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‘उज्जवल’ बदलेगा किसानों की किस्मत

Fri, 18 Oct 2019 01:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 18 Oct 2019 01:42 AM IST
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बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदलेगा ‘उज्ज्वल’
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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने काबुली चना का उन्नत बीज ‘उज्ज्वल’ तैयार किया है। यह बीज बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदल सकता है। इसकी बुवाई करने से किसान प्रति हेक्टेयर 18 से बीस क्विंटल उपज प्राप्त कर सकते हैं। यह सामान्य बीजों से 10 से पंद्रह प्रतिशत अधिक है। फसल भी 130 दिन में तैयार हो जाती है। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने देसी चना (आरवीजी-202, जेजी-14, जेएकेआई-9218) की तीन किस्में भी तैयार की हैं।
रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय किसानों के सहयोग से प्रयोगशाला में अलग-अलग फसलों की नई-नई उन्नत किस्में के बीज तैयार कर रहा है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने उज्ज्वल नाम से काबुली चना का एक बीज तैयार किया है। कुलपति प्रो. अरविंद कुमार ने बताया कि इस बीज की बुवाई करने से उख्टा रोग नहीं होता है। प्रति हेक्टेयर 18 से 20 क्विंटल उपज होती है, जबकि अन्य बीजों की बुवाई करने से प्रति हेक्टेयर 15 से 16 क्विंटल ही उपज प्राप्त होती है।
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उन्होंने बताया कि मौजूदा समय चना की बुवाई के लिए उपयुक्त है। किसान नमी का उपयोग कर बुवाई कर सकते हैं। ‘उज्ज्वल’ बीज विश्वविद्यालय से प्राप्त किया जा सकता है।
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क्या है काबुली
चने की एक किस्म को काबुली चना या प्रचलित भाषा में छोले भी कहा जाता है। यह अफगानिस्तान, दक्षिण यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और चिली में पाए जाते रहे हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में यह चना अठारहवीं शताब्दी में लाए गए। इसके बाद इनका यहां प्रयोग हो रहा है।

अन्य फसलों के बीज भी उपलब्ध
कृषि विश्वविद्यालय में अन्य फसलों के बीज भी उपलब्ध हैं। सरसों की तीन प्रजातियां डीआरएमआर आईजे 31, एनआरसीएचबी 101, आरएच 406, मटर की दो प्रजातियां आईपीएफडी 10-12 (हरी मटर) अमन (सफेद मटर), मसूर की आईपीएल 316, गेहूं की एचआई 1544, एचआई 1605 नाम से प्रमाणित प्रजातियां उपलब्ध हैं। पहले आएं, पहले पाएं की तर्ज पर क्षेत्र के किसान किसी भी कार्य दिवस में विश्वविद्यालय परिसर से बीजों को प्राप्त कर सकते हैं। इन फसलों को उगाने की उन्नत तकनीक की नवीनतम जानकारी विश्वविद्यालय से नि:शुल्क प्राप्त की जा सकती है।
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