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दिग्गज नेताओं में रार, अब आरपार को तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jul 2016 02:06 AM IST
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samajwadi party, jhansi hindi news
- फोटो : demo
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झांसी। विधानसभा के टिकट घोषित होने के बाद से समाजवादी पार्टी की स्थानीय राजनीति में शुरू हुई अंदरखाने की गुटबाजी अब सड़क पर आ गई है। मामला अब एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी तक ही सीमित नहीं रह गया, बल्कि नौबत मारपीट और थाने तक पहुंच गई है। अपने नेताओं को आपस में यूं उलझता देख कार्यकर्ता सांसत में हैं। धड़ों में बंटी पार्टी में वे अपनी भूमिका तय नहीं कर पा रहे हैं। इस सब का असर विधानसभा चुनाव की तैयारी पर भी पड़ रहा है। पूरे मामले की रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को भिजवाई जा रही है।
समाजवादी पार्टी में गुटबाजी कोई नई नहीं है, परंतु यह अंदरखाने तक ही सीमित थी। नेताओं का आपसी विरोध कार्यकर्ताओं में तो चर्चा में रहता था, लेकिन आम जनता तक नहीं पहुंच पाता था। विधानसभा टिकटों की घोषणा के बाद नेता आपस में खुलकर सामने आ गए। भाजपा छोड़ सपा में आए पूर्व एमएलसी श्यामसुंदर सिंह को बबीना से प्रत्याशी बनाने की राज्यसभा सांसद खुलकर मुखालफत कर रहे हैं। जबकि, सांसद के विरोध में पूर्व जिलाध्यक्ष संत सिंह सेरसा उतरे हुए हैं।
टिकट की घोषणा के बाद एक-दूसरे को निपटाने की कोशिश हो रहीं हैं। श्याम सुंदर सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने के खिलाफ उनके विरोधी गुट ने जोरदार प्रदर्शन किया था। हाईकमान पर टिकट बदलने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और इसके पीछे दिग्गज नेता हैं। दोनों ही गुट सपा की स्थानीय राजनीति में मजबूत हैं और शायद इसी कारण हाईकमान कोई बड़ा निर्णय नहीं ले पा रहा है। रविवार को झांसी आए पार्टी पर्यवेक्षकों के सामने भी पार्टी दो धड़ों में बंटी रही। टिकट को लेकर दावेदारों के समर्थक आमने - सामने की स्थिति में रहे। इसी गरमागरमी के माहौल में महिला आयोग की सदस्य सुषमा यादव के साथ मारपीट की घटना हो गई। मंगलवार को पुलिस ने सुषमा व सुनीता कुशवाहा की ओर से दो एफआईआर की हैं।
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दोनों धड़ों के नेताओं पर अलग-अलग मुकदमे कायम हुए हैं। इस लड़ाई में अब तक मौन चल रहे गरौठा विधायक दीपनारायण सिंह यादव भी अब पार्टी बन गए हैं। कुल मिलाकर सपा में जमकर रार मची हुई है। वह भी ऐसे वक्त पर जब विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। पार्टी की इस स्थिति का असर विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ रहा है। नेता जनता के बीच जाने की बजाय आपस में ही उलझे हुए हैं। इसके अलावा पार्टी की दूसरी लाइन के नेता व कार्यकर्ता भी उलझन में हैं। वह इस लड़ाई में किसी के भी साथ खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।
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समाजवादी पार्टी में गुटबाजी कोई नई नहीं है, परंतु यह अंदरखाने तक ही सीमित थी। नेताओं का आपसी विरोध कार्यकर्ताओं में तो चर्चा में रहता था, लेकिन आम जनता तक नहीं पहुंच पाता था। विधानसभा टिकटों की घोषणा के बाद नेता आपस में खुलकर सामने आ गए। भाजपा छोड़ सपा में आए पूर्व एमएलसी श्यामसुंदर सिंह को बबीना से प्रत्याशी बनाने की राज्यसभा सांसद खुलकर मुखालफत कर रहे हैं। जबकि, सांसद के विरोध में पूर्व जिलाध्यक्ष संत सिंह सेरसा उतरे हुए हैं।
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टिकट की घोषणा के बाद एक-दूसरे को निपटाने की कोशिश हो रहीं हैं। श्याम सुंदर सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने के खिलाफ उनके विरोधी गुट ने जोरदार प्रदर्शन किया था। हाईकमान पर टिकट बदलने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और इसके पीछे दिग्गज नेता हैं। दोनों ही गुट सपा की स्थानीय राजनीति में मजबूत हैं और शायद इसी कारण हाईकमान कोई बड़ा निर्णय नहीं ले पा रहा है। रविवार को झांसी आए पार्टी पर्यवेक्षकों के सामने भी पार्टी दो धड़ों में बंटी रही। टिकट को लेकर दावेदारों के समर्थक आमने - सामने की स्थिति में रहे। इसी गरमागरमी के माहौल में महिला आयोग की सदस्य सुषमा यादव के साथ मारपीट की घटना हो गई। मंगलवार को पुलिस ने सुषमा व सुनीता कुशवाहा की ओर से दो एफआईआर की हैं।
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दोनों धड़ों के नेताओं पर अलग-अलग मुकदमे कायम हुए हैं। इस लड़ाई में अब तक मौन चल रहे गरौठा विधायक दीपनारायण सिंह यादव भी अब पार्टी बन गए हैं। कुल मिलाकर सपा में जमकर रार मची हुई है। वह भी ऐसे वक्त पर जब विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। पार्टी की इस स्थिति का असर विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ रहा है। नेता जनता के बीच जाने की बजाय आपस में ही उलझे हुए हैं। इसके अलावा पार्टी की दूसरी लाइन के नेता व कार्यकर्ता भी उलझन में हैं। वह इस लड़ाई में किसी के भी साथ खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।