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‘बीमार’ रानीपुर हथकरघा उद्योग का हुआ ‘डायग्नोस’
ब्यूरो
Updated Fri, 04 Dec 2015 01:58 AM IST
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झांसी। बीमार रानीपुर हथकरघा उद्योग की डायग्नोस्टिक स्टडी रिपोर्ट (डीएसआर) तैयार कर ली गई है, जिसमें आठ करोड़ रुपये की लागत से कम्यूनिटी फेसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनाने की सिफारिश की गई है। इसके लिए बुनकरों के बीच भी सहमति बन गई है। वह अपने हिस्से के अंशदान के लिए तैयार हो गए हैं।
सीएफसी की स्थापना के लिए केंद्रीय सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग मंत्रालय द्वारा डीएसआर तैयार कराई गई है। नोएडा की एक एजेंसी द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार रानीपुर हथकरघा उद्योग को डाइंग प्लांट, साइजिंग मशीन व कलेंडरिंग मशीन तथा अन्य संसाधनों की आवश्यकता है, जिस पर आठ करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें नियमानुसार दस फीसदी अंशदान बुनकरों को करना होगा।
इसके लिए दो सौ बुनकर राजी भी हो गए हैं। बुनकरों ने पचास लाख रुपये के अंशदान पर सहमति जता दी है। इसके अलावा रिपोर्ट में बुनकरों को आधुनिक पद्धति के अनुसार कपड़ा तैयार करने व उसकी मार्केटिंग के प्रशिक्षण की भी सिफारिश की गई है। मालूम हो कि आधुनिक मशीनों के अभाव व तैयार कपड़े की बिक्री की उचित व्यवस्था न होने की वजह से रानीपुर का हथकरघा उद्योग बीमारी की अवस्था में है।
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लेकिन, अब भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग मंत्रालय ने इसे इस स्थिति से उबारने की तैयारी कर ली है। इसके लिए यहां सीएफसी स्थापित करने की तैयारी है, जिसमें बुनकरों को आधुनिक मशीनें व अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके संचालन की जिम्मेदारी भी बुनकरों पर ही रहेगी।
‘रानीपुर हथकरघा उद्योग की डीएसआर इसी सप्ताह शासन को भेज दी जाएगी। दो सौ बुनकर पचास लाख के अंशदान को तैयार भी हो गए हैं। अन्य बुनकरों से भी बातचीत जारी है।’
- रविकांत शुक्ला, डिप्टी कमिश्नर, उद्योग
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सीएफसी की स्थापना के लिए केंद्रीय सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग मंत्रालय द्वारा डीएसआर तैयार कराई गई है। नोएडा की एक एजेंसी द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार रानीपुर हथकरघा उद्योग को डाइंग प्लांट, साइजिंग मशीन व कलेंडरिंग मशीन तथा अन्य संसाधनों की आवश्यकता है, जिस पर आठ करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें नियमानुसार दस फीसदी अंशदान बुनकरों को करना होगा।
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इसके लिए दो सौ बुनकर राजी भी हो गए हैं। बुनकरों ने पचास लाख रुपये के अंशदान पर सहमति जता दी है। इसके अलावा रिपोर्ट में बुनकरों को आधुनिक पद्धति के अनुसार कपड़ा तैयार करने व उसकी मार्केटिंग के प्रशिक्षण की भी सिफारिश की गई है। मालूम हो कि आधुनिक मशीनों के अभाव व तैयार कपड़े की बिक्री की उचित व्यवस्था न होने की वजह से रानीपुर का हथकरघा उद्योग बीमारी की अवस्था में है।
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लेकिन, अब भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग मंत्रालय ने इसे इस स्थिति से उबारने की तैयारी कर ली है। इसके लिए यहां सीएफसी स्थापित करने की तैयारी है, जिसमें बुनकरों को आधुनिक मशीनें व अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके संचालन की जिम्मेदारी भी बुनकरों पर ही रहेगी।
‘रानीपुर हथकरघा उद्योग की डीएसआर इसी सप्ताह शासन को भेज दी जाएगी। दो सौ बुनकर पचास लाख के अंशदान को तैयार भी हो गए हैं। अन्य बुनकरों से भी बातचीत जारी है।’
- रविकांत शुक्ला, डिप्टी कमिश्नर, उद्योग