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शिक्षकों की मेहनत रंग लाई, खंडहर पड़े स्कूल में चमक आई

Thu, 01 Sep 2022 12:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 01 Sep 2022 12:27 AM IST
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The hard work of the teachers paid off, the ruined school shone
झांसी। बड़ागांव ब्लॉक के गौरारी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय को ग्रामीणों और शिक्षकों ने चमका दिया है। जबकि पहले यह स्कूल खंडहर जैसा था। स्कूल परिसर में लोग अपने जानवर बांधा करते थे। लेकिन अब यहां स्मार्ट क्लासेस चल रही हैं...यह सब शिक्षकों और ग्रामीणों की मेहनत का नतीजा है।
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प्राथमिक विद्यालय गौरारी में 2017 में नियुक्त होकर आए महावीर शरण वैद्य बताते हैं कि यह स्कूल पूरी तरह खंडहर था। स्कूल में जगह-जगह गड्ढे थे, जिसमें भूसा रखा होता था। स्कूल परिसर में गांववाले जानवर बांधा करते थे। पांच वर्षों की मेहनत ने अब स्कूल को एक आदर्श विद्यालय बना दिया है। उन्होंने स्कूल में गेट और रेलिंग लगवाई। पांच कक्षों में संचालित विद्यालय में आज नामांकन 70 है जबकि वर्ष 2017 में सिर्फ 37 बच्चे थे। स्कूल में पांच लोगों का स्टाफ है। वह प्रधानाध्यापक हैं। सहायक शिक्षिका कृतिका सिंह, शिक्षामित्र गीता रानी और सनद कुमार नायक के साथ मिलकर लगातार स्कूल को बेहतरीन बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
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उन्होंने बताया कि खंडहर पड़े स्कूल में गांववालों के सहयोग से स्मार्ट क्लास शुरू कराई गई हैं। विद्यालय की एक खासियत यह भी है कि उन्होंने विद्यार्थियों को गणित विषय को आसान तरीके से समझाने के लिए विभिन्न शिक्षण सामग्री तैयार की है। जमीन पर बिछे एपैक्स पर पहाड़े पेंट कर दिए थे। शुरू में गांववालों के नकारात्मक रवैये को उन्होंने अपनी मेहनत से सकारात्मक कर लिया।
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आज गांव के 95 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, इससे अभिभावक भी संतुष्ट हैं। एक साल पहले उन्होंने गांववालों से बातचीत करके स्कूल में स्मार्ट क्लास शुरू करने का प्रस्ताव रखा था। जिसके बाद गांव के तकरीबन 15 लोगों ने स्मार्ट टीवी खरीदने के लिए सहयोग किया था। शेष धनराशि उन्होंने देकर स्मार्ट टीवी खरीद ली। स्कूल आज कायाकल्प के 18 पैरामीटर को संतृप्त कर रहा है। वह विद्यालय में लगे पौधों को पानी भी खुद ही देते हैं।
हर कार्य में गांववालों से सलाह मशवरा कर लेते हैं, सहमति के बाद स्कूल में हो रहे कार्यों में गांववाले भी पूरा सहयोग करते हैं। - महावीर शरण वैद्य, प्रधानाध्यापक

कुछ बच्चे एक साल प्राइवेट स्कूल में पढ़ने गए, लेकिन बाद में वहां से नाम कटवा कर अब यहीं पढ़ रहे हैं। - रविंद्र कुमार राजपूत, एसएमसी, सदस्य
विद्यालय के हर कार्य में गांववाले अब परिवार की तरह सहयोग करते हैं, जिसका फायदा गांव के बच्चों को ही होता है। - प्रमोद कुमार, गांववासी
पहले बच्चे गंदगी में पढ़ा करते थे, इन मास्साब ने स्कूल की दशा सुधार दी। छुट्टी के दिन भी मास्साब स्कूल पौधों में पानी ड़ालने जरूर आते हैं। - मानकुंवर, गांववासी
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