रेलवे कर्मचारियों पर बढ़ रहा काम का बोझ, मांग रहे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति
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रेलवे के अंतर्गत परिचालन (गार्ड, ड्राइवर आदि), वाणिज्य, इंजीनियरिंग, कैरिज एंड वैगन, लेखा, इलेक्ट्रिक, संरक्षा, दूरसंचार, कार्मिक समेत तेरह विभाग आते हैं। इसमें परिचालन व वाणिज्य विभाग की नौकरी सबसे अधिक संवेदनशील है। छोटी सी गलती पर बड़ा दंड भुगतना पड़ता है। वर्तमान में रेल मंडल में 16 हजार व वर्कशाप में साढ़े चार हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। मंडल में तीन हजार और कारखाने में एक हजार कर्मचारियों की कमी चल रही है।
रेलवे के विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की लगातार हो रही कमी के कारण अन्य कर्मियों पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है। कई जगह अफसरों के उत्पीड़न से भी कर्मचारी परेशान हैं। इस कारण 2016 में सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले एक सौ अधिक कर्मचारियों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया। इनमें अधिकांश कर्मचारियों की उम्र 50 साल से अधिक है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि वीआरएस लेना कर्मचारी का अधिकार है। जांच के बाद कर्मचारियों को वीआरएस प्रदान कर दिया जाता है।
20 साल की नौकरी होना जरूरी
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए कर्मचारी या अधिकारी की नौकरी का कार्यकाल कम से कम 20 साल का पूरा होना चाहिए। कोई विजिलेंस या शिकायत की जांच नहीं चल रही हो। ब्रांच अफसर के संस्तुति पर वीआरएस प्रदान कर दिया जाता है।
कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। नई भर्ती हो नहीं रही है। छोटी- छोटी गलतियों पर चार्जशीट थमा दी जाती है। मजबूरी में कर्मचारी वीआरएस ले रहे हैं।
आरएन यादव, मंडल सचिव नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन।
रेल मंडल में तीन हजार कर्मचारियों की कमी चल रही है। इसलिए काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। प्रशासन इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है।
व्ही जी गौतम, मंडल सचिव, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ।