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11 की-मैन के भरोसे 67 किमी का रेलवे ट्रैक
Updated Sat, 09 Sep 2017 12:19 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। बुलेट ट्रेन के युग में रेलवे में आज भी पटरी की निगरानी की-मैन के हवाले है। कन्नौज जिले के 67 किमी लंबे रेलवे ट्रैक की निगरानी के लिए केवल 11 की-मैन हैं। की मैन निगरानी के लिए वह 15 किलो वजनी बैग कंधे पर लादकर चलता है। चतुर्थ क्लास श्रेणी का यह कर्मचारी (की-मैन) बैग लिए कंधे पर करीब छह किलोमीटर से ज्यादा ट्रैक पर पैदल ही पेट्रोलिंग करते रहते है। बैग में रखे हथौड़े, रॉड, रिंच और पाना की मदद से की-मैन ट्रैक की हल्की-फुल्की मरम्मत खुद ही कर देते है। पटरी के टूटने, कटे होने, पेंड्रोल, क्लिप चोरी होेने और फिश प्लेट गायब होने की स्थिति की रिपोर्ट नजदीकी स्टेशन को देता है। यहां से इसकी जानकारी कंट्रोल रुम को दे दी जाती है। दशकों बाद भी रेलवे ट्रैक की निगरानी के लिए आधुनिक डिवाइस इजाद नहीं कर सका है।
कानपुर-फर्रुखाबाद सेक्शन में अरौल से लेकर फतेहगढ़ 67 किमी लंबा ट्रैक आता है। इस ट्रैक की निगरानी के लिए रेलवे के पास केवल 11 की-मैन है। इस हिसाब से एक की-मैन के हिस्से में अप-डाउन में करीब 12 किलोमीटर ट्रैक की निगरानी आती है। वहीं 11 की-मैन में से औसतन रोजाना एक-दो की-मैन किसी न किसी कारण बीमारी के चलते छुट्टी पर भी रहते है।
11 की-मैन के भरोसे 67 किमी का रेलवे ट्रैक
- 15 किलो का बैग कंधे पर लाद कर चलता है की-मैन
कन्नौज। बुलेट ट्रेन के युग में रेलवे में आज भी पटरी की निगरानी की-मैन के हवाले है। कन्नौज जिले के 67 किमी लंबे रेलवे ट्रैक की निगरानी के लिए केवल 11 की-मैन हैं। की मैन निगरानी के लिए वह 15 किलो वजनी बैग कंधे पर लादकर चलता है। चतुर्थ क्लास श्रेणी का यह कर्मचारी (की-मैन) बैग लिए कंधे पर करीब छह किलोमीटर से ज्यादा ट्रैक पर पैदल ही पेट्रोलिंग करते रहते है। बैग में रखे हथौड़े, रॉड, रिंच और पाना की मदद से की-मैन ट्रैक की हल्की-फुल्की मरम्मत खुद ही कर देते है। पटरी के टूटने, कटे होने, पेंड्रोल, क्लिप चोरी होेने और फिश प्लेट गायब होने की स्थिति की रिपोर्ट नजदीकी स्टेशन को देता है। यहां से इसकी जानकारी कंट्रोल रुम को दे दी जाती है। दशकों बाद भी रेलवे ट्रैक की निगरानी के लिए आधुनिक डिवाइस इजाद नहीं कर सका है।
कानपुर-फर्रुखाबाद सेक्शन में अरौल से लेकर फतेहगढ़ 67 किमी लंबा ट्रैक आता है। इस ट्रैक की निगरानी के लिए रेलवे के पास केवल 11 की-मैन है। इस हिसाब से एक की-मैन के हिस्से में अप-डाउन में करीब 12 किलोमीटर ट्रैक की निगरानी आती है। वहीं 11 की-मैन में से औसतन रोजाना एक-दो की-मैन किसी न किसी कारण बीमारी के चलते छुट्टी पर भी रहते है।
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11 की-मैन के भरोसे 67 किमी का रेलवे ट्रैक
- 15 किलो का बैग कंधे पर लाद कर चलता है की-मैन