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घर-घर आज विराजेंगे गौरी पुत्र गणेश
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झांसी। महानगर में भादो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी शनिवार को घर-घर गौरी पुत्र गणेश की मोहक प्रतिमाएं विराजमान की जाएंगी। कोरोना वायरस से बचाव के कारण इस बार सार्वजनिक गणेश पंडाल नहीं सजाए जाएंगे। भक्त अपने घरों में सुख समृद्धि के देवता भगवान गणेश की विधिवत पूजा करेंगे और परिवार के साथ आकर्षक झांकियां भी सजाई जाएंगी। भगवान गणेश की प्रतिमाएं जलझूलनी एकादशी तथा अनंत चतुर्दशी तक विराजमान रहेंगी
सनातन धर्म में गौरी पुत्र गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गजानन की पूजा करने से सभी प्रकार की समस्याएं मिट जाती हैं। गणेश पूजन के लिए आज शुक्रवार को घरों में खूब चहल-पहल रही। बाल भक्तों में खासा उत्साह नजर आया। कई घरों में भगवान गणेश को विराजमान करने के लिए तैयारियां जोरों पर दिखीं। पूजा स्थलों को संवारा गया। शनिवार को श्रद्धालु वैदिक रीति से भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजमान कर पूजा-अर्चना करेंगे। ज्योतिषविद पंडित नाथूराम पांडे के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में सिंह लग्न में अथवा सुबह 10.30 बजे के बाद तुला लग्न में विराजमान कर प्राण प्रतिष्ठा करें। यह शुभ समय रहेगा।
भगवान की पूजा में दूर्वा अवश्य अर्पण करें। आचार्य शांतनु पांडे के अनुसार गणेश पूजा कलश स्थापित करें और अखंड दीप जलाएं। वहीं, धार्मिक मान्यता है कि गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन नहीं किया जाता है। इधर, महाराष्ट्र समाज के गणेश मंदिर में भगवान की पूजा सुबह 11.00 बजे से शुरू होगी। गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर ने बताया कि अथर्वशीर्ष का पाठ होगा। कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होगा। इधर, बड़ा बाजार के गणेश मढ़िया मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा पूजा की जाएगी।
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श्रद्धालुओं का मन मोहा गजानन के स्वरूपों ने
महानगर के बाजारों में शुक्रवार को खूब रौनक दिखी। भक्त अपने घरों में विराजमान करने के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा ले जाते नजर आए। इस बार बाजार में बड़ी प्रतिमाएं नजर नहीं आईं। गणेश जी की लघु प्रतिमा कई आकर्षक स्वरूपों में श्रद्धालुओं का मन मोह रही थीं। शंख, मोर, चूहा आदि पर विराजे भगवान शिव तथा मां पार्वती की पूजा करते गणेश जी की प्रतिमा लोगों को खूब पसंद आयी। हालांकि इस बार यह प्रतिमाएं दुगने दाम पर लोगों को मिलीं। आधा फिट की प्रतिमा जो पिछले साल 40 से 50 रुपये की थी। वह लोगों को 100 रुपये में मिली।
महानगर में आज शुक्रवार को हरितालिका तीज का पर्व भी मनाया गया। महिला श्रद्धालुओं ने निर्जल 24 घंटे का व्रत रखा। रात में सुंदर-सुंदर साड़ियों से झांकी सजाई। मां गौरी तथा शिव जी को विराजमान कर रात्रि में पूजा भी की। महानगर की लगभग प्रत्येक गली में भजनों की गूंज सुनने को मिली। इस पर्व का बुंदेलखंड में विशेष महत्व है।
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सनातन धर्म में गौरी पुत्र गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गजानन की पूजा करने से सभी प्रकार की समस्याएं मिट जाती हैं। गणेश पूजन के लिए आज शुक्रवार को घरों में खूब चहल-पहल रही। बाल भक्तों में खासा उत्साह नजर आया। कई घरों में भगवान गणेश को विराजमान करने के लिए तैयारियां जोरों पर दिखीं। पूजा स्थलों को संवारा गया। शनिवार को श्रद्धालु वैदिक रीति से भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजमान कर पूजा-अर्चना करेंगे। ज्योतिषविद पंडित नाथूराम पांडे के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में सिंह लग्न में अथवा सुबह 10.30 बजे के बाद तुला लग्न में विराजमान कर प्राण प्रतिष्ठा करें। यह शुभ समय रहेगा।
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भगवान की पूजा में दूर्वा अवश्य अर्पण करें। आचार्य शांतनु पांडे के अनुसार गणेश पूजा कलश स्थापित करें और अखंड दीप जलाएं। वहीं, धार्मिक मान्यता है कि गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन नहीं किया जाता है। इधर, महाराष्ट्र समाज के गणेश मंदिर में भगवान की पूजा सुबह 11.00 बजे से शुरू होगी। गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर ने बताया कि अथर्वशीर्ष का पाठ होगा। कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होगा। इधर, बड़ा बाजार के गणेश मढ़िया मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा पूजा की जाएगी।
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श्रद्धालुओं का मन मोहा गजानन के स्वरूपों ने
महानगर के बाजारों में शुक्रवार को खूब रौनक दिखी। भक्त अपने घरों में विराजमान करने के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा ले जाते नजर आए। इस बार बाजार में बड़ी प्रतिमाएं नजर नहीं आईं। गणेश जी की लघु प्रतिमा कई आकर्षक स्वरूपों में श्रद्धालुओं का मन मोह रही थीं। शंख, मोर, चूहा आदि पर विराजे भगवान शिव तथा मां पार्वती की पूजा करते गणेश जी की प्रतिमा लोगों को खूब पसंद आयी। हालांकि इस बार यह प्रतिमाएं दुगने दाम पर लोगों को मिलीं। आधा फिट की प्रतिमा जो पिछले साल 40 से 50 रुपये की थी। वह लोगों को 100 रुपये में मिली।
महानगर में आज शुक्रवार को हरितालिका तीज का पर्व भी मनाया गया। महिला श्रद्धालुओं ने निर्जल 24 घंटे का व्रत रखा। रात में सुंदर-सुंदर साड़ियों से झांकी सजाई। मां गौरी तथा शिव जी को विराजमान कर रात्रि में पूजा भी की। महानगर की लगभग प्रत्येक गली में भजनों की गूंज सुनने को मिली। इस पर्व का बुंदेलखंड में विशेष महत्व है।