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कल्पवृक्ष के समान है श्रीमद्भागवत कथा
Thu, 14 Mar 2019 12:55 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Thu, 14 Mar 2019 12:55 AM IST
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bhagwat katha
- फोटो : amarujala
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श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। यह कल्पवृक्ष के समान है। आवश्यक है कि मनुष्य इसे निर्मल भाव से सुनें और सत्य धर्म के मार्ग का पालन करें। यह उद्गार नगरा हाट के मैदान में बुधवार को श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के प्रथम दिवस कथा व्यास आचार्य मनोज चतुर्वेदी ने प्रकट किए।
कथा व्यास ने कहा कि जो भागवत कथा ही साक्षात कृष्ण है और जो कृष्ण है वही साक्षात भागवत है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत की महिमा सुनाते हुए कहा कि एक बार नारद जी ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनके मन को शांति नहीं हुई। नारद जी वृंदावन धाम की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे, जो अचेत थे। युवती बोली महाराज मेरा नाम भक्ति है। यह दोनो मेरे पुत्र है, जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य है। यह वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे। लेकिन बृज में प्रवेश करते ही यह दोनों अचेत हो गए। बूढे़ हो गए। आप इन्हें जगा दीजिए। इसके बाद देवर्षि नारद जी ने चारों वेद, छहों शास्त्र और 18 पुराण व गीता पाठ भी सुना दिया। लेकिन वह नहीं जागे। नारद ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी। ज्ञान -वैराग्य क ो जगाने का उपाय पूछा। मुनियों के बताने पर नारद जी ने हरिद्वार धाम में आनंद नामक तट पर भागवत कथा का आयोजन किया। मुनि कथा व्यास और नारद जी मुख्य परीक्षित बने। इससे ज्ञान और वैराग्य प्रथम दिवस की ही कथा सुनकर जाग गए।
इस अवसर पर दिलीप पांडेय, मैथिली मुदगिल, राकेश सेन, राम प्रसाद, भोले कुशवाहा, रामआसरे गुप्ता, चंद्र मोहन तिवारी, एसपी नामदेव, श्रवण तिवारी, संतोष अंजनी, मिथलेश मिश्रा, अरविंद जायसवाल, मनोज अवस्थी आदि मौजूद रहे। संचालन सियाराम शरण चतुर्वेदी ने किया और आभार खूबीराम मिश्रा ने जताया।
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कथा व्यास ने कहा कि जो भागवत कथा ही साक्षात कृष्ण है और जो कृष्ण है वही साक्षात भागवत है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत की महिमा सुनाते हुए कहा कि एक बार नारद जी ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनके मन को शांति नहीं हुई। नारद जी वृंदावन धाम की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे, जो अचेत थे। युवती बोली महाराज मेरा नाम भक्ति है। यह दोनो मेरे पुत्र है, जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य है। यह वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे। लेकिन बृज में प्रवेश करते ही यह दोनों अचेत हो गए। बूढे़ हो गए। आप इन्हें जगा दीजिए। इसके बाद देवर्षि नारद जी ने चारों वेद, छहों शास्त्र और 18 पुराण व गीता पाठ भी सुना दिया। लेकिन वह नहीं जागे। नारद ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी। ज्ञान -वैराग्य क ो जगाने का उपाय पूछा। मुनियों के बताने पर नारद जी ने हरिद्वार धाम में आनंद नामक तट पर भागवत कथा का आयोजन किया। मुनि कथा व्यास और नारद जी मुख्य परीक्षित बने। इससे ज्ञान और वैराग्य प्रथम दिवस की ही कथा सुनकर जाग गए।
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इस अवसर पर दिलीप पांडेय, मैथिली मुदगिल, राकेश सेन, राम प्रसाद, भोले कुशवाहा, रामआसरे गुप्ता, चंद्र मोहन तिवारी, एसपी नामदेव, श्रवण तिवारी, संतोष अंजनी, मिथलेश मिश्रा, अरविंद जायसवाल, मनोज अवस्थी आदि मौजूद रहे। संचालन सियाराम शरण चतुर्वेदी ने किया और आभार खूबीराम मिश्रा ने जताया।
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