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पेपर लीक के बाद सवालों के घेरे में विश्वविद्यालय प्रशासन
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झांसी। पेपर लीक मामले में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है। परीक्षा कराने से पहले सभी परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ ही उनकी निगरानी की केंद्रीयकृत व्यवस्था तैयार किया जाना था लेकिन, पेपर लीक होने के बाद पुलिस ने जब जांच शुरू की तब मालूम चलाकि इनकी निगरानी की कोई केंद्रीय व्यवस्था अमल में ही नहीं लाई जा रही थी। विश्वविद्यालय प्रशासन की इसी लापरवाही का फायदा इससे जुड़े महाविद्यालय के लोग आसानी से उठा रहे थे और विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। अपनी खामी छुपाने को विश्वविद्यालय प्रशासन शुरूआत में पेपर लीक मामला दबाने की कोशिश करता रहा लेकिन, जब मामला उजागर हुआ तब जाकर उसे परीक्षा निरस्त करने को मजबूर होना पड़ा। विश्वविद्यालय के अंदर परीक्षा के दौरान बाहरी व्यक्तियों के इलेक्ट्रानिक डिवाइस के साथ प्रवेश प्रतिबंधित है लेकिन, परीक्षा के दौरान विश्वविद्यालय परिसर के भीतर ही इलेक्ट्रानिक डिवाइस का बाहरी लोग इस्तेमाल धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था। इस सबको देखते हुए परीक्षा आयोजित करने में विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही भी उजागर हुई है।
बंद था सीसीटीवी कैमरा
जांच-पड़ताल के दौरान मालूम चला कि श्रीराम महाविद्यालय में जिस समय पेपर लीक किया गया, उस समय सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे हालांकि यह साफ नहीं हुआ कि उस समय इन कैमरों को जानबूझकर बंद कर दिया गया अथवा यह पहले से बंद थे। सीसीटीवी बंद होने के बावजूद महाविद्यालय प्रशासन से विश्वविद्यालय की ओर से भी कोई पूछताछ नहीं हुई। पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है।
शुचिता भंग करने वालों के खिलाफ होगी कठोर कार्रवाई: जिलाधिकारी
पुलिस लाइन सभागार में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने परीक्षाओं की शुचिता भंग करने वालों के खिलाफ प्रत्येक दशा में कठोर कार्रवाई करने की बात कही है। कहा, प्रशासन की निगरानी में हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाएं बिना किसी व्यवधान के पूरी कराई जा रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी आंतरिक परीक्षाओं की निगरानी कर रहा था। पेपर लीक मामला उजागर होने के बाद पुलिस-प्रशासन ने तत्काल कदम उठाया और 48 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर दिया।
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प्रबंधक समेत सभी छह आरोपी भेजे गए जेल, निजी मुचलके पर छूटे सभी 26 छात्र-छात्राएं
महाविद्यालय प्रबंधक चंद्रपाल सिंह यादव (40) पुत्र रमेश यादव निवासी बूढ़ा बालाजी रोड, मुख्य आरोपी लिपिक राजदीप यादव पुत्र बलवान सिंह निवासी सुभाषगंज, शिक्षक अनूप यादव पुत्र गजराज सिंह निवासी बम्होरी, शिक्षक संजीव कुशवाहा पुत्र बालकृष्ण निवासी उल्दन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भगवानदास पुत्र श्यामसुंदर निवासी बंगरा, कोषाध्यक्ष आजाद पुत्र रामसेवक यादव निवासी हंसारी को लिखा-पढ़ी के बाद जेल भेज दिया गया जबकि पकड़े गए सभी 26 छात्रों को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। बता दें, आरोपियों के खिलाफ नवाबाद थाने में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के नवीन परीक्षा के केंद्राध्यक्ष प्रो. सुनील प्रजापति की तहरीर पर सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम एवं 66 डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
पकड़े गए आरोपियों में पूर्व शिक्षण सहायक का बेटा भी शामिल
पेपर लीक मामले में पकड़े गए छह आरोपियों में एक आरोपी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के एक शिक्षण सहायक का बेटा भी है। इसके अलावा श्रीराम महाविद्यालय के प्रबंध समिति का अध्यक्ष अरविंद यादव बीयू में कार्यरत शिक्षक का भाई बताया जा रहा है।
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बंद था सीसीटीवी कैमरा
जांच-पड़ताल के दौरान मालूम चला कि श्रीराम महाविद्यालय में जिस समय पेपर लीक किया गया, उस समय सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे हालांकि यह साफ नहीं हुआ कि उस समय इन कैमरों को जानबूझकर बंद कर दिया गया अथवा यह पहले से बंद थे। सीसीटीवी बंद होने के बावजूद महाविद्यालय प्रशासन से विश्वविद्यालय की ओर से भी कोई पूछताछ नहीं हुई। पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है।
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शुचिता भंग करने वालों के खिलाफ होगी कठोर कार्रवाई: जिलाधिकारी
पुलिस लाइन सभागार में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने परीक्षाओं की शुचिता भंग करने वालों के खिलाफ प्रत्येक दशा में कठोर कार्रवाई करने की बात कही है। कहा, प्रशासन की निगरानी में हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाएं बिना किसी व्यवधान के पूरी कराई जा रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी आंतरिक परीक्षाओं की निगरानी कर रहा था। पेपर लीक मामला उजागर होने के बाद पुलिस-प्रशासन ने तत्काल कदम उठाया और 48 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर दिया।
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प्रबंधक समेत सभी छह आरोपी भेजे गए जेल, निजी मुचलके पर छूटे सभी 26 छात्र-छात्राएं
महाविद्यालय प्रबंधक चंद्रपाल सिंह यादव (40) पुत्र रमेश यादव निवासी बूढ़ा बालाजी रोड, मुख्य आरोपी लिपिक राजदीप यादव पुत्र बलवान सिंह निवासी सुभाषगंज, शिक्षक अनूप यादव पुत्र गजराज सिंह निवासी बम्होरी, शिक्षक संजीव कुशवाहा पुत्र बालकृष्ण निवासी उल्दन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भगवानदास पुत्र श्यामसुंदर निवासी बंगरा, कोषाध्यक्ष आजाद पुत्र रामसेवक यादव निवासी हंसारी को लिखा-पढ़ी के बाद जेल भेज दिया गया जबकि पकड़े गए सभी 26 छात्रों को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। बता दें, आरोपियों के खिलाफ नवाबाद थाने में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के नवीन परीक्षा के केंद्राध्यक्ष प्रो. सुनील प्रजापति की तहरीर पर सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम एवं 66 डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
पकड़े गए आरोपियों में पूर्व शिक्षण सहायक का बेटा भी शामिल
पेपर लीक मामले में पकड़े गए छह आरोपियों में एक आरोपी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के एक शिक्षण सहायक का बेटा भी है। इसके अलावा श्रीराम महाविद्यालय के प्रबंध समिति का अध्यक्ष अरविंद यादव बीयू में कार्यरत शिक्षक का भाई बताया जा रहा है।