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Jhansi News: मामा की हत्या के आरोप में भांजा दोषमुक्त
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झांसी। जिला कारागार में बंद राजेंद्र ढीमर को अपने मामा भैय्यालाल की हत्या के आरोपों से बरी कर दिया गया है। एडीजे आदित्य चतुर्वेदी की अदालत ने अभियोजन पक्ष के पर्याप्त साक्ष्य और गवाह न पेश कर पाने के कारण यह फैसला सुनाया। राजेंद्र को लीगल ऐड डिफेंस कौंसिल सिस्टम (एलएडीसीएस) योजना के तहत विधिक सहायता मिली थी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर चीफ डिफेंस काउंसिल प्रतीक समाधिया और उनकी टीम ने राजेंद्र की पैरवी की। लालाराम ने 29 अप्रैल, 2022 को थाना लहचूरा में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। लालाराम ने 28 अप्रैल, 2022 को अपने पिता भैय्यालाल का शव ग्राम बरुआमाफ में चारपाई पर मिलने की जानकारी दी थी। उसे चतुर्भुज, उदयचंद और राजेंद्र पर हत्या का शक था। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर राजेंद्र को गिरफ्तार किया था। विवेचक ने केवल राजेंद्र के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। न्यायालय ने साक्ष्य और विवेचना में कई कमियां पाइन।
साक्ष्य और विवेचना की कमियां
पुलिस ने मृतक भैय्यालाल का नीले रंग का मोबाइल फोन बरामद होने का दावा किया था। न्यायालय में यह मोबाइल भूरे रंग का पाया गया और उसमें सिम कार्ड नहीं था। हत्या में प्रयुक्त बताई गई नाव की पतवार और बबूल के डंडे में रक्त नहीं मिला। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट से भी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला। विवेचक ने स्वीकार किया कि गिरफ्तारी और बरामदगी के लिए आम जनता का कोई गवाह नहीं मिला।
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प्रत्यक्षदर्शी और रंजिश का अभाव
विवेचक ने यह भी स्वीकार किया कि विवेचना में कोई प्रत्यक्षदर्शी साक्षी नहीं मिला। किसी ने भी घटना वाले दिन अभियुक्त और मृतक को साथ आते-जाते नहीं देखा था। मृतक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु से पहले शराब पीने की पुष्टि नहीं हो सकी। न्यायालय ने बल दिया कि मृतक और अभियुक्त सगे मामा-भांजे हैं। अभियोजन पक्ष राजेंद्र की उसके मामा से किसी रंजिश का सबूत पेश नहीं कर सका।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर चीफ डिफेंस काउंसिल प्रतीक समाधिया और उनकी टीम ने राजेंद्र की पैरवी की। लालाराम ने 29 अप्रैल, 2022 को थाना लहचूरा में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। लालाराम ने 28 अप्रैल, 2022 को अपने पिता भैय्यालाल का शव ग्राम बरुआमाफ में चारपाई पर मिलने की जानकारी दी थी। उसे चतुर्भुज, उदयचंद और राजेंद्र पर हत्या का शक था। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर राजेंद्र को गिरफ्तार किया था। विवेचक ने केवल राजेंद्र के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। न्यायालय ने साक्ष्य और विवेचना में कई कमियां पाइन।
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साक्ष्य और विवेचना की कमियां
पुलिस ने मृतक भैय्यालाल का नीले रंग का मोबाइल फोन बरामद होने का दावा किया था। न्यायालय में यह मोबाइल भूरे रंग का पाया गया और उसमें सिम कार्ड नहीं था। हत्या में प्रयुक्त बताई गई नाव की पतवार और बबूल के डंडे में रक्त नहीं मिला। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट से भी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला। विवेचक ने स्वीकार किया कि गिरफ्तारी और बरामदगी के लिए आम जनता का कोई गवाह नहीं मिला।
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प्रत्यक्षदर्शी और रंजिश का अभाव
विवेचक ने यह भी स्वीकार किया कि विवेचना में कोई प्रत्यक्षदर्शी साक्षी नहीं मिला। किसी ने भी घटना वाले दिन अभियुक्त और मृतक को साथ आते-जाते नहीं देखा था। मृतक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु से पहले शराब पीने की पुष्टि नहीं हो सकी। न्यायालय ने बल दिया कि मृतक और अभियुक्त सगे मामा-भांजे हैं। अभियोजन पक्ष राजेंद्र की उसके मामा से किसी रंजिश का सबूत पेश नहीं कर सका।