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जीवन में रखें सतोगुण की प्रधानता
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अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। शहर के सिद्वपीठ माता अन्नपूर्णा मंदिर में चल रही श्रीमद्देवी भागवत कथा में स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने भक्तों को ब्रह्म की कथा सुनाई। संसार के पांच तत्वों के बारे में भक्तों को बताते हुए कहाकि सारा संसार पांच तत्वों से बना है, और इन पांच तत्वों के तीन गुण हैं, सतोगुण, रजोगुण एवं तमोगुण।
स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ कहाकि यही तीन गुण हमारी चेतना की तीन अवस्थाओं- जागृत अवस्था, सुप्ताव्स्था और स्वप्नावस्था से भी संबंधित है। जब सतोगुण की हमारे शरीर और वातावरण में प्रधानता रहती है तो हम प्रफुल्लित, हल्के-फुल्के, अधिक सजग और बोधपूर्ण होते हैं। रजोगुण की प्रधानता में उत्तेजना, विचार, इच्छाएं और वासनाएं बहुत बढ़ जाती है। बहुत कुछ करने की इच्छा होती है। हम या तो बहुत खुश या उदास होते रहते हैं । यह सब रजोगुण के लक्षण हैं। जब तमोगुण प्रधान होता है तो हम सुस्ती, आलस्य और भ्रम के शिकार हो जाते हैं।
कुछ का कुछ अर्थ लगाने लगते हैं। इसी तरह हमारे भोजन में यही तीन गुण विद्यमान रहते हैं और हमारा मन भी इन तीन गुणों से प्रभावित होता है । हमारे कृत्यों में भी इन तीन गुणों की झलक देखने को मिलती है। जब सत्य की हमारे जीवन में प्रधानता होती है तो रजोगुण और तमोगुण गौड़ हो जाते हैं, उनका प्रभाव कम रह जाता है और रजोगुण की अधिकता में सत्व और तमस गौड़ हो जाते हैं व तमोगुण के प्रधान होने पर सत्व और रजस पीछे रह जाते हैं, उनका प्रभाव कम हो जाता है। प्राणायाम, क्रिया, ध्यान और आत्मज्ञान के द्वारा जीवन में सत्य का उदय होता है। अच्छे लोगों की संगति भी हमारे में सत्व को बढ़ाती है। इस मौके पर पं. राधेश्याम, सुख सागर जी, अमरजी, जगदीशजी, व अजय मिश्रा मौजूद रहे।
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जीवन में रखेें सतोगुण की प्रधानता
क्रासर
- शहर के माता अन्नपूर्णा मंदिर में चल रही श्रीदेवी भागवत कथा
फोटो 07केएनजेपी 05- कथा सुनाते स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ।
फोटो 07केएनजेपी 06- माता फूलमती मंदिर प्रांगण में कथा सुनते भक्त।
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कन्नौज। शहर के सिद्वपीठ माता अन्नपूर्णा मंदिर में चल रही श्रीमद्देवी भागवत कथा में स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने भक्तों को ब्रह्म की कथा सुनाई। संसार के पांच तत्वों के बारे में भक्तों को बताते हुए कहाकि सारा संसार पांच तत्वों से बना है, और इन पांच तत्वों के तीन गुण हैं, सतोगुण, रजोगुण एवं तमोगुण।
स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ कहाकि यही तीन गुण हमारी चेतना की तीन अवस्थाओं- जागृत अवस्था, सुप्ताव्स्था और स्वप्नावस्था से भी संबंधित है। जब सतोगुण की हमारे शरीर और वातावरण में प्रधानता रहती है तो हम प्रफुल्लित, हल्के-फुल्के, अधिक सजग और बोधपूर्ण होते हैं। रजोगुण की प्रधानता में उत्तेजना, विचार, इच्छाएं और वासनाएं बहुत बढ़ जाती है। बहुत कुछ करने की इच्छा होती है। हम या तो बहुत खुश या उदास होते रहते हैं । यह सब रजोगुण के लक्षण हैं। जब तमोगुण प्रधान होता है तो हम सुस्ती, आलस्य और भ्रम के शिकार हो जाते हैं।
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कुछ का कुछ अर्थ लगाने लगते हैं। इसी तरह हमारे भोजन में यही तीन गुण विद्यमान रहते हैं और हमारा मन भी इन तीन गुणों से प्रभावित होता है । हमारे कृत्यों में भी इन तीन गुणों की झलक देखने को मिलती है। जब सत्य की हमारे जीवन में प्रधानता होती है तो रजोगुण और तमोगुण गौड़ हो जाते हैं, उनका प्रभाव कम रह जाता है और रजोगुण की अधिकता में सत्व और तमस गौड़ हो जाते हैं व तमोगुण के प्रधान होने पर सत्व और रजस पीछे रह जाते हैं, उनका प्रभाव कम हो जाता है। प्राणायाम, क्रिया, ध्यान और आत्मज्ञान के द्वारा जीवन में सत्य का उदय होता है। अच्छे लोगों की संगति भी हमारे में सत्व को बढ़ाती है। इस मौके पर पं. राधेश्याम, सुख सागर जी, अमरजी, जगदीशजी, व अजय मिश्रा मौजूद रहे।
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जीवन में रखेें सतोगुण की प्रधानता
क्रासर
- शहर के माता अन्नपूर्णा मंदिर में चल रही श्रीदेवी भागवत कथा
फोटो 07केएनजेपी 05- कथा सुनाते स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ।
फोटो 07केएनजेपी 06- माता फूलमती मंदिर प्रांगण में कथा सुनते भक्त।