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Jhansi News: जिस बालिका को बदलने का आरोप, उसकी हुई मौत
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज में प्रसव के बाद जिस नवजात को बदलने का महिला ने आरोप लगाया था, सोमवार को उसकी मौत हो गई। बाल रोग विभागाध्यक्ष ने बताया कि जन्म से ही उसकी हालत नाजुक थी। वह वेंटिलेटर पर थी, मगर बचाया नहीं जा सका। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि माता-पिता व नवजात के डीएनए का मिलान कराने के लिए खून का सैंपल पुलिस को सौंपा जा चुका है। जांच रिपोर्ट आने के बाद सब कुछ साफ हो जाएगा।
कुछ दिन पहले मोंठ निवासी रीता पत्नी रोहित को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया। रीता का कहना है कि जब वह शौचालय गई थी, तभी बच्चे का जन्म हो गया। शोर मचाने पर डाॅक्टर व स्वास्थ्य कर्मी आए और बच्चे को ले गए। उस दौरान उसे लड़का होने के बारे में बताया गया। आरोप है कि कुछ समय बाद बेटी के जन्म लेने की बात कही गई। रीता ने बताया कि सोमवार को डीएनए जांच के कागजों पर पुलिस ने हस्ताक्षर कराए। रात में पता चला कि बच्ची की मौत हो है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए सौंपा।
कॉलेज प्रशासन ने शौचालय में प्रसव होने की बात गलत बताई है। तर्क दिया कि उस रात छह महिलाओं का प्रसव हुआ और सभी के लड़कियां हुई थीं। वहीं, नवजात की हालत चिंताजनक होने के कारण बाल रोग विभाग की एसएनसीयू में उपचार चल रहा था, जहां सोमवार रात उसकी मौत हो गई। बाल रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. ओमशंकर चौरसिया का कहना है कि जन्म से ही नवजात को दिक्कत थी। तमाम प्रयास के बावजूद सोमवार रात नवजात ने दम तोड़ दिया। एसआईसी डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि डीएनए जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी। बच्चा बदलने का आरोप पूरी तरह निराधार है।
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झांसी। मेडिकल कॉलेज में प्रसव के बाद जिस नवजात को बदलने का महिला ने आरोप लगाया था, सोमवार को उसकी मौत हो गई। बाल रोग विभागाध्यक्ष ने बताया कि जन्म से ही उसकी हालत नाजुक थी। वह वेंटिलेटर पर थी, मगर बचाया नहीं जा सका। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि माता-पिता व नवजात के डीएनए का मिलान कराने के लिए खून का सैंपल पुलिस को सौंपा जा चुका है। जांच रिपोर्ट आने के बाद सब कुछ साफ हो जाएगा।
कुछ दिन पहले मोंठ निवासी रीता पत्नी रोहित को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया। रीता का कहना है कि जब वह शौचालय गई थी, तभी बच्चे का जन्म हो गया। शोर मचाने पर डाॅक्टर व स्वास्थ्य कर्मी आए और बच्चे को ले गए। उस दौरान उसे लड़का होने के बारे में बताया गया। आरोप है कि कुछ समय बाद बेटी के जन्म लेने की बात कही गई। रीता ने बताया कि सोमवार को डीएनए जांच के कागजों पर पुलिस ने हस्ताक्षर कराए। रात में पता चला कि बच्ची की मौत हो है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए सौंपा।
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कॉलेज प्रशासन ने शौचालय में प्रसव होने की बात गलत बताई है। तर्क दिया कि उस रात छह महिलाओं का प्रसव हुआ और सभी के लड़कियां हुई थीं। वहीं, नवजात की हालत चिंताजनक होने के कारण बाल रोग विभाग की एसएनसीयू में उपचार चल रहा था, जहां सोमवार रात उसकी मौत हो गई। बाल रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. ओमशंकर चौरसिया का कहना है कि जन्म से ही नवजात को दिक्कत थी। तमाम प्रयास के बावजूद सोमवार रात नवजात ने दम तोड़ दिया। एसआईसी डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि डीएनए जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी। बच्चा बदलने का आरोप पूरी तरह निराधार है।
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