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Jhansi News: कचरा प्रबंधन की योजना अधूरी, बंद पड़े हैं आरआरसी
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन और खाद बनाने की योजना धरी रह गई है। आठों ब्लॉकों में बने 10 से 15 फीसदी एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (आरआरसी) या तो बंद पड़े हैं या खुद कूड़े के ढेर में तब्दील हो गए हैं।
आठ ब्लाकों में 496 ग्राम पंचायत हैं। शासन ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत सभी ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कराने का आदेश जारी किया था। चार श्रेणियों में आरआरसी का निर्माण होना था। 5000 से ऊपर की आबादी वाले गांव में लगभग 14 लाख, तीन से पांच हजार की आबादी में साढ़े नौ लाख और दो से तीन हजार की आबादी वाले गांव में पांच लाख और 2000 से नीचे की आबादी वाले गांव में दो से तीन लाख में निर्माण कराना था।
जिला पंचायत राज विभाग ने 28 से 30 करोड़ रुपये खर्च कर 450 से अधिक ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कराया। इसका उद्देश्य घर-घर से कचरा एकत्र कर उसे अलग करना और प्लास्टिक निकालकर शेष कचरे से खाद तैयार करना था। दो वर्ष पहले शुरू की गई इस योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में आरआरसी और सामुदायिक कचरा पात्रों का निर्माण किया गया। मऊरानीपुर विकास खंड के ढिमलौनी ग्राम पंचायत स्थित आरआरसी खुद कचरे में तब्दील हो गया है। बुखारा, धैलरा, पोटरा और रौनी में भी यही हाल है। अमर उजाला की पड़ताल में ब्लॉक के लगभग सभी गांव में आरआरसी कूड़े में तब्दील मिला। इसके अलावा विकास खंड चिरगांव के ग्राम पंचायत चिरगांव देहात, इथेरा और राम नगर का भी यही हाल है।
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इंसेट
दूसरे गांव से किया लिंक :
विकास खंड बबीना के कुछ गांव बीडा में आने के कारण विभाग को जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इस कारण दर्जन भर से अधिक ग्राम पंचायतों में आरआरसी नहीं बन सके। ऐसे में पंचायत राज विभाग ने यहां के गांवों को पास के ग्राम पंचायतों से लिंक कर दिया है। इसका मकसद उन गांव का कूड़ा अब उठकर पास के आरआरसी को जाएगा।
वर्जन
ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कराया गया है। गांव में निकलने वाले कूड़े को सफाई कर्मियों द्वारा यहां पर डाला जाता है। कचरे की कटाई- छंटाई के बाद खाद बनाई जाती है। अगर कहीं आरआरसी बंद या कार्य नहीं कर रहा है तो उसे संचालित कराया जाएगा।-डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव, डीपीआरओ
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झांसी। ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन और खाद बनाने की योजना धरी रह गई है। आठों ब्लॉकों में बने 10 से 15 फीसदी एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (आरआरसी) या तो बंद पड़े हैं या खुद कूड़े के ढेर में तब्दील हो गए हैं।
आठ ब्लाकों में 496 ग्राम पंचायत हैं। शासन ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत सभी ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कराने का आदेश जारी किया था। चार श्रेणियों में आरआरसी का निर्माण होना था। 5000 से ऊपर की आबादी वाले गांव में लगभग 14 लाख, तीन से पांच हजार की आबादी में साढ़े नौ लाख और दो से तीन हजार की आबादी वाले गांव में पांच लाख और 2000 से नीचे की आबादी वाले गांव में दो से तीन लाख में निर्माण कराना था।
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जिला पंचायत राज विभाग ने 28 से 30 करोड़ रुपये खर्च कर 450 से अधिक ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कराया। इसका उद्देश्य घर-घर से कचरा एकत्र कर उसे अलग करना और प्लास्टिक निकालकर शेष कचरे से खाद तैयार करना था। दो वर्ष पहले शुरू की गई इस योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में आरआरसी और सामुदायिक कचरा पात्रों का निर्माण किया गया। मऊरानीपुर विकास खंड के ढिमलौनी ग्राम पंचायत स्थित आरआरसी खुद कचरे में तब्दील हो गया है। बुखारा, धैलरा, पोटरा और रौनी में भी यही हाल है। अमर उजाला की पड़ताल में ब्लॉक के लगभग सभी गांव में आरआरसी कूड़े में तब्दील मिला। इसके अलावा विकास खंड चिरगांव के ग्राम पंचायत चिरगांव देहात, इथेरा और राम नगर का भी यही हाल है।
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दूसरे गांव से किया लिंक :
विकास खंड बबीना के कुछ गांव बीडा में आने के कारण विभाग को जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इस कारण दर्जन भर से अधिक ग्राम पंचायतों में आरआरसी नहीं बन सके। ऐसे में पंचायत राज विभाग ने यहां के गांवों को पास के ग्राम पंचायतों से लिंक कर दिया है। इसका मकसद उन गांव का कूड़ा अब उठकर पास के आरआरसी को जाएगा।
वर्जन
ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कराया गया है। गांव में निकलने वाले कूड़े को सफाई कर्मियों द्वारा यहां पर डाला जाता है। कचरे की कटाई- छंटाई के बाद खाद बनाई जाती है। अगर कहीं आरआरसी बंद या कार्य नहीं कर रहा है तो उसे संचालित कराया जाएगा।-डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव, डीपीआरओ