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Kannauj News: चकबंदी स्थगित कराने का शासन को भेजा प्रस्ताव
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जलालाबाद। जलालाबाद ग्राम पंचायत में वर्ष 2017 से चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर किसानों के लगातार और व्यापक विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को बड़ा निर्णय लिया है। डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त करने के संबंध में प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। साथ ही अग्रिम आदेश तक चकबंदी से संबंधित कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
बताया जा रहा है कि पर्चा 23 के वितरण के बाद से ही किसानों में असंतोष बढ़ गया था। किसानों का आरोप था कि चकबंदी के नाम पर उनकी बहुमूल्य भूमि को इधर-उधर कर दिया गया है। वहीं, छोटे किसानों की जमीन में कटौती की गई है। इसको लेकर गांव में कई बार धरना-प्रदर्शन हुए और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश देखने को मिला। इसके लिए किसानों ने डीएम जिलाधिकारी से लेकर मंत्री असीम अरुण, पूर्व सांसद सुब्रत पाठक और विधायक कैलाश राजपूत तक चकबंदी निरस्त कराने की मांग की थी।
विरोध की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने तीन दिसंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट, बंदोबस्त अधिकारी अविनाश गौतम को गांव भेजकर जांच कराई। तब यह सामने आया कि 80 प्रतिशत किसानों ने चकबंदी न कराने के पक्ष में हस्ताक्षर किए हैं। इसके बाद ग्राम प्रधान सहित ग्राम पंचायत के सभी सदस्यों ने चकबंदी निरस्त कराने के लिए हलफनामे के साथ प्रार्थना पत्र डीएम को सौंपा। यही नहीं, किसानों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी ज्ञापन भेजकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
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किसानों का कहना है कि चकबंदी से न तो उन्हें कोई लाभ मिल रहा है और न ही उनकी समस्याओं का समाधान हो रहा है। बल्कि इससे आपसी विवाद और बढ़ रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने चकबंदी निरस्तीकरण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। फिलहाल डीएम ने चकबंदी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शासन से कोई अंतिम आदेश आने तक गांव में चकबंदी से संबंधित कोई भी कार्रवाई न की जाए।
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भाजपा नेता ने उठाई विशुनगढ़ में चकबंदी कराने की मांग
विशुनगढ़। आरक्षण आंदोलन के दौरान वर्ष 1990 में फतेहगढ़ के फूस बंगला अग्निकांड में गांव सभा विशुनगढ़ समेत 33 गांव का राजस्व रिकार्ड जल गया था। भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रामबख्श लोधी ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र भेजकर गांव में चकबंदी कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा इलाके के गांवों में चकबंदी प्रक्रिया संपंन कराई जा रही है। चकबंदी विभाग की उदासीनता के चलते अभी तक विशुनगढ़ ग्राम सभा में चकबंदी प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। राजस्व रिकार्ड उपलब्ध न होने के कारण क्षेत्र के किसानों को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आरोप है कि गांव सभा की सैकड़ों बीघा जमीन पर पड़ोसी जिले मैनपुरी के लोग कब्जा किए हुए हैं। विशुनगढ़ रियासत की उत्तराधिकारी पुष्पा त्रिपाठी ने बताया कि किला की जमीन पर भी लोगों ने कब्जा कर रखा है। शेष बची जमीन पर लोग नजर लगाए हुए हैं।
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बताया जा रहा है कि पर्चा 23 के वितरण के बाद से ही किसानों में असंतोष बढ़ गया था। किसानों का आरोप था कि चकबंदी के नाम पर उनकी बहुमूल्य भूमि को इधर-उधर कर दिया गया है। वहीं, छोटे किसानों की जमीन में कटौती की गई है। इसको लेकर गांव में कई बार धरना-प्रदर्शन हुए और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश देखने को मिला। इसके लिए किसानों ने डीएम जिलाधिकारी से लेकर मंत्री असीम अरुण, पूर्व सांसद सुब्रत पाठक और विधायक कैलाश राजपूत तक चकबंदी निरस्त कराने की मांग की थी।
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विरोध की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने तीन दिसंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट, बंदोबस्त अधिकारी अविनाश गौतम को गांव भेजकर जांच कराई। तब यह सामने आया कि 80 प्रतिशत किसानों ने चकबंदी न कराने के पक्ष में हस्ताक्षर किए हैं। इसके बाद ग्राम प्रधान सहित ग्राम पंचायत के सभी सदस्यों ने चकबंदी निरस्त कराने के लिए हलफनामे के साथ प्रार्थना पत्र डीएम को सौंपा। यही नहीं, किसानों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी ज्ञापन भेजकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
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किसानों का कहना है कि चकबंदी से न तो उन्हें कोई लाभ मिल रहा है और न ही उनकी समस्याओं का समाधान हो रहा है। बल्कि इससे आपसी विवाद और बढ़ रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने चकबंदी निरस्तीकरण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। फिलहाल डीएम ने चकबंदी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शासन से कोई अंतिम आदेश आने तक गांव में चकबंदी से संबंधित कोई भी कार्रवाई न की जाए।
भाजपा नेता ने उठाई विशुनगढ़ में चकबंदी कराने की मांग
विशुनगढ़। आरक्षण आंदोलन के दौरान वर्ष 1990 में फतेहगढ़ के फूस बंगला अग्निकांड में गांव सभा विशुनगढ़ समेत 33 गांव का राजस्व रिकार्ड जल गया था। भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रामबख्श लोधी ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र भेजकर गांव में चकबंदी कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा इलाके के गांवों में चकबंदी प्रक्रिया संपंन कराई जा रही है। चकबंदी विभाग की उदासीनता के चलते अभी तक विशुनगढ़ ग्राम सभा में चकबंदी प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। राजस्व रिकार्ड उपलब्ध न होने के कारण क्षेत्र के किसानों को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आरोप है कि गांव सभा की सैकड़ों बीघा जमीन पर पड़ोसी जिले मैनपुरी के लोग कब्जा किए हुए हैं। विशुनगढ़ रियासत की उत्तराधिकारी पुष्पा त्रिपाठी ने बताया कि किला की जमीन पर भी लोगों ने कब्जा कर रखा है। शेष बची जमीन पर लोग नजर लगाए हुए हैं।