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Jhansi News: गोवंश संरक्षण पर रोज 23 लाख खर्च, फिर भी हाईवे पर भटक रहे

Fri, 02 Oct 2026 01:22 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 01:22 AM IST
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23 lakh spent daily on cattle protection, yet they still wander on highways.
झांसी। गोवंश संरक्षण के नाम पर जिले में रोज करीब 23 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद ग्वालियर-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग-44 समेत प्रमुख सड़कों पर गोवंश खुले में विचरण करते दिखाई दे रहे हैं। सड़क पर बैठे और घूमते गोवंश तेज रफ्तार वाहनों के लिए खतरा बने हुए हैं। वर्तमान में जिले की 276 गोशालाओं में 46 हजार से अधिक गोवंश हैं। प्रत्येक गोवंश के लिए प्रतिदिन 50 रुपये की व्यवस्था है, इसके बावजूद पशु सड़कों पर विचर रहे हैं।
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राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर दिखते हैं कई गोवंश
जनपद में संचालित गोशालाओं में गोवंश के चारा-पानी, उपचार और संरक्षण के लिए शासन स्तर से प्रति गोवंश प्रतिदिन 50 रुपये दिए जाने का प्रावधान है। 46 हजार से अधिक गोवंश की क्षमता के हिसाब से यह राशि प्रतिदिन करीब 23 लाख रुपये बैठती है। गोशालाओं का उद्देश्य गोवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें सड़कों पर भटकने से रोकना भी है। इसके बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग पर गोवंश के खुले में विचरण की तस्वीरें व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। खासकर अंबाबाय क्षेत्र से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर कई बार गोवंश सड़क पर नजर आते हैं।
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हाईवे पर गोवंश, वाहन चालकों के लिए खतरा
ग्वालियर-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सड़क पर अचानक गोवंश के आ जाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। रात के समय यह जोखिम और अधिक रहता है। गोवंश के सड़क पर पहुंचने से खुद उनके जीवन के साथ वाहन चालकों और यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
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अंबाबाय में गोशाला नहीं है। अंबाबाय क्षेत्र के साथ मध्यप्रदेश की ओर से भी कई बार गोवंश यहां आ जाता है। कई बार पशुओं को रुंद्र करारी गांव की गोशाला में भेजा गया है। गोवंश को सड़क पर आने से रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. प्रमोद शिवहरे, पशु चिकित्सा अधिकारी, भरारी फार्म
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