{"_id":"26b1c8e0a6647771da42ad4a6579ebb7","slug":"wet-coal-in-power-generation-hurdle-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली उत्पादन में बाधा बन रहा गीला कोयला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजली उत्पादन में बाधा बन रहा गीला कोयला
झांसी / ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2015 12:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पारीछा थर्मल पावर प्लांट में बारिश से कोयला गीला होने के कारण उत्पादन पूरी क्षमता के साथ नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं मालगाड़ी से कोयला अगर समय पर नहीं पहुंचा तो पारीछा थर्मल पावर की उत्पादन इकाइयों पर ब्रेक लग सकता है। हालांकि अभी छह में से पांच इकाइयों से उत्पादन जारी है।
पारीछा थर्मल पावर में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयों से कुल 1140 मेगावाट की लगी हुई हैं। इनमें से नंबर दो इकाई पिछले सवा साल से आग लगने के कारण बंद चल रही हैं। इस इकाई को शुरू करने के लिए मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर जारी है। जबकि बाकी पांच इकाइयां सुचारू रूप से काम कर रही हैं। वर्तमान में पांचों इकाइयों से बिजली बनाने के लिए 24 घंटे में 16 हजार टन कोयले की आवश्यकता पड़ रही है। इस हिसाब से मालगाड़ी के चार रैक कोयले की प्रतिदिन आवश्यकता पड़ती है। पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश से प्लांट में रखा कोयला गीला हो गया है। इससे पूर्ण क्षमता के साथ सभी चालू इकाईयों में क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं हो पा रहा है। वहीं, बरसात के कारण रैकों के समय से आने व उतरने में लगने वाली देरी के कारण कोयला संकट की स्थिति बनती जा रही है। हालांकि, अभी ऐसी स्थिति नहीं है कि इससे किसी इकाई का उत्पादन रोकना पड़े। सूत्रों की मानें तो कोयले की रैक आने में अगर कोई परेशानी आती है तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।
विज्ञापन
पारीछा थर्मल पावर में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयों से कुल 1140 मेगावाट की लगी हुई हैं। इनमें से नंबर दो इकाई पिछले सवा साल से आग लगने के कारण बंद चल रही हैं। इस इकाई को शुरू करने के लिए मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर जारी है। जबकि बाकी पांच इकाइयां सुचारू रूप से काम कर रही हैं। वर्तमान में पांचों इकाइयों से बिजली बनाने के लिए 24 घंटे में 16 हजार टन कोयले की आवश्यकता पड़ रही है। इस हिसाब से मालगाड़ी के चार रैक कोयले की प्रतिदिन आवश्यकता पड़ती है। पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश से प्लांट में रखा कोयला गीला हो गया है। इससे पूर्ण क्षमता के साथ सभी चालू इकाईयों में क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं हो पा रहा है। वहीं, बरसात के कारण रैकों के समय से आने व उतरने में लगने वाली देरी के कारण कोयला संकट की स्थिति बनती जा रही है। हालांकि, अभी ऐसी स्थिति नहीं है कि इससे किसी इकाई का उत्पादन रोकना पड़े। सूत्रों की मानें तो कोयले की रैक आने में अगर कोई परेशानी आती है तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।
विज्ञापन