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बिजली विभाग को चूना लगाने में फंसे निजी नलकूप संचालक और ठेकेदार
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कन्नौज। निजी नलकूप के लिए तैयार किए गए एस्टीमेट में खेल कर बिजली विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाने वाले नलकूप संचालक, ठेकेदार और दलालों पर बिजली विभाग बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। इन पर आरोप है कि एस्टीमेट में कम पोल और लाइन दिखाकर ठेकेदार और दलालों ने ज्यादा पोल और लाइन बिछा दी। इससे विभाग को लाखों का नुकसान हुआ। विभाग इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और रिकवरी की तैयारी कर रहा है।
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एमडी एसके वर्मा को जानकारी मिली थी कि जिले में निजी नलकूप लगाने में विभाग को चूना लगाया जा रहा है। सूचना के आधार पर एमडी ने जांच कराई। इसमें पाया गया कि निजी नलकूप संचालकों ने एस्टीमेट कम करने के लिए पोलों की संख्या कम दिखाई। इससे बिछाई जाने वाली लाइन की लंबाई भी कम हो गई। भौतिक सत्यापन में पाया गया कि जिन्होंने एस्टीमेट में दो पोल दिखाए थे, उन्होंने चार तक लगवा लिए। यह खेल विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों के साथ ही ठेकेदार व दलालों ने मिलकर किया। शुरुआती दौर में करीब 50 निजी नलकूपों की जांच हुई। 12 में घोटाला सामने आया है। एमडी ने जिले में अभी तक लगाए गए सभी 13627 नलकूपों की जांच के लिए कहा है। माना जा रहा है कि बड़ा खेल सामने आएगा। कई लोग इसमें फंसेंगे। अभी तक जिन 12 निजी नलकूप संचालकों ने गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ व इसमें शामिल ठेकेदार व दलालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर विभाग रिकवरी की तैयारी कर रहा है।
दलाल बने बीच की कड़ी
जांच में सामने आया कि बिजली विभाग में सक्रिय दलाल बीच की कड़ी बने हैं। ग्रामीणों ने काम के लिए दलालों का सहारा लिया। दलालों ने कनेक्शन के लिए ठेका ले लिया। खुद ही लाइन का नक्शा तैयार कर जेई व लाइनमैन से हस्ताक्षर कराकर लाइन का एस्टीमेट तैयार कर लिया। धनराशि विभाग में जमा कर कनेक्शन दिलाने के साथ ही बिजली लाइन बिछाकर निजी नलकूपों को चालू कर दिया। जिन एस्टीमेट में दो पोल और 100 मीटर की लाइन दिखाई गई, वहां चार पोल और 200 मीटर की लाइन बिछा दी गई। माना जा रहा है कि विभाग को मोटा चूना लगाया गया। पांच दिनों से हो रही जांच में निजी नलकूप के एस्टीमेट में बड़ा खुलासा होता जा रहा है। लाइन बनवाने वाले कुछ दलाल अपने को फंसता देख बचाव का रास्ता निकालने लगे हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद उनके पास रिपोर्ट आएगी तो लाइन का एस्टीमेट तैयार कराने वाले निजी नलकूप धारक के अलावा लाइन बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बिजली विभाग में दिन भर सक्रिय रहते दलाल
पेटी ठेकेदार पूरे दिन दलाली करने के लिए विभागीय कार्यालय में चक्कर काटते रहते हैं। कोई किसान निजी नलकूप का कनेक्शन लेने के लिए टकरा जाता है तो वह पोलों की संख्या के अनुसार धनराशि बताते हैं। कागजी झंझटों से बचने के लिए किसान दलाल को कागजात व बताई गई धनराशि दे देते हैं। इसके बाद दलाल लाइन को बनवाने के अलावा कागजी कार्रवाई करने में लग जाता है। 15 दिन से एक माह में कागजी कोरम पूरा करने के बाद विभाग में एस्टीमेट के अनुसार धनराशि जमा करा कनेक्शन देने का काम शुरू हो जाता है। नलकूप चालू होने के बाद किसान यह भी ध्यान नहीं देते कि एस्टीमेट कितने पोल का बना था, पोल कितने लगा कर लाइन का निर्माण कराया गया है।
पेटी ठेकेदारों के पास हैं विभाग के पोल व ट्रांसफार्मर
पेटी ठेकेदारों के पास पहले से ही पोल व लाइन के लिए बिजली सामग्री उपलब्ध रहती है। स्टोर से सामान उठाने के लिए वह कनेक्शन धारक से एस्टीमेट का कागज खुद ले लेते हैं। इस के बाद लाइन बनवाना शुरू कर देते हैं। अगर सामग्री पास न हुई तो स्टोर से ले लेते हैं। अधिकतर सामग्री पास से ही लगाते हैं। बाद में स्टोर से उठाया गया सामान अपनी गोदाम या आवास पर रख लेते हैं। इसी सामान से गोरखधंधा फलता फूलता है। सबसे अधिक दिक्कत ट्रांसफार्मर लेने में होती है। इसके लिए वह पुराना रिपेयर ट्रांसफार्मर लगा देते हैं। यदि किसी निजी नलकूप धारक ने कहा तो बाद में स्टोर से मिलने पर पुराना ट्रांसफार्मर उतार कर नया लगवा देते हैं।
कन्नौज से अधिक छिबरामऊ क्षेत्र में लगाई चपत
पेटी ठेकेदारों व दलालों ने कन्नौज से अधिक छिबरामऊ क्षेत्र में विभाग को चपत लगाई है। कन्नौज के ठठिया, तिर्वा व कन्नौज मुख्यालय के निकट दलालों ने यह खेल खेला है। इसी तरह छिबरामऊ में सौरिख, तालग्राम, हसेरन व गुरसहायगंज क्षेत्र में एस्टीमेट के साथ खिलवाड़ कर लाइनें बिछाई गई हैं। जांच को लेकर दलालों व पेटी ठेकेदारों में हड़कंप है। वह नहीं चाहते कि जांच हो।
कनेक्शन धारक को ही दिया जाता सामान
स्टोर के एई विशाल वर्मा का कहना है कि बिजली स्टोर से बीते पांच माह से नियमों में बदलाव कर दिया गया है। अब कनेक्शन धारक के कहने के बाद भी स्टोर से सामान ठेकेदार व दलाल को नहीं दिया जाता है। केवल कनेक्शन धारकों को ही सामान उठाने की इजाजत दी गई है। किसी दलाल या ठेकेदार को सामान देने पर रोक लगा दी गई है। इससे दलाल व ठेकेदार परेशान हैं।
अभी नहीं मिली जानकारी
अधीक्षण अभियंता जीपी यादव का कहना है कि बिजली विभाग को कम पोल का एस्टीमेट थमा कर निजी नलकूप का कनेक्शन लेने के मामले में जानकारी नहीं है। उच्च स्तर से गोपनीय जांच कराई जा रही है तो उसकी रिपोर्ट आने के बाद जो आदेश दिया जाएगा, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एमडी एसके वर्मा को जानकारी मिली थी कि जिले में निजी नलकूप लगाने में विभाग को चूना लगाया जा रहा है। सूचना के आधार पर एमडी ने जांच कराई। इसमें पाया गया कि निजी नलकूप संचालकों ने एस्टीमेट कम करने के लिए पोलों की संख्या कम दिखाई। इससे बिछाई जाने वाली लाइन की लंबाई भी कम हो गई। भौतिक सत्यापन में पाया गया कि जिन्होंने एस्टीमेट में दो पोल दिखाए थे, उन्होंने चार तक लगवा लिए। यह खेल विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों के साथ ही ठेकेदार व दलालों ने मिलकर किया। शुरुआती दौर में करीब 50 निजी नलकूपों की जांच हुई। 12 में घोटाला सामने आया है। एमडी ने जिले में अभी तक लगाए गए सभी 13627 नलकूपों की जांच के लिए कहा है। माना जा रहा है कि बड़ा खेल सामने आएगा। कई लोग इसमें फंसेंगे। अभी तक जिन 12 निजी नलकूप संचालकों ने गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ व इसमें शामिल ठेकेदार व दलालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर विभाग रिकवरी की तैयारी कर रहा है।
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दलाल बने बीच की कड़ी
जांच में सामने आया कि बिजली विभाग में सक्रिय दलाल बीच की कड़ी बने हैं। ग्रामीणों ने काम के लिए दलालों का सहारा लिया। दलालों ने कनेक्शन के लिए ठेका ले लिया। खुद ही लाइन का नक्शा तैयार कर जेई व लाइनमैन से हस्ताक्षर कराकर लाइन का एस्टीमेट तैयार कर लिया। धनराशि विभाग में जमा कर कनेक्शन दिलाने के साथ ही बिजली लाइन बिछाकर निजी नलकूपों को चालू कर दिया। जिन एस्टीमेट में दो पोल और 100 मीटर की लाइन दिखाई गई, वहां चार पोल और 200 मीटर की लाइन बिछा दी गई। माना जा रहा है कि विभाग को मोटा चूना लगाया गया। पांच दिनों से हो रही जांच में निजी नलकूप के एस्टीमेट में बड़ा खुलासा होता जा रहा है। लाइन बनवाने वाले कुछ दलाल अपने को फंसता देख बचाव का रास्ता निकालने लगे हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद उनके पास रिपोर्ट आएगी तो लाइन का एस्टीमेट तैयार कराने वाले निजी नलकूप धारक के अलावा लाइन बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बिजली विभाग में दिन भर सक्रिय रहते दलाल
पेटी ठेकेदार पूरे दिन दलाली करने के लिए विभागीय कार्यालय में चक्कर काटते रहते हैं। कोई किसान निजी नलकूप का कनेक्शन लेने के लिए टकरा जाता है तो वह पोलों की संख्या के अनुसार धनराशि बताते हैं। कागजी झंझटों से बचने के लिए किसान दलाल को कागजात व बताई गई धनराशि दे देते हैं। इसके बाद दलाल लाइन को बनवाने के अलावा कागजी कार्रवाई करने में लग जाता है। 15 दिन से एक माह में कागजी कोरम पूरा करने के बाद विभाग में एस्टीमेट के अनुसार धनराशि जमा करा कनेक्शन देने का काम शुरू हो जाता है। नलकूप चालू होने के बाद किसान यह भी ध्यान नहीं देते कि एस्टीमेट कितने पोल का बना था, पोल कितने लगा कर लाइन का निर्माण कराया गया है।
पेटी ठेकेदारों के पास हैं विभाग के पोल व ट्रांसफार्मर
पेटी ठेकेदारों के पास पहले से ही पोल व लाइन के लिए बिजली सामग्री उपलब्ध रहती है। स्टोर से सामान उठाने के लिए वह कनेक्शन धारक से एस्टीमेट का कागज खुद ले लेते हैं। इस के बाद लाइन बनवाना शुरू कर देते हैं। अगर सामग्री पास न हुई तो स्टोर से ले लेते हैं। अधिकतर सामग्री पास से ही लगाते हैं। बाद में स्टोर से उठाया गया सामान अपनी गोदाम या आवास पर रख लेते हैं। इसी सामान से गोरखधंधा फलता फूलता है। सबसे अधिक दिक्कत ट्रांसफार्मर लेने में होती है। इसके लिए वह पुराना रिपेयर ट्रांसफार्मर लगा देते हैं। यदि किसी निजी नलकूप धारक ने कहा तो बाद में स्टोर से मिलने पर पुराना ट्रांसफार्मर उतार कर नया लगवा देते हैं।
कन्नौज से अधिक छिबरामऊ क्षेत्र में लगाई चपत
पेटी ठेकेदारों व दलालों ने कन्नौज से अधिक छिबरामऊ क्षेत्र में विभाग को चपत लगाई है। कन्नौज के ठठिया, तिर्वा व कन्नौज मुख्यालय के निकट दलालों ने यह खेल खेला है। इसी तरह छिबरामऊ में सौरिख, तालग्राम, हसेरन व गुरसहायगंज क्षेत्र में एस्टीमेट के साथ खिलवाड़ कर लाइनें बिछाई गई हैं। जांच को लेकर दलालों व पेटी ठेकेदारों में हड़कंप है। वह नहीं चाहते कि जांच हो।
कनेक्शन धारक को ही दिया जाता सामान
स्टोर के एई विशाल वर्मा का कहना है कि बिजली स्टोर से बीते पांच माह से नियमों में बदलाव कर दिया गया है। अब कनेक्शन धारक के कहने के बाद भी स्टोर से सामान ठेकेदार व दलाल को नहीं दिया जाता है। केवल कनेक्शन धारकों को ही सामान उठाने की इजाजत दी गई है। किसी दलाल या ठेकेदार को सामान देने पर रोक लगा दी गई है। इससे दलाल व ठेकेदार परेशान हैं।
अभी नहीं मिली जानकारी
अधीक्षण अभियंता जीपी यादव का कहना है कि बिजली विभाग को कम पोल का एस्टीमेट थमा कर निजी नलकूप का कनेक्शन लेने के मामले में जानकारी नहीं है। उच्च स्तर से गोपनीय जांच कराई जा रही है तो उसकी रिपोर्ट आने के बाद जो आदेश दिया जाएगा, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।