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अपहरण के आरोपी इंजीनियरिंग छात्र का शव नदी में मिला

Tue, 05 Aug 2014 05:30 AM IST
Kannauj
Kannauj Updated Tue, 05 Aug 2014 05:30 AM IST
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आक्रोशित परिजनों ने शव रख रास्ता किया जाम
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एडीओ के बेटे ने बनाया था अपहरण का आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
छिबरामऊ (कन्नौज)। एडीओ के बेटे के अपहरण के आरोपी इंजीनियरिंग छात्र का सोमवार को नदी में शव मिला। आक्रोशित छात्र के परिजनों ने जीटी पर शव रखकर रास्ता जाम कर दिया। आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या कर शव नदी में फेंका गया है। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का भरोसा देकर करीब तीन घंटे बाद रास्ता खुलवाया।
नगर के रामपुर बैजू निवासी रिटायर्ड वीडीओ दीनदयाल वर्मा का बेटा अजय कुमार (21) बीटेक का छात्र था। वह 30 जुलाई को मोहल्ला भैनपुरा नईबस्ती निवासी एडीओ रामकुमार के बेटे अरुण के मथुरा स्थित इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट जाने के लिए निकला। लौटते समय रास्ते में अरुण गायब हो गया था। इस पर अरुण के परिजनों ने अजय से पूछताछ की, लेकिन अरुण का कोई सुराग नहीं लग सका। शनिवार की रात नाटकीय तरीके से अरुण घर लौटा। उसने पुलिस को बताया कि अजय और उसके तीन साथियों ने फिरौती के लिए उसका अपहरण कर लिया था। पुलिस ने अजय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। रविवार सुबह सात बजे अचानक अजय गायब हो गया। दोपहर में उसकी बाइक और कपड़े सांसापुर काली नदी पुल से बरामद हुए। सोमवार दोपहर करीब 12.45 बजे अजय का शव मनिकापुर गांव के समीप नदी में उतराता मिला। इसकी जानकारी मिलने पर इलाके में सनसनी फैल गई। परिजन मौके पर पहुंचे। शव लेकर परिजन छिबरामऊ पहुंचे तो मौके पर जुटे लोगों का आक्रोश बढ़ गया। युवक के रिश्तेदारों व स्थानीय लोगों ने हत्या का आरोप लगा जीटी रोड पर शव रखकर रास्ता जाम कर दिया। इससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। मौके पर पहुंचे सीओ रमेश कुमार भारतीय ने लोगों को समझा-बुझाकर रास्ता खुलवाने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित लोगों का कहना था कि हत्याकांड के आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। करीब तीन घंटे बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम राम बहादुर वर्मा ने कार्रवाई का आश्वासन देकर रास्ता खुलवाया। इसके बाद शव का पंचनामाभर कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। अजय के पिता ने आरोप लगाया कि उसके बेटे को पुलिस ने प्रताड़ित किया। बाद में उसकी हत्या कर शव नदी में फेंक दिया गया। उन्होंने रिटायर्ड एडीओ रामकुमार और उसके बेटे अरुण के खिलाफ हत्या की तहरीर दी है। सीओ रमेश कुमार भारतीय ने बताया इंजीनियर छात्र के पिता दीनदयाल की तहरीर पर अरुण के पिता रामकुमार समेत उसके भाइयों आदित्य और प्रभात के खिलाफ अपहरण कर हत्या करके शव काली नदी में फेंक देने का मुकदमा दर्ज किया गया है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उधर पूरे प्रकरण की जांच भी चालू है।
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फोन उठ जाता तो बच जाती जान
छिबरामऊ (कन्नौज)। अजय के पिता दीनदयाल को जब से अरुण के गायब होने की खबर मिली थी। वह लगातार उसके पिता राम कुमार के संपर्क में थे। उनके साथ पुलिस को सूचना देने गए और तलाश भी की। शनिवार की रात जब अरुण घर वापस आ गया था तो उन्होंने दीनदयाल को इसकी जानकारी नहीं दी। रात एक बजे वह बेटे को लेकर थाने गए। इसके बाद रविवार सुबह उसके साथ जाकर फिरौती, अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी। दीनदयाल के अनुसार रविवार सुबह उन्होंने सोते बेटे अजय को जगाया था और हाथ जोड़कर बोले थे, कि बेटा अगर कोई बात हो तो बता दो। इस पर अजय पिता को देखकर रोते हुए बोला था। अगर कोई बात होती तो बताता नहीं और पुलिस तो परेशान कर ही रही है। आप लोग भी मेरा विश्वास नहीं कर रहे है। इसके बाद दीनदयाल ने राम कुमार से मोबाइल पर संपर्क किया, लेकिन पूरी कॉल होने के बाद भी उन्होंने रिसीव नहीं की। इसके बाद कॉल काटने लगे। इधर, दुखी अजय घर से बगैर किसी को कुछ बताए निकल गया। दीनदयाल के अनुसार यदि रामकुमार फोन उठाकर कह देते कि उनका बेटा वापस आ गया है तो शायद अजय की जान बच जाती।
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आठ किमी दूर मिला शव
छिबरामऊ। अजय के घर से गायब होने के बाद उसकी बाइक और कपड़े फर्रुखाबाद जनपद के थाना मोहम्मदाबाद के सांसापुरपुल के पास मिले थे। लोग उसके वही डूबने की आशंका जता रहे थे। पुलिस ने पुल के पास ही जाल बिछाया था। वहा पर कुछ पत नहंीं चला तो सोमवार सुबह पुलिस ने शव की खोजबीन के लिए जहानगंज रोड पर ग्राम उधरनपुर के पास काली नदी पुल पर जाल बिछाया। वहां से करीब आठ किमी दूर मनिकापुर के पास अजय का शव उतराता मिला।
फौजी ने नदी में कूद निकाला शव
छिबरामऊ। शव की हालत देखकर पुलिस उसे निकालने से कतराती रही। इस पर वहां मौजूद मोहम्मदाबाद थान ाक्षेत्र के गांव नगलाभूड़ धीरपुर निवासी फौजी रामरतन ने नदी में कूदकर अजय का शव बाहर निकाला। हालांकि इसके बाद उसकी भी हालत बिगड़ गई। कई बार उल्टियां हुईं।

साहब मेरे लाल को मेरे पेट पर रख दो
छिबरामऊ (कन्नौज)। साहब मेरा इंजीनियर कहा है। मेले लाल को मेरे पेट पर रख दो। मुझे उसके शव के पास ही सोना है। मेरे लल्ला मेरे शेर कहां हो। एक वृद्ध और बदहवाश पिता के ये शब्द सुनकर कोई अपने आंसू नहीं रोंक सका। अजय के पिता दीनदयाल कई बार बेहोश होकर गिर पड़े। वही उसके दोनों भाईयों को लोग ढांढस बंधाते रहे। दीनदयाल और उनकी पत्नी साथ करीब 18 साल पहले छूट गया था। उस समय अजय दो साल का था। उसके दोनों बड़े भाई भी छोटे थे। ऐसे में बड़े संघर्ष से उन्होंने बच्चों को पाला था। अजय सबसे छोटा था, इसलिए उसे पेट पर लिटाकर सुलाते थे। वह उनका सबसे लाडला था। सोमवार जब उन्होंने बेटे का शव देखा तो फफक पड़े।
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