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आरोप: जबरन रेफर करने से गई बेटे की जान
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कन्नौज। राजकीय मेडिकल कालेज में तीन दिन पहले भर्ती हुए प्रखर अग्निहोत्री की मौत के मामले में महाविद्यालय प्राचार्य ने डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है। प्राचार्य ने कहा कि जबरन रेफर करने से बेटे की जान चली गई। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जांच कराने की मांग की है।
पीएसएम (पंडित सुंदर लाल मेमोरियल )कालेज की प्राचार्य शशिप्रभा अग्निहोत्री ने सीएम को भेजे पत्र में कहा है कि बेटे को सांस लेने में दिक्कत और लेवल 85 होने पर तीन दिन पहले मेडिकल कालेज में भर्ती कराया था। इस वार्ड में ऑक्सीजन उपलब्ध न होने से चार लोगों की मौत हो गई थी। इससे मचे हड़कंप के बाद डॉक्टर और स्टाफ को फोन कर बेटे को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने के लिए कहा। इसकी अनसुनी कर दी गई। वार्ड की सुबह साढ़े ग्यारह बजे तक सफाई नहीं होती थी। बेटे को सांस लेने में दिक्कत बढ़ रही थी।
हालत नाजुक देख डॉक्टरों से संपर्क किया गया। इन्होंने दूसरी जगह ले जाने के लिए कह दिया। इसके बाद एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। डॉक्टरों और स्टाफ ने बेटे को एंबुलेंस में शिफ्ट करने में इतनी देर कर दी कि बेड पर ऑक्सीजन लगे होने पर भी अटैक पड़ गया। इससे मौत हो गई। इसके बाद स्टाफ ने बाहर निकाला। 37 वर्षीय बेटा मेडिकल कालेज की अव्यवस्थाओं का शिकार हो गया। प्राचार्य ने सीएम से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर न्याय की मांग की है। वहीं मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत का कहना है कि मेडिकल स्टाफ हर मरीज की जान बचाने और बेहतर उपचार देने की पूरी कोशिश कर रहा है। फिर भी जांच कराई जाएगी।
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पीएसएम (पंडित सुंदर लाल मेमोरियल )कालेज की प्राचार्य शशिप्रभा अग्निहोत्री ने सीएम को भेजे पत्र में कहा है कि बेटे को सांस लेने में दिक्कत और लेवल 85 होने पर तीन दिन पहले मेडिकल कालेज में भर्ती कराया था। इस वार्ड में ऑक्सीजन उपलब्ध न होने से चार लोगों की मौत हो गई थी। इससे मचे हड़कंप के बाद डॉक्टर और स्टाफ को फोन कर बेटे को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने के लिए कहा। इसकी अनसुनी कर दी गई। वार्ड की सुबह साढ़े ग्यारह बजे तक सफाई नहीं होती थी। बेटे को सांस लेने में दिक्कत बढ़ रही थी।
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हालत नाजुक देख डॉक्टरों से संपर्क किया गया। इन्होंने दूसरी जगह ले जाने के लिए कह दिया। इसके बाद एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। डॉक्टरों और स्टाफ ने बेटे को एंबुलेंस में शिफ्ट करने में इतनी देर कर दी कि बेड पर ऑक्सीजन लगे होने पर भी अटैक पड़ गया। इससे मौत हो गई। इसके बाद स्टाफ ने बाहर निकाला। 37 वर्षीय बेटा मेडिकल कालेज की अव्यवस्थाओं का शिकार हो गया। प्राचार्य ने सीएम से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर न्याय की मांग की है। वहीं मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत का कहना है कि मेडिकल स्टाफ हर मरीज की जान बचाने और बेहतर उपचार देने की पूरी कोशिश कर रहा है। फिर भी जांच कराई जाएगी।
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