उबैदुल हसन खलीफा, मास्टर निजाम सिद्दीकी, मंगल नेता, रिंकू सिद्दीकी, अफजाल खान, प्रधान महबूब आलम, हाजी हसीम वारसी, मास्टर वसीउद्दीन के अलावा कोतवाली प्रभारी भुल्लन यादव, महिला थानाध्यक्ष परवीन कौसर, चौकी प्रभारी राजा सिंह परिहार, दरोगा शेख अहमद सहित काफी लोग मौजूद रहे।

जगह के लिए हुई जद्दोजहद
उर्स के अंतिम दिन उम्मीद से अधिक भीड़ आ जाने से कव्वाली के दौरान लोगों को बैठने की जगह के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। कमेटी के पदाधिकारियों को भी बैठने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस व स्वाट टीम जवानों को काफी पसीना बहाना पड़ा। इसके चलते लोगों ने पंडाल में खड़े होकर कव्वाली सुनी।

दर्जनों बच्चे अपनों से बिछड़े
मेला देखने आए कई बच्चे अपने परिजनों से बिछड़ गए। लोगों ने रोते-बिलखते बच्चों को दरगाह परिसर में पुलिस चौकी में पहुंचाया। एनाउंसमेंट के जरिए परिजनों को बुलाकर उसको सौंपा गया। अपनों से बिछड़े कुछ बच्चे स्टेज के पास पहुंच गए। उन्हें भी एनाउंसमेंट के जरिए परिजनों से मिलवाया गया।

जगह-जगह लगाई गई बैरीकेटिंग
उर्स में व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए चार पहिया वाहनों को लाखन तिराहा के निकट रोक दिया गया। जबकि दुपहिया वाहनों को रोकने के लिए चांदनी चौक, भूड़ा मंदिर व झंडे तले में तीनों रास्तों को सील कर दिया गया। साइकिल स्टैंड पर बाइकों को खड़ा कर लोग मेला देखने पैदल पहुंचे।


लंगर में जुटी रही भीड़
रविवार को बाहर से आए जायरीनों का दरगाह परिसर में जमावड़ा लग गया। परिसर में लोगों को बैठने के लिए जगह के लिए भटकना पड़ा। लंगर प्रभारी हाजी मुदस्सिर हुसैन व निसार खां की मौजूदगी में पूरी रात लंगर की व्यवस्था चलती रही।
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