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टैंकर पहुंचते ही मचती है भगदड़, झगड़ने लगते हैं लोग
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झांसी। मानसून की बेरुखी की वजह से क्षेत्र में महानगर में गहरा रहा जल संकट अब जानलेवा हो चला है। इसका अंदाजा मंगलवार को थाना प्रेमनगर इलाके के बिजौली क्षेत्र में हुई घटना को देखकर लगाया जा सकता है, जिसमें पहले पानी भरने को लेकर पड़ोसी आपस में मारपीट पर आमादा हो गए और घटना में एक महिला की जान चली गई। हालांकि, पानी भरने को लेकर हुए विवाद का ये नया मामला नहीं है। आए दिन इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।
जून महीना अपने अंतिम पड़ाव पर जा पहुंचा है। लेकिन, महानगर के तमाम क्षेत्र अब तक पानी को तरस रहे हैं। ज्यादातर इलाकों में हैंडपंप और बोरिंग गर्मी की शुरुआत में ही साथ छोड़ चुके थे और नलों में भी पानी कम आ रहा है। खासतौर पर उन इलाके के लोगों को पानी के भीषण संकट का सामना करना पड़ रहा है, जहां पाइप लाइन नहीं है। इन क्षेत्रों की आबादी पूरी तरह से टैंकरों पर निर्भर है। टैंकर पहुंचते ही इंतजार में बैठे लोग टूट पड़ते हैं और मिनटों में पानी साफ हो पाता है। किसी को पानी मिल पाता है और कोई खाली बर्तन लिए खड़ा रह जाता है। इससे सभी में पहले पानी भरने की होड़ लगी रहती है और यही विवाद की वजह बनती है। नोकझोंक और मारपीट की घटनाएं आए दिन होती हैं, जो कभी भी विवाद की बड़ी वजह बन सकती हैं।
पानी के भीषण संकट से जूझ रही है बड़ी आबादी
झांसी। महानगर के कई इलाके टैंकर से पहुंचने वाले पानी पर ही निर्भर हैं। इनमें ईसाई टोला, लहरगिर्द, अंदर और बाहर दतिया गेट, मेवातीपुरा, अंदर और बाहर उनाव गेट, पंचवटी, मुकरयाना, दरीगरान, बड़ागांव गेट बाहर, बिजौली, राजगढ़, नैनागढ़, बाहर ओरछा गेट, डड़ियापुरा, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, वकील कॉलोनी, भगवंतपुरा, सिमराहा, सिमरधा, गरियागांव, अलीगोल, सिद्धेश्वर नगर, मसीहागंज, नाल गंज, खालसा स्कूल बस्ती आदि मुहल्लों में पानी का भीषण संकट व्याप्त है। यहां के निवासी पानी के इंतजाम में दिन भर भटकते रहते हैं। पानी का बंदोबस्त करने के लिए उन्हें कई-कई किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है।
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महानगर में दौड़ते हैं 40 टैंकर
महानगर में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए जल संस्थान और नगर निगम ने टैंकरों का इंतजाम किया हुआ है। करीब 40 टैंकर पूरे दिन में 10 चक्कर लगाकर अलग-अलग क्षेत्रों में पानी लेकर जाते हैं। महानगर के बड़ागांव गेट बाहर, नैनागढ़, प्रेमनगर, डडियापुरा, ओरछा गेट, मेवातीपुरा, सिद्धेश्वर नगर, सीपरी बाजार समेत तमाम क्षेत्रों में टैंकर से ही जलापूर्ति होती है।
पानी के लिए चंद मिनटों में बिगड़ गए सालों के संबंध
झांसी। मंगलवार को बिजौली में हुई घटना में सामने आया कि आरोपियों का मृतका व उसके परिवार के लोगों से कोई पुराना विवाद नहीं था। दोनों सालों से पड़ोसी थे और उनके बीच संबंध सामान्य थे। लेकिन, पानी के लिए दोनों ही परेशान थे। सुबह नौ बजे टैंकर के पहुंचते ही मुहल्ले के अन्य लोगों के साथ-साथ उनमें भी पहले पानी भरने को लेकर होड़ मच गई। इसी बीच विवाद हो गया। नौबत हाथापाई पर आ पहुंची। वीरेंद्र जोशी की पत्नी रमा ने रघुराज की पत्नी उत्तरा देवी को धक्का मार दिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही समय बाद मौत हो गई। रघुराज सिंह की तहरीर पर प्रेमनगर थाने में वीरेंद्र जोशी और उनकी पत्नी रमा देवी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
एक हजार की आबादी पर सिर्फ एक टैंकर, कैसे होगा गला तर
सब हेड... पानी की कर्मी से दुधारू पशुओं से नाता तोड़ा, रिश्तेदार पड़ जाते हैं भारी
- कई-कई किमी दूर से लाना पड़ता है पानी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बिजौली के जिस इलाके में पानी भरने को लेकर हुए विवाद में महिला की मौत हुई है, वो पूरा क्षेत्र भीषण जल संकट से जूझ रहा है। लोगों को पानी की तलाश में दो-तीन किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। बुजुर्गों को छोड़ घर के बाकी सदस्य दिन भर पानी के बंदोबस्त में ही जुटे रहते हैं। हालात ये हैं कि पानी की कमी की वजह से लोगों ने अपने दुधारू पशु बेच दिए हैं या फिर छुट्टा छोड़ दिए हैं। रिश्तेदारों का घर आना यहां के लोगों को भारी पड़ जाता है। टैंकर आता है, लेकिन एक हजार से अधिक की आबादी के लिए इसका पानी ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित होता है। टैंकर आते ही लोगों में पानी भरने को लेकर आपाधापी मच जाती है, जो विवाद की वजह से बनती है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि वे कई बाद इस समस्या को प्रशासन के समक्ष रख चुके हैं, लेकिन हालात नहीं बदले।
फोटो...
मुहल्ले के पास से ही माताटीला की पाइप लाइन गुजरी है, लेकिन हमारे यहां नल तक का इंतजाम नहीं है। अपना काम छोड़कर पानी का इंतजाम करना पड़ता है।
- बृजेंद्र परिहार
फोटो...
सड़क पर लगे हैंडपंप फोरलेन बनने की वजह से बेकार हो गए। मुहल्ले में पानी का अब कोई जरिया नहीं बचा है। सभी टैंकर के ही भरोसे हैं। हाल बेहाल है।
- मंगल
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मुहल्ले की आबादी लगभग एक हजार है और क्षेत्र में सिर्फ एक ही टैंकर आता है। हर घर को मुश्किल से दो-चार बाल्टी पानी ही मिल पाता है। इतना तो पीने में ही खर्च हो जाता है।
- सुरेश
फोटो...
वोट मांगने की बारी आती है तो सब पानी की कमी दूर करने का भरोसा देते हैं। चुनाव खत्म होने के बाद कोई ध्यान नहीं देता। भीषण गर्मी में कूलर तक नहीं चला पा रहे हैं।
- प्रभा
फोटो...
पानी का टैंकर आते ही हर कोई एकदूसरे से लड़ने को तैयार हो जाता है। तू-तू मैं-मैं तो रोज की बात है। ऐसे ही विवाद में मुहल्ले की एक महिला की जान चली गई।
- सूरज देवी
फोटो...
पानी की कमी की वजह से मुहल्ले के लोगों ने अपनी भैंसें बेच दीं और गाय छुुट्टा छोड़ दीं। खुद के पीने का पानी नहीं है तो जानवरों को कहां से देंगे।
- जामवती
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दिन भर घर के आदमी साइकिल पर डिब्बे टांगकर दूर-दूर से पानी भरकर लाते रहते हैं, उसके बाद कमी बनी रहती है। सब से शिकायत कर चुके पर कुछ नहीं हुआ।
- दीपा
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पानी के लिए टैंकर आने पर मुहल्ले के लोगों में रोज लड़ाई होती है। क्या करें, सभी को पानी की जरूरत है। मिल पाता नहीं है। ऐसे में सभी टैंकर आने पर पहले पानी भरना चाहते हैं।
- गायत्री
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जून महीना अपने अंतिम पड़ाव पर जा पहुंचा है। लेकिन, महानगर के तमाम क्षेत्र अब तक पानी को तरस रहे हैं। ज्यादातर इलाकों में हैंडपंप और बोरिंग गर्मी की शुरुआत में ही साथ छोड़ चुके थे और नलों में भी पानी कम आ रहा है। खासतौर पर उन इलाके के लोगों को पानी के भीषण संकट का सामना करना पड़ रहा है, जहां पाइप लाइन नहीं है। इन क्षेत्रों की आबादी पूरी तरह से टैंकरों पर निर्भर है। टैंकर पहुंचते ही इंतजार में बैठे लोग टूट पड़ते हैं और मिनटों में पानी साफ हो पाता है। किसी को पानी मिल पाता है और कोई खाली बर्तन लिए खड़ा रह जाता है। इससे सभी में पहले पानी भरने की होड़ लगी रहती है और यही विवाद की वजह बनती है। नोकझोंक और मारपीट की घटनाएं आए दिन होती हैं, जो कभी भी विवाद की बड़ी वजह बन सकती हैं।
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पानी के भीषण संकट से जूझ रही है बड़ी आबादी
झांसी। महानगर के कई इलाके टैंकर से पहुंचने वाले पानी पर ही निर्भर हैं। इनमें ईसाई टोला, लहरगिर्द, अंदर और बाहर दतिया गेट, मेवातीपुरा, अंदर और बाहर उनाव गेट, पंचवटी, मुकरयाना, दरीगरान, बड़ागांव गेट बाहर, बिजौली, राजगढ़, नैनागढ़, बाहर ओरछा गेट, डड़ियापुरा, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, वकील कॉलोनी, भगवंतपुरा, सिमराहा, सिमरधा, गरियागांव, अलीगोल, सिद्धेश्वर नगर, मसीहागंज, नाल गंज, खालसा स्कूल बस्ती आदि मुहल्लों में पानी का भीषण संकट व्याप्त है। यहां के निवासी पानी के इंतजाम में दिन भर भटकते रहते हैं। पानी का बंदोबस्त करने के लिए उन्हें कई-कई किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है।
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महानगर में दौड़ते हैं 40 टैंकर
महानगर में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए जल संस्थान और नगर निगम ने टैंकरों का इंतजाम किया हुआ है। करीब 40 टैंकर पूरे दिन में 10 चक्कर लगाकर अलग-अलग क्षेत्रों में पानी लेकर जाते हैं। महानगर के बड़ागांव गेट बाहर, नैनागढ़, प्रेमनगर, डडियापुरा, ओरछा गेट, मेवातीपुरा, सिद्धेश्वर नगर, सीपरी बाजार समेत तमाम क्षेत्रों में टैंकर से ही जलापूर्ति होती है।
पानी के लिए चंद मिनटों में बिगड़ गए सालों के संबंध
झांसी। मंगलवार को बिजौली में हुई घटना में सामने आया कि आरोपियों का मृतका व उसके परिवार के लोगों से कोई पुराना विवाद नहीं था। दोनों सालों से पड़ोसी थे और उनके बीच संबंध सामान्य थे। लेकिन, पानी के लिए दोनों ही परेशान थे। सुबह नौ बजे टैंकर के पहुंचते ही मुहल्ले के अन्य लोगों के साथ-साथ उनमें भी पहले पानी भरने को लेकर होड़ मच गई। इसी बीच विवाद हो गया। नौबत हाथापाई पर आ पहुंची। वीरेंद्र जोशी की पत्नी रमा ने रघुराज की पत्नी उत्तरा देवी को धक्का मार दिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही समय बाद मौत हो गई। रघुराज सिंह की तहरीर पर प्रेमनगर थाने में वीरेंद्र जोशी और उनकी पत्नी रमा देवी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
एक हजार की आबादी पर सिर्फ एक टैंकर, कैसे होगा गला तर
सब हेड... पानी की कर्मी से दुधारू पशुओं से नाता तोड़ा, रिश्तेदार पड़ जाते हैं भारी
- कई-कई किमी दूर से लाना पड़ता है पानी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बिजौली के जिस इलाके में पानी भरने को लेकर हुए विवाद में महिला की मौत हुई है, वो पूरा क्षेत्र भीषण जल संकट से जूझ रहा है। लोगों को पानी की तलाश में दो-तीन किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। बुजुर्गों को छोड़ घर के बाकी सदस्य दिन भर पानी के बंदोबस्त में ही जुटे रहते हैं। हालात ये हैं कि पानी की कमी की वजह से लोगों ने अपने दुधारू पशु बेच दिए हैं या फिर छुट्टा छोड़ दिए हैं। रिश्तेदारों का घर आना यहां के लोगों को भारी पड़ जाता है। टैंकर आता है, लेकिन एक हजार से अधिक की आबादी के लिए इसका पानी ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित होता है। टैंकर आते ही लोगों में पानी भरने को लेकर आपाधापी मच जाती है, जो विवाद की वजह से बनती है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि वे कई बाद इस समस्या को प्रशासन के समक्ष रख चुके हैं, लेकिन हालात नहीं बदले।
फोटो...
मुहल्ले के पास से ही माताटीला की पाइप लाइन गुजरी है, लेकिन हमारे यहां नल तक का इंतजाम नहीं है। अपना काम छोड़कर पानी का इंतजाम करना पड़ता है।
- बृजेंद्र परिहार
फोटो...
सड़क पर लगे हैंडपंप फोरलेन बनने की वजह से बेकार हो गए। मुहल्ले में पानी का अब कोई जरिया नहीं बचा है। सभी टैंकर के ही भरोसे हैं। हाल बेहाल है।
- मंगल
फोटो...
मुहल्ले की आबादी लगभग एक हजार है और क्षेत्र में सिर्फ एक ही टैंकर आता है। हर घर को मुश्किल से दो-चार बाल्टी पानी ही मिल पाता है। इतना तो पीने में ही खर्च हो जाता है।
- सुरेश
फोटो...
वोट मांगने की बारी आती है तो सब पानी की कमी दूर करने का भरोसा देते हैं। चुनाव खत्म होने के बाद कोई ध्यान नहीं देता। भीषण गर्मी में कूलर तक नहीं चला पा रहे हैं।
- प्रभा
फोटो...
पानी का टैंकर आते ही हर कोई एकदूसरे से लड़ने को तैयार हो जाता है। तू-तू मैं-मैं तो रोज की बात है। ऐसे ही विवाद में मुहल्ले की एक महिला की जान चली गई।
- सूरज देवी
फोटो...
पानी की कमी की वजह से मुहल्ले के लोगों ने अपनी भैंसें बेच दीं और गाय छुुट्टा छोड़ दीं। खुद के पीने का पानी नहीं है तो जानवरों को कहां से देंगे।
- जामवती
फोटो...
दिन भर घर के आदमी साइकिल पर डिब्बे टांगकर दूर-दूर से पानी भरकर लाते रहते हैं, उसके बाद कमी बनी रहती है। सब से शिकायत कर चुके पर कुछ नहीं हुआ।
- दीपा
फोटो...
पानी के लिए टैंकर आने पर मुहल्ले के लोगों में रोज लड़ाई होती है। क्या करें, सभी को पानी की जरूरत है। मिल पाता नहीं है। ऐसे में सभी टैंकर आने पर पहले पानी भरना चाहते हैं।
- गायत्री