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ट्रेनों में अपनी सुरक्षा का रखें ध्यान... दिवाली पर कहीं हो न जाए नुकसान

Fri, 07 Oct 2022 12:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 07 Oct 2022 12:30 AM IST
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Yatrigar please care take your things
झांसी। इन दिनों त्योहारी सीजन में रेलवे स्टेशन एवं ट्रेनों में भीड़ लगातार बढ़ रही है लेकिन, यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम फेल हैं। पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों के न होने से बड़ी संख्या मेें ट्रेन बिना सुरक्षा दस्ते के ही दौड़ रही हैं। स्टेशन के भीतर भी तमाम जगहों पर जीआरपी कर्मियों की तैनाती नहीं है। लिहाजा अगर त्योहार मनाने के लिए ट्रेन से सफर कर रहे हैं तो अपनी सुरक्षा का स्वयं ध्यान रखें।
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दक्षिण एवं उत्तर भारत का गेटवे होने के नाते झांसी से बड़ी संख्या में यात्री गुजरते हैं। मगर पुलिसकर्मियों की कमी से इनकी सुरक्षा भगवान भरोसे है। झांसी मंडल से रोजाना 110 से अधिक सवारी गाड़ियां निकलती हैं। इनमें 48 ट्रेनों की सुरक्षा जिम्मेदारी झांसी अनुभाग जीआरपी की है। यहां झांसी, उरई, भीमसेन, ललितपुर, बांदा, महोबा एवं मानिकपुर थानों से सुरक्षा दस्ते ट्रेनों में जाने थे। लेकिन सिर्फ 32 ट्रेनों में ही यह दस्ता चलता है। बाकी ट्रेनों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
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खास तौर से झांसी से दिल्ली, भोपाल, लखनऊ, मुंबई, अहमदाबाद रूट की कई ट्रेनों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। यही हाल आरपीएफ का है। आरपीएफ पर 30 ट्रेनों में सुरक्षा की जिम्मेदारी है लेकिन, स्टाफ की कमी के चलते इन गाड़ियों में दस्ता नियमित तैनात नहीं रहता जबकि त्योहारी सीजन शुरू होते ही जहर खुरानी समेत लूट एवं अवैध वसूली की घटनाएं बढ़ जाती हैं। चेन पुलिंग की घटना में भी इजाफा हुआ है। वहीं, जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है स्टेशन में सुरक्षा के लिए आधुनिक इंतजाम किए जा रहे हैं। लंबी दूरी की गाड़ियों में सुरक्षा के निश्चित इंतजाम किए जाते हैं।
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इन गाड़ियों में ही सुरक्षा के इंतजाम
अभी बुंदेलखंड एक्सप्रेस अप एंड डाउन, पुष्पक एक्सप्रेस, झांसी-आगरा पैंसेजर, झांसी-लखनऊ पैंसेजर, साबरमती एक्सप्रेस, सदर्न एक्सप्रेस, तुलसी एक्सप्रेस, लखनऊ-चेन्नई एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस, लखनऊ एक्सप्रेस।

450 से अधिक जवानों की जरूरत
जीआरपी अधिकारियों का कहना है कि एक सुरक्षा दस्ते में कम से कम एक हवलदार समेत तीन जवान शामिल रहते हैं। इसके अलावा वीआईपी मूवमेंट, बस चेकिंग एवं अन्य बंदोबस्त ड्यूटी लगती हैं। सभी गाड़ियों के लिए 450 जवानों की आवश्यकता होगी।
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