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टिड्डी दल ने शिवपुरी में डाला डेरा, सीमा लांघ कभी भी आ सकता है झांसी
Sat, 30 May 2020 04:08 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2020 04:08 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : demo
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शुक्रवार को कोई नया टिड्डी दल झांसी नहीं पहुंचा। बावजूद, खतरा अभी टला नहीं है। क्योंकि, टिड्डियों का एक बड़ा दल झांसी से सटे मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में डेरा डाले हुए है। ये कीट कभी भी जिले की सीमा लांघ यहां दस्तक दे सकते हैं। इसे लेकर प्रशासन में अलर्ट है। केंद्र सरकार की टीम भी टिड्डियों के मूवमेंट पर नजर जमाए हुए है।
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कोरोना वायरस के संक्रमणकाल के दौर में टिड्डी बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। ईरान से चलकर पाकिस्तान, राजस्थान होते हुए टिड्डियों के तीन दल झांसी पर हमला बोल चुके हैं। ये टिड्डी दर्जनों गांवों में सब्जी, उड़द, मूंग की फसलों को बर्बाद कर चुके हैं। बुधवार को झांसी पहुंचे टिड्डी दल पर दो बार रसायन का छिड़काव किया गया, जिससे ये दल बुरी तरह से छितरा गया और कई हिस्सों में बंटकर मध्य प्रदेश की ओर रुख कर लिया।
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शुक्रवार की सुबह बबीना कस्बे में टिड्डियों का एक छोटा दल नजर आया था। वहीं, तालबेहट के ग्राम कंधारीकलां, उगरपुर, गेवरागुंदेरा आदि गांवों में भी टिड्डी दल नजर आया। लेकिन, प्रशासन और ग्रामीणों की सतर्कता की वजह से कीट खेतों में नहीं बैठ पाए। यहां से टिड्डी दल ने मप्र की ओर रुख कर गया। जबकि, शुक्रवार को झांसी कोई नया दल नहीं पहुंचा। लेकिन, खतरा लगातार बना हुआ है।
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जी हां, झांसी से सटे मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पिछोर में शुक्रवार की शाम के टिड्डी दल की मौजूदगी देखी गई। ये दल लगभग एक वर्ग किलोमीटर आकार का बताया जा रहा है। रात में इनके बैठने पर वहां इन कीटों पर रसायन का छिड़काव किया जाएगा। हवा का रुख अनुरूप होने पर ये कभी भी झांसी सीमा में दस्तक दे सकता है।
उप कृषि निदेशक कमल कटियार ने बताया कि टिड्डी दल की मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है। केंद्रीय टीम भी नजर जमाए हुए है। हवा का रुख अनुरूप होने पर ये कभी भी झांसी की ओर रुख कर सकता है। इन परिस्थितियों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
80 लाख टिड्डियों का हुआ ‘कत्ल ए आम’
झांसी। टिड्डी दल के खात्मे के लिए प्रशासन द्वारा ऑपरेशन ‘कत्ल ए आम’ चलाया जा रहा है। इसके तहत रात में ये कीट जहां प्रवास करते हैं, वहां फायर ब्रिगेड पर अन्य मशीनों के जरिये इन कीटों पर रसायन का छिड़काव किया जाता है। इससे अब तक जिले में अस्सी लाख टिड्डियों को मारा जा चुका है। बावजूद, लाखों की संख्या में कीट भागने में भी सफल रहे हैं।