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क्या इस बार समय पर हो सकेंगे निकाय चुनाव ?
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Apr 2017 12:31 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : demo
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नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। लेकिन, इस बार भी चुनाव समय पर हो पाएंगे, इस पर संशय बरकरार है। दरअसल, पिछले वर्षों के चुनावों पर नजर डालें तो यह संशय गहरा जाता है। 1973 के बाद ये चुनाव कभी समय पर नहीं हो सके। यह क्रम पिछली बार तक चला है। वहीं, जानकारों के मुताबिक प्रदेश की नई सरकार अभी निकाय चुनावों के लिए होमवर्क पूरा करने में जुटी है, इसलिए भी यह चुनाव देर से होने की संभावना बढ़ गई है।
नगर निगम का कार्यकाल 20 जुलाई को पूरा हो रहा है। निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों का डॉटा आनलाइन अपडेट किया जा रहा है। जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा डाटा 21 अप्रैल तक साफ्टवेयर में फीड करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि चुनाव निर्धारित समय पर होंगे, लेकिन 1973 से लेकर अब तक जो स्थिति है, उस हिसाब से तो निकाय चुनाव कभी समय पर नहीं हुए हैं। जानकारों के मुताबिक प्रदेश में नई सरकार ने हाल ही में शपथ ली है, इसलिए सरकार पहले चुनावी होमवर्क पूरा करेगी, इसके बाद ही चुनाव की घोषणा करेगी।
1973 के बाद से हुए निकाय चुनावों पर नजर डालें तो 73 के बाद 1989 में नगर निकाय चुनाव हुए थे। कार्यकाल 1994 में पूरा हुआ था, लेकिन चुनाव 1995 में हुए। इसी तरह 2005 में चुनाव होने थे, लेकिन 2006 में हुए। कार्यकाल 2011 में पूरा हो गया था, परंतु चुनाव 2012 में हो सके थे। सूत्रों के अनुसार एक बार फिर वार्डों के परिसीमन को लेकर समय पर चुनाव होने का संशय मंडरा रहा है। हालांकि, इस बात की कोई अधिकृत पुष्टि नहीं कर रहा है।
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चुनाव की तिथि खिसकी तो बढ़ेगा कार्यकाल
हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि निकाय की कार्यकारिणी भंग नहीं होगी, बल्कि पुराने महापौर ही नवनिर्वाचित महापौर को चार्ज देंगे। यदि चुनाव की तिथि आगे खिसकी तो महापौर का कार्यकाल बढ़ने की संभावना है।
पानी सप्लाई की बात नगर आयुक्त तक
वार्ड नंबर 29 पिछोर में पार्षद पद के दावेदार जनता में मुफ्त पानी सप्लाई करने की होड़ में लगे हैं। वहीं, गुमनावारा में भी यही स्थिति है। यह मुद्दा नगर आयुक्त अरुण प्रकाश तक पहुंच गया है। एक व्यक्ति ने कहा कि वह क्षेत्रवासियों को टैंकर के माध्यम से निशुल्क पानी की सप्लाई कर रहा है, लेकिन विपक्षी इसमें बाधा बन रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट से अनुमति ले ली है। आप भी अनुमति दे दीजिए, लेकिन उन्होंने कह दिया कि नियमानुसार उन्हें अनुमति देने का अधिकार नहीं है। आप भूगर्भ जल विभाग जाइए। उधर, क्षेत्रीय लोग मना रहे हैं कि चुनाव गर्मियों में न हों। कम से कम इसी बहाने पार्षद पद के प्रत्याशी समाजसेवा तो करते रहेंगे और क्षेत्रवासियों को पानी की किल्लत नहीं झेलनी पड़ेगी।
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नगर निगम का कार्यकाल 20 जुलाई को पूरा हो रहा है। निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों का डॉटा आनलाइन अपडेट किया जा रहा है। जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा डाटा 21 अप्रैल तक साफ्टवेयर में फीड करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि चुनाव निर्धारित समय पर होंगे, लेकिन 1973 से लेकर अब तक जो स्थिति है, उस हिसाब से तो निकाय चुनाव कभी समय पर नहीं हुए हैं। जानकारों के मुताबिक प्रदेश में नई सरकार ने हाल ही में शपथ ली है, इसलिए सरकार पहले चुनावी होमवर्क पूरा करेगी, इसके बाद ही चुनाव की घोषणा करेगी।
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1973 के बाद से हुए निकाय चुनावों पर नजर डालें तो 73 के बाद 1989 में नगर निकाय चुनाव हुए थे। कार्यकाल 1994 में पूरा हुआ था, लेकिन चुनाव 1995 में हुए। इसी तरह 2005 में चुनाव होने थे, लेकिन 2006 में हुए। कार्यकाल 2011 में पूरा हो गया था, परंतु चुनाव 2012 में हो सके थे। सूत्रों के अनुसार एक बार फिर वार्डों के परिसीमन को लेकर समय पर चुनाव होने का संशय मंडरा रहा है। हालांकि, इस बात की कोई अधिकृत पुष्टि नहीं कर रहा है।
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चुनाव की तिथि खिसकी तो बढ़ेगा कार्यकाल
हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि निकाय की कार्यकारिणी भंग नहीं होगी, बल्कि पुराने महापौर ही नवनिर्वाचित महापौर को चार्ज देंगे। यदि चुनाव की तिथि आगे खिसकी तो महापौर का कार्यकाल बढ़ने की संभावना है।
पानी सप्लाई की बात नगर आयुक्त तक
वार्ड नंबर 29 पिछोर में पार्षद पद के दावेदार जनता में मुफ्त पानी सप्लाई करने की होड़ में लगे हैं। वहीं, गुमनावारा में भी यही स्थिति है। यह मुद्दा नगर आयुक्त अरुण प्रकाश तक पहुंच गया है। एक व्यक्ति ने कहा कि वह क्षेत्रवासियों को टैंकर के माध्यम से निशुल्क पानी की सप्लाई कर रहा है, लेकिन विपक्षी इसमें बाधा बन रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट से अनुमति ले ली है। आप भी अनुमति दे दीजिए, लेकिन उन्होंने कह दिया कि नियमानुसार उन्हें अनुमति देने का अधिकार नहीं है। आप भूगर्भ जल विभाग जाइए। उधर, क्षेत्रीय लोग मना रहे हैं कि चुनाव गर्मियों में न हों। कम से कम इसी बहाने पार्षद पद के प्रत्याशी समाजसेवा तो करते रहेंगे और क्षेत्रवासियों को पानी की किल्लत नहीं झेलनी पड़ेगी।