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बिरलानगर और उदिमोड़ के बीच स्पीड ट्रायल सफल, दौड़ेंगे इलेक्ट्रिक इंजन
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झांसी। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) उत्तर पूर्व परिक्षेत्र मोहम्मद लतीफ खान झांसी रेलवे मंडल के बिरलानगर और उदिमोड़ के बीच 101 किलोमीटर ट्रैक पर पूरा किए गए ओएचई का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सिग्नल मेंटीनेंस, ट्रैक प्वाइंट्स आदि का गहनता से परीक्षण किया। अब इस रेल लाइन पर विद्युत इंजनों से शीघ्र ही ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा।
रेल संरक्षा आयुक्त बुधवार को स्पेशल ट्रेन से मंडल के ग्वालियर- इटावा रेल लाइन के बिरलानगर- उदिमोड़ सेक्शन का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने विंडो ट्रेलिंग से 101.012 किलोमीटर ट्रैक पर 95 करोड़ की लागत से हुए विद्युतीकरण के कार्य को देखा। इसके बाद इस पर 120 किलोमीटर की रफ्तार से इंजन दौड़ाकर ट्रायल किया गया। ट्रायल की सफलता के बाद उन्होंने यहां पर स्थापित किए गए ट्रैक प्वाइंट्स, सिग्नल एवं वायरिंग, बीच के स्टेशनों पर सिग्नल इंस्टालेशन का तकनीकी निरीक्षण किया। इस सेक्शन में पड़ने वाले क्वारी एवं चंबल पुलों की गुणवत्ता परखी और अधिकारियों से इसके निर्माण और क्षमता के संबंध में बातचीत भी की। निरीक्षण के पश्चात सीआरएस ने अपनी सहमति जताई। इस दौरान सीआरएस के साथ डीआरएम (प्रभारी) संदीप माथुर, मुख्य विद्युत अभियंता सतीश कोठारी, सीईडीई अनुराग गुप्ता, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (टीआरडी) नितिन वर्मा, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी अशोक प्रिय गौतम, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (सामान्य) रघुनाथ सिंह, वरिष्ठ मंडल अभियंता (उत्तर) सुधीर कुमार, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक शशिकांत त्रिपाठी समेत सभी मंडलीय अधिकारी, निरीक्षक एवं पर्यवेक्षक मौजूद रहे।
इलेक्ट्रिक इंजन के संचालन से रेलवे को रोजाना होगी 5 लाख की बचत
बिरला नगर और उदिमोड़ सेक्शन में हुए विद्युतीकरण, इलेक्टॉनिक इंटरलॉकिंग, ट्रैक प्वाइंट्स के सीआरएस के निरीक्षण के पश्चात झांसी मंडल के इटावा-ग्वालियर सेक्शन के बीच इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। डीजल इंजनों से ट्रेनों का परिचालन बंद हो जाने से रेलवे को पांच लाख रुपये से अधिक की बचत होगी। अभी तक इस रेल खंड पर डीजल इंजन से आठ ट्रेनों का परिचालन हो रहा है।
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रेल संरक्षा आयुक्त बुधवार को स्पेशल ट्रेन से मंडल के ग्वालियर- इटावा रेल लाइन के बिरलानगर- उदिमोड़ सेक्शन का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने विंडो ट्रेलिंग से 101.012 किलोमीटर ट्रैक पर 95 करोड़ की लागत से हुए विद्युतीकरण के कार्य को देखा। इसके बाद इस पर 120 किलोमीटर की रफ्तार से इंजन दौड़ाकर ट्रायल किया गया। ट्रायल की सफलता के बाद उन्होंने यहां पर स्थापित किए गए ट्रैक प्वाइंट्स, सिग्नल एवं वायरिंग, बीच के स्टेशनों पर सिग्नल इंस्टालेशन का तकनीकी निरीक्षण किया। इस सेक्शन में पड़ने वाले क्वारी एवं चंबल पुलों की गुणवत्ता परखी और अधिकारियों से इसके निर्माण और क्षमता के संबंध में बातचीत भी की। निरीक्षण के पश्चात सीआरएस ने अपनी सहमति जताई। इस दौरान सीआरएस के साथ डीआरएम (प्रभारी) संदीप माथुर, मुख्य विद्युत अभियंता सतीश कोठारी, सीईडीई अनुराग गुप्ता, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (टीआरडी) नितिन वर्मा, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी अशोक प्रिय गौतम, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (सामान्य) रघुनाथ सिंह, वरिष्ठ मंडल अभियंता (उत्तर) सुधीर कुमार, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक शशिकांत त्रिपाठी समेत सभी मंडलीय अधिकारी, निरीक्षक एवं पर्यवेक्षक मौजूद रहे।
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इलेक्ट्रिक इंजन के संचालन से रेलवे को रोजाना होगी 5 लाख की बचत
बिरला नगर और उदिमोड़ सेक्शन में हुए विद्युतीकरण, इलेक्टॉनिक इंटरलॉकिंग, ट्रैक प्वाइंट्स के सीआरएस के निरीक्षण के पश्चात झांसी मंडल के इटावा-ग्वालियर सेक्शन के बीच इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। डीजल इंजनों से ट्रेनों का परिचालन बंद हो जाने से रेलवे को पांच लाख रुपये से अधिक की बचत होगी। अभी तक इस रेल खंड पर डीजल इंजन से आठ ट्रेनों का परिचालन हो रहा है।
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