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अब झांसी में उगाया जाएगा थाईलैंड का एप्पल बेर
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झांसी। थाईलैंड का प्रसिद्व एप्पल बेर अब झांसी में भी उगाया जाएगा। इसके लिए उद्यान विभाग ने तैयारी कर ली है। 60 हेक्टेयर के एक कलस्टर में इसके उत्पादन की शुरूआत होगी। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए उनको पचास फीसदी से अधिक सब्सिडी भी मिलेगी। उद्यान विभाग के अधिकारियों का दावा है इसकी मदद से किसानों की आय में तेजी से बढ़ोतरी होगी।
सामान्य तौर पर भारतीय बेर का अधिकतम भार करीब दस-बीस ग्राम तक होता है, लेकिन थाइलैंड प्रजाति का एक बेर करीब 200 ग्राम वजनी होता है। इसका आकार-प्रकार कच्चे सेब की तरह होने के नाते इसे एप्पल बेर कहते हैं। जाड़े में यह फल तैयार होता है। इसका स्वाद भी भारतीय बेर की तरह खट्टा-मीठा होता है। अभी मप्र के कुछ इलाकों में इसका उत्पादन होता है, लेकिन यूपी में इसके बाग नहीं हैं। उद्यान विभाग ने झांसी में इसे उगाने की तैयारी की है। विशेषज्ञों के मुताबिक बुंदेलखंड की जमीन किन्नू, शरीफा, नींबू, मौसमी जैसे फलों के लिए काफी उपयोगी है। इस लिहाज से एप्पल बेर के भी अच्छे उत्पादन की उम्मीद है। शुरूआत में 60 हेक्टेयर रकबे में इसका बाग लगाया जाएगा। इसमें कुल लागत करीब 1.80 लाख प्रति हेक्टेयर आंकी गई है। इसमें किसानों को 90 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। एक हेक्टेयर में कुल 1110 पौधे रोपे जा सकेंगे। जुलाई से इनकी रोपाई आरंभ होगी। इसके छह माह बाद फल आने शुरू हो जाएंगे। तीन साल में इसका उत्पादन बढ़कर 60 किलो से एक क्विंटल तक पहुंच जाता है। अफसरों के मुताबिक दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत दक्षिण भारत की मंडी में यह फल आसानी से बिक जाता है। ऑनलाइन बाजार में भी इसकी अच्छी कीमत मिलती है।
बुंदेलखंड पैकेज के तहत इसका प्रस्ताव भेजा गया है। कुछ ही दिनों में मंजूरी मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस महीने से पौधरोपण आरंभ कराया जाएगा। इस फल के उत्पादन से किसानों की आय में तेजी से बढ़ोतरी होगी।
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विनय कुमार यादव, उपनिदेशक, उद्यान
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सामान्य तौर पर भारतीय बेर का अधिकतम भार करीब दस-बीस ग्राम तक होता है, लेकिन थाइलैंड प्रजाति का एक बेर करीब 200 ग्राम वजनी होता है। इसका आकार-प्रकार कच्चे सेब की तरह होने के नाते इसे एप्पल बेर कहते हैं। जाड़े में यह फल तैयार होता है। इसका स्वाद भी भारतीय बेर की तरह खट्टा-मीठा होता है। अभी मप्र के कुछ इलाकों में इसका उत्पादन होता है, लेकिन यूपी में इसके बाग नहीं हैं। उद्यान विभाग ने झांसी में इसे उगाने की तैयारी की है। विशेषज्ञों के मुताबिक बुंदेलखंड की जमीन किन्नू, शरीफा, नींबू, मौसमी जैसे फलों के लिए काफी उपयोगी है। इस लिहाज से एप्पल बेर के भी अच्छे उत्पादन की उम्मीद है। शुरूआत में 60 हेक्टेयर रकबे में इसका बाग लगाया जाएगा। इसमें कुल लागत करीब 1.80 लाख प्रति हेक्टेयर आंकी गई है। इसमें किसानों को 90 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। एक हेक्टेयर में कुल 1110 पौधे रोपे जा सकेंगे। जुलाई से इनकी रोपाई आरंभ होगी। इसके छह माह बाद फल आने शुरू हो जाएंगे। तीन साल में इसका उत्पादन बढ़कर 60 किलो से एक क्विंटल तक पहुंच जाता है। अफसरों के मुताबिक दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत दक्षिण भारत की मंडी में यह फल आसानी से बिक जाता है। ऑनलाइन बाजार में भी इसकी अच्छी कीमत मिलती है।
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बुंदेलखंड पैकेज के तहत इसका प्रस्ताव भेजा गया है। कुछ ही दिनों में मंजूरी मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस महीने से पौधरोपण आरंभ कराया जाएगा। इस फल के उत्पादन से किसानों की आय में तेजी से बढ़ोतरी होगी।
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विनय कुमार यादव, उपनिदेशक, उद्यान